अरिजीत सिंह ने बॉलीवुड में गाना छोड़ दिया।
सिंगर्स को इंडस्ट्री में कम अहमियत मिलती है।
पहले भी कई सिंगर्स ने अचानक करियर छोड़ा था।
'अच्छा चलता हूँ दुआओं में याद रखना'... जी हाँ, कुछ इसी अंदाज में अरिजीत सिंह (Arijit Singh) ने प्लेबैक सिंगिंग को अलविदा कह दिया है। अरिजीत अब बॉलीवुड में कभी गाते नज़र नहीं आएँगे। मंगलवार की रात को उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिये एक पोस्ट लिखा।
अरिजीत ने लिखा, ''मैं आप सभी को नए साल की शुभकामनाएं देता हूं। इतने सालों तक श्रोता के रूप में मुझे जो प्यार मिला, उसके लिए धन्यवाद। मैं यह बताना चाहता हूं कि अब मैं प्लेबैक वोकलिस्ट के तौर पर कोई नया काम नहीं करने जा रहा हूं। मैं इसे यहीं खत्म कर रहा हूं। यह एक शानदार यात्रा रही। भगवान मुझ पर बहुत मेहरबान रहे हैं।''
अरिजीत सिंह (Arijit Singh) ने प्लेबैक सिंगिंग को अलविदा तो कह दिया लेकिन अपने पीछे कुछ सवाल भी छोड़ गए कि क्या बॉलीवुड में सिंगर्स (Singers) अपना भविष्य नहीं देख रहे हैं। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि 2014 में उनके और सलमान खान के बीच नोक झोक की खबर सामने आई थी और इस खबर ने काफी सुर्खियां भी बटोरी थी।
अरिजीत सिंह (Arijit Singh) का बॉलीवुड तक का सफर संघर्ष + हुनर + धैर्य की कहानी है। अरिजीत सिंह ने 2005 में Fame Gurukul (एक सिंगिंग रियलिटी शो) में हिस्सा लिया।वो शो जीत नहीं पाए, लेकिन इंडस्ट्री ने उनकी आवाज़ नोटिस कर ली।
साल 2011 में 'फिर मोहब्बत' गाने से उन्होंने डेब्यू किया लेकिन उन्हें पहचान साल 2013 में आई आशिकी 2 फिल्म 'तुम ही हो' गाने से मिली। इस गाने ने अरिजीत को रातों-रात सुपरस्टार बना दिया। उनके हालिया गाने की बात करें तो बॉर्डर 2 में उन्होंने 'संदेशे आते हैं' गाने में अपनी आवाज दी थी।
हालांकि, उन्होंने अचानक ही प्लेबैक सिंगिंग को अलविदा कहकर सबको हैरान कर दिया है। हालांकि, मामला सिर्फ अरिजीत सिंह (Arijit Singh) का नहीं है, उनसे पहले भी 4 ऐसे सिंगर्स रहे हैं, जिन्होंने इस इंडस्ट्री को अचानक ही अलविदा कहा है। आइये उनके बारे में जानते हैं।
अनुराधा पौडवाल (Anuradha Paudwal) का जन्म 27 अक्टूबर 1954 को कर्नाटक के करवार (Karwar) में हुआ था। उन्होंने हिंदी सिनेमा के लिए पहला गाना “एक बटा दो, दो बटे चार” फिल्म Kalicharan (1976) के लिए गाया था।
पौडवाल ने बॉलीवुड के लिए आख़िरी फिल्मी गाना 2006 में गाया था। उन्होंने 'आशिकी' और 'दिल है के मानता नहीं' उनका आखिरी बॉलीवुड गाना “पलकें उठाके देखिये” फ़िल्म 'जाने क्या होगा' में था। इसके बाद उन्होंने अचानक फिल्म जगत छोड़ भक्ति और भजन जैसे गानों पर ध्यान देना शुरू कर दिया।
जसपल सिंह (Jaspal Singh) का जन्म 23 मार्च 1943 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था। हिंदी सिनेमा में उनका पहला गाना “देखो लोगो ये कैसा ज़माना” फ़िल्म Bandish (1969) में था। इसी गाने से उन्हें काफी प्रसिद्धि मिली थी।
इसके बाद उन्होंने 'गीत गाता चल' और 'सावन को आने दो' जैसे बेहतरीन गाने फिल्म जगत को दिए। हालांकि, बदलते दौर के साथ उन्हें काम मिलना बंद हो गया। इसके बाद उन्होंने हिंदी सिनेमा से दूरी बना ली। 80 का दशक आते-आते वो इस इंडस्ट्री से गायब हो गए। फिलहाल उनकी उम्र 82 वर्ष है और वो अमृतसर में रहते हैं।
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अभिजीत भट्टाचार्य (Abhijeet Bhattacharya) का जन्म 30 अक्टूबर 1958 को उत्तरप्रदेश के कानपुर में हुआ था। अभिजीत मिडिल क्लास बंगाली परिवार से आते हैं। उन्होंने बॉलीवुड में पहला गाना साल 1984 में आई फिल्म आनंद और आनंद में गया था।
गाने के बोल हैं "वादों की शाम आई।' उन्हें सबसे ज्यादा प्रसिद्धि साल 1990 में आई फिल्म बाघी और 1992 में आई फिल्म खिलाड़ी से मिली। खिलाड़ी में उनका एक मशहूर गाना है, 'वादा रहा सनम' जिसे लोग आज भी गुनगुनाते हैं।
एक समय ऐसा आया था जब उन्हें शाहरुख़ खान की आवाज तक कहा जाने लगा था लेकिन कहा जाता है कि साल 2007 में आई फिल्म ओम शांति ओम के बाद उनके और शाहरुख़ खान के बीच कुछ विवाद हुआ था, जिसके बाद अभिजीत ने शाहरुख़ के लिए कोई गाना अब तक नहीं गया।
उन्होंने बॉलवुड में आखिरी गाना 2013 में फिल्म बेशर्म में 'दिल का जो हाल है' गाया था। कई मौकों पर उन्होंने खुलेआम कहा है कि बॉलवुड में ग्रुपिज़्म बढ़ गया है। सिंगर्स को ज्यादा महत्त्व नहीं मिलता है। शाहरुख़-सलमान के खिलाफ वो कई इंटरव्यू में खुलकर आलोचना करते हैं। अभिजीत ने स्वीकार किया कि इंडस्ट्री ने उन्हें अलग-थलग कर दिया है।
70s और 80s की मशहूर सिंगर हेमलता (Hemlata) ने भी अचानक बॉलीवुड से रिटायरमेंट लिया था। 'अंखियो के झरोखो से' प्रसिद्धि पाने वाली हेमलता का जन्म 16 अगस्त 1954 को हैदराबाद में हुआ था। उनकी शुरुआत फिल्म रूप रूपैया (1967) का गीत "तू खामोश मैं पुरजोश" था। उनका आखिरी गाना मोहम्मद रफ़ी के साथ था, जो 1971 में आई थी। फिल्म का नाम दोस्त और दुश्मन था। एक समय था, जब उनकी तुलना लता मंगेशकर से होने लगी थी लेकिन वक्त के साथ जब काम मिलने बंद हो गए, तो उन्होंने गाने से दूरी बना ली।
तो ये थे वो 4 ऐसे सिंगर्स जिन्होंने अपने करियर को अरिजीत सिंह (Arijit Singh) की तरह ही बीच में ही रोक दिया।