हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता सोनू सूद को जनसेवा के कार्यों के कारण प्रायः 'जरूरतमंदों का मसीहा' कहा जाता है। कोविड से लेकर आज तक सोनू सूद जरूरतमंद और गरीब लोगों की मदद कर रहे हैं। हाल ही में हुई एक नौका दुर्घटना ने अभिनेता को गहरी निराशा में डाल दिया है। सोनू सूद ने इस घटना के लिए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने निराशा व्यक्त करते हुए पूछा है कि आखिर व्यवस्था की इन कमियों के कारण लोगों को कब तक अपनी जान गंवानी पड़ेगी?
मध्य प्रदेश के बरगी बांध के पास नर्मदा नदी में क्रूज नाव पलट जाने की दुर्घटना ने सोनू सूद को परेशान कर दिया है। वे पहले ही बिहार और वृंदावन में घट चुकी नाव दुर्घटना पर लाइफ जैकेट को लेकर जागरुकता फैला चुके हैं, लेकिन फिर भी एक के बाद एक हो रही दुर्घटनाओं की वजह से वे अंदर से निराश हैं।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "कुछ समय पहले मैंने बिहार में हुई नाव दुर्घटना के बारे में एक्स पोस्ट किया था और हर यात्री के लिए लाइफ जैकेट अनिवार्य करने की अपील की थी। फिर वृंदावन की घटना हुई... और अब मध्य प्रदेश में, इसी तरह कई और जानें गईं। कितनी और जानें जाएंगी?
अभिनेता ने आगे लिखा, "अब इसे अनिवार्य बनाने का समय आ गया है, कोई भी नाव बिना हर यात्री के लाइफ जैकेट पहने रवाना न हो। हमें एक सरकारी पोर्टल की भी आवश्यकता है जहां प्रत्येक यात्रा से पहले सभी यात्रियों के लाइफ जैकेट पहने होने का समय-चिह्नित प्रमाण अपलोड किया जाए। केवल कड़ी जवाबदेही ही जानें बचा सकती है।"
बता दें कि बीते गुरुवार को मध्य प्रदेश के बरगी बांध के पास नर्मदा नदी में क्रूज नाव पलटने से नौ लोगों की जान जा चुकी है और बाकी लोगों की तलाश जारी है। माना जा रहा है कि अभी तक 10 से अधिक लोग लापता हैं, जिनकी तलाश जारी है, वहीं कुछ लोगों ने तैरकर अपनी जान खुद बचा ली थी।
इससे पहले मथुरा में हुए हादसे पर भी अभिनेता ने दुख जताया था और लाइफ जैकेट को अनिवार्य करने के लिए कहा था। अभिनेता का मानना है कि सरकार को इसे व्यवस्थित करने के लिए पोर्टल लॉन्च करने की अपील की थी। उन्होंने लिखा था, "हमारे देश में बार-बार नाव दुर्घटनाएं होती रही हैं। मथुरा में एक बार फिर जानें गईं। पिछले एक साल में ही दर्जनों निर्दोष लोग इसी तरह की दुर्घटनाओं में मारे गए हैं, जिनमें से अधिकतर को रोका जा सकता था। अधिकतर ने लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी। हम इसे एक सरल नियम क्यों नहीं बना सकते?"
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(यह रिपोर्ट IANS न्यूज़ एजेंसी से स्वचालित रूप से ली गई है। न्यूज़ग्राम इस कंटेंट की कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता।)