अभिनेता ओमप्रकाश ने विधवा औरत पर रहम खाकर उसकी बेटी से शादी रचाई थी।  X
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विधवा औरत पर रहम खाकर उसकी बेटी से रचाई शादी, हिंदी सिनेमा के 'मुंशी जी' ओमप्रकाश की अनोखी कहानी

''दर-बदर सर पटकने से क्या होगा, वही होगा जो तकदीर में लिखा होगा" ये डायलॉग हैं, 'मुंशी जी' उर्फ़ ओमप्रकाश (Om Prakash) का जो फिल्म शराबी में उन्होंने कही थीं।

Author : Mayank Kumar

  • ओमप्रकाश ने एक विधवा महिला की विनती पर उसकी 16 वर्षीय बड़ी बेटी से शादी कर ली और अपने पहले प्रेम को त्याग दिया।

  • 1944 में फिल्म दासी से शुरुआत की और शराबी, नमक हलाल, चुपके-चुपके जैसी फिल्मों में गंभीर और हास्य दोनों किरदारों से दर्शकों का दिल जीता।

  • ऑल इंडिया रेडियो लाहौर से करियर शुरू करने वाले ओमप्रकाश ने दशकों तक हिंदी सिनेमा में यादगार योगदान दिया; 1998 में निधन के बाद भी उनके किरदार आज तक लोकप्रिय हैं।

''दर-बदर सर पटकने से क्या होगा, वही होगा जो तकदीर में लिखा होगा" ये डायलॉग हैं, 'मुंशी जी' उर्फ़ ओमप्रकाश (Om Prakash) का जो फिल्म शराबी में उन्होंने कही थीं। ओमप्रकाश हिंदी सिनेमा जगत के वो अभिनेता थे, जिन्होंने अपने अभिनय से हर किरदार में अलग ही जान फूंक दी। उन्होंने अपने जीवन में गंभीर किरदार तो निभाए ही साथ ही उन्होंने अपनी कॉमेडी से भी दर्शकों का खूब मनोरंजन किया।

चुपके-चुपके हो, शराबी हो या नमक हलाल फिल्म, ऐसी कई फिल्मों में ओमप्रकाश (Om Prakash) ने अपनी बेहतरीन अभिनय से दर्शकों को कभी हंसाया, तो कभी रुलाया। हालांकि, उनका जीवन भी काफी अनोखा रहा। अपने जीवन में उन्होंने एक विधवा औरत पर रहम खाकर उसकी बेटी से ही शादी रचा ली थी। क्या है पूरा किस्सा आइये जानते हैं।

विधवा की बेटी से ओमप्रकाश ने रचाई शादी

ओमप्रकाश (Om Prakash) ने कैसे एक 16 साल की लड़की से शादी रचाई, इसका खुलासा उन्होंने खुद किया। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया था कि उन्हें एक सिख धर्म की लड़की से मोहब्बत हो गई थी लेकिन उसके घर वालों को वो बिल्कुल पसंद नहीं थे। इसके साथ ही धर्म अलग था। ओमप्रकाश हिन्दू थे। ओमप्रकाश बताते हैं कि उनकी माँ लड़की के घरवालों को मनाने के लिए उनके घर गईं लेकिन वो फिर भी तैयार नहीं हुए। फिर एक दिन कुछ ऐसी घटना हुई, जिसे वो ना भी नहीं कह पाएं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक बार वो पान की दुकान पर खड़े थे, और तभी उनके पास एक विधवा महिला आई, जिसकी चार बेटियां थी। उसमें से सबसे बड़ी वाली की उम्र 16 वर्ष थी। विधवा औरत चाहती थीं कि ओमप्रकाश (Om Prakash) उनकी बड़ी बेटी से शादी करें। महिला ने कहा कि उनकी माँ से बात हो चुकी है और वो तैयार हैं। इतना कहकर विधवा महिला ने ओमप्रकाश के आगे अपना पल्लू फैलाया। ये देखकर अभिनेता का दिल पसीज गया और उन्होंने अपने प्यार को भूला दिया। इसके बाद विधवा महिला की बड़ी बेटी से शादी कर ली।

कैसे हुई एक्टिंग करियर की शुरुआत?

12 साल की उम्र से ही ओमप्रकाश (Om Prakash) ने क्लासिकल संगीत सीखना शुरू कर दिया था। इसके साथ ही उन्हें थियेटर और फिल्मों में भी दिलचस्पी थी। उनकी पहली फिल्म 'दासी' थी, जो 1944 में लाहौर में रिलीज हुई थी। तब लाहौर भारत का हिस्सा हुआ करता था। ये फिल्म उस समय बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट साबित हुई और 25 हफ़्तों तक सिनेमाघरों में चली। यह ओम प्रकाश की पहली डेब्यू फिल्म थी जिसमें उन्होंने एक खलनायक (Villain) की भूमिका निभाई थी। इस फिल्म के लिए उन्हें 80 रुपए फीस मिली थी।

इसके बाद तो उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं दिया और दस लाख, आजाद,हावड़ा ब्रिज, प्यार किए जा, खानदान, दिल दौलत दुनिया, साधु-शैतान, मिस मैरी, गोपी समेत कई फिल्मों में काम किया। उनके अभिनय की खासियत थी कि वो हर प्रकार के किरदार से समां बांध लेते थे। फिल्मों के आलावा उन्होंने फिल्म निर्माण में भी हाथ आजमाया। फिल्म में गेस्ट रोल की शुरुआत करने वाले भी ओमप्रकाश ही थे। उन्होंने फिल्म ‘कन्हैया’ में राजकपूर और नूतन जैसे स्टार्स को डायरेक्ट किया था।

कोमा में गए और कभी वापस नहीं आए

ओमप्रकाश (Om Prakash) हिंदी सिनेमा जगत के दिग्गज कलाकारों में से एक रहे। उन्होंने अपने करियर में कई बड़े स्टार्स के साथ काम किया लेकिन जो जुगलबंदी उनकी अमिताभ बच्चन के साथ थी, उसकी बात ही अलग थी। नमक हलाल में दद्दु का किरदार हो या फिल्म शराबी के 'मुंशी जी' दर्शकों ने इस जोड़ी को खूब सराहा।

19 दिसंबर 1919 को जम्मू में उनका जन्म हुआ था। बाद में उनका परिवार लाहौर चला गया जहाँ उन्होंने रेडियो से अपने करियर की शुरुआत की। ऑल इंडिया रेडियो (AIR), लाहौर से वो 'फ़तेह दीन' के नाम से कार्यक्रम करते थे। वहां वो गायकी के साथ कहानियाँ और डायलॉग्स भी लिखते थे। रेडियो पर उनकी शुरुआती तनख्वाह केवल 25 रुपये महीना थी।

वहीं, उनकी मृत्यु 21 फरवरी 1998 को 78 वर्ष की आयु में मुंबई के लीलावती अस्पताल में हुई थी। उन्हें दिल का दौड़ा परा था। इसके बाद वो कोमा में चले गए जहाँ से वो कभी वापस नहीं आ सके। ओमप्रकाश (Om Prakash) शारीरिक रूप से भले ही इस दुनिया में नहीं हों लेकिन अपने अभिनय के दम पर वो आज भी फैंस और हिंदी सिनेमा के बीच मौजूद हैं।