भारत में ऋतुओं का खास महत्व है। इनमें से वसंत को ऋतुओं का राजा कहा जाता है। इसे नए जीवन, उल्लास और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। सर्दी की ठंडक धीरे-धीरे सुनहरी धूप में बदलने लगती है, खेतों में गेहूं की फसलें लहलहाती हैं और चना-सरसों के पीले-हरे फूल खिल उठते हैं। इसी अद्भुत वातावरण में मां सरस्वती अवतरित होती हैं, जो ज्ञान और कला की देवी हैं।
पुराने समय से ही हमारे संगीतकारों, गीतकारों और फिल्म निर्माताओं ने वसंत को अलग-अलग अंदाज में पेश किया है। इसे कभी मां सरस्वती की वंदना के रूप में, कभी प्रेम और प्राकृतिक सुंदरता के उत्सव के रूप में, तो कभी बदलाव के प्रतीक के रूप में महसूस किया गया।
भारतीय शास्त्रीय संगीत (Indian Classical Music) में वसंत का अद्भुत रूप देखने को मिलता है। फिल्म 'आलाप' का गीत 'माता सरस्वती शारदेय' वसंत के इसी भाव को दिखाता है। यह कोई आम फिल्मी गाना नहीं, बल्कि एक सुकून देने वाली स्तुति है। इसमें सुरों के जरिए बताया गया है कि बसंत वह समय है, जब सीखने, गाने और कुछ नया रचने की शुरुआत होती है। यह गीत इंसान को अंदर से बेहतर बनने के लिए प्रेरित करता है।
वसंत को सबसे खूबसूरत अंदाज में दिखाने वाले गानों में से एक है 1967 की फिल्म 'उपकार' का गीत 'आई झूम के वसंत', यह गाना सुनते ही दिल खुश हो जाता है। इसमें वसंत को एक त्योहार की तरह मनाया गया है, जहां लोग, खेत, हवा और फसल सब मिलकर जश्न मना रहे हैं। इस गीत को गुलशन बावरा ने लिखा और कल्याणजी-आनंदजी ने संगीत दिया।
1968 में आई फिल्म 'राजा और रंक (Raja Aur Runk)' का गाना 'संग बसंत अंग बसंती' भी बेहद शानदार है। यह गाना बताता है कि ये प्यार का मौसम भी है। इस गीत में दिखाया गया है कि जैसे-जैसे मौसम बदलता है, वैसे-वैसे दिल के एहसास भी बदल जाते हैं। फूलों की तरह भावनाएं भी खिलने लगती हैं। आनंद बख्शी ने गाने के बोल लिखे हैं और लक्ष्मीकांत–प्यारेलाल ने संगीत दिया है।
पुरानी फिल्मों (Films) में वसंत को जीवन से जोड़कर भी दिखाया गया है। 1947 की फिल्म 'सिंदूर' का गीत 'पतझड़ सावन बसंत बहार' इसी सोच का उदाहरण है। यह गाना बताता है कि जिंदगी भी मौसम की तरह होती है। कभी मुश्किल समय आता है, कभी खुशी का दौर, और कभी वसंत जैसी नई उम्मीद। इस गीत की खास बात यह है कि यह बिना भारी शब्दों के जीवन की सच्चाई समझाता है। शमशाद बेगम की आवाज और खेमचंद प्रकाश के संगीत ने इस गाने को अमर बना दिया।
वसंत को आजादी और ताजगी से जोड़ने वाला गीत 'रुत आ गई रे, रुत छा गई रे' भी काफी खूबसूरत गाना है। इस गाने में वसंत को प्यार करने और खुश रहने के मौसम के रूप में दिखाया गया है। यह गाना बताता है कि वसंत सिर्फ देखने का नहीं, महसूस करने का मौसम है। इस गाने के बोल जावेद अख्तर ने लिखे हैं और आर.डी. बर्मन ने संगीत दिया है।
नई पीढ़ी के बीच फिल्म 'रंग दे बसंती (Rang De Basanti)' का टाइटल सॉन्ग बेहद मशहूर है। यह गाना वसंत को सिर्फ फूलों और मौसम तक सीमित नहीं रखता, बल्कि इसे बदलाव और जागरूकता का प्रतीक मानता है। यहां वसंत का मतलब सोच बदलना, आवाज उठाना और सही के लिए खड़े होना है। यही वजह है कि यह गाना आज भी युवाओं को जोश से भर देता है। इसके बोल प्रसून जोशी और ए.आर. रहमान (A.R. Rahman) के संगीत ने दिए हैं।
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