बजट 2026 में पेश किए गए नए इनकम टैक्स एक्ट 2026 को लेकर सोशल मीडिया निगरानी की खबरें अफवाह निकलीं, जबकि सरकार का असली मकसद टैक्स सिस्टम को सरल, पारदर्शी और आम लोगों के लिए आसान बनाना है। AI Generated
Union Budget 2026

इनकम टैक्स एक्ट 2026: आपके सोशल मीडिया अकाउंट पर नजर रखेगी मोदी सरकार, जानें क्या है इसकी सच्चाई?

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने जब संसद में बजट पेश किया तब उन्होंने नया इनकम टैक्स एक्ट 2026 लागू करने की बात कही।

Author : Mayank Kumar
Reviewed By : Ritik Singh

  • बजट 2026 में नया इनकम टैक्स एक्ट लागू करने की घोषणा हुई, लेकिन सोशल मीडिया अकाउंट्स की निगरानी को लेकर फैली खबरें PIB फैक्ट चेक में अफवाह साबित हुईं।

  • PIB ने साफ किया कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को आम टैक्सपेयर्स के सोशल मीडिया, ईमेल या निजी डिजिटल डेटा तक सीधी पहुंच नहीं मिलेगी।

  • इनकम टैक्स एक्ट 2026 का मकसद टैक्स सिस्टम को सरल, पारदर्शी और आम नागरिक के लिए आसान बनाना है, न कि डिजिटल जासूसी करना।

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने संसद में 1 फ़रवरी 2026 बजट पेश किया। यह बजट साल 2047 तक विकसित भारत को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। वैश्विक आर्थिक परिवर्तन के इस दौर में वित्तीय चुनौतियों को ध्यान में रखा गया । सीतारमण ने अपने भाषण में राजकोषीय घाटे का ज़िक्र करते हुए बताया कि कर्ज-जीडीपी अनुपात 2026-27 में 55.6 प्रतिशत रहने का प्रस्ताव किया जो चालू वित्त वर्ष में 56.1 प्रतिशत है। राजकोषीय घाटा 2026-27 में 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

वहीं चालू वित्त वर्ष में इसके 4.4 प्रतिशत का अनुमान है। हालांकि, इस बजट में नए इनकम टैक्स एक्ट 2026 का भी जिक्र हुआ लेकिन इसी बीच इसको लेकर सोशल मीडिया पर बात कही जा रही है कि इस एक्ट के तहत अब मोदी सरकार आपके सोशल मीडिया अकाउंट पर नजर रखेगी। तो ऐसे में आइये जानते हैं कि इसके पीछे की सच्चाई क्या है?

सोशल मीडिया पर नज़र रखेगी सरकार!

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने जब संसद में बजट पेश किया तब उन्होंने नया इनकम टैक्स एक्ट 2026 लागू करने की बात कही।

अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक मैसेज तेज़ी से सर्कुलेट हो रहा है, जिसमें दावा किया गया है कि 1 अप्रैल, 2026 से इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को टैक्स चोरी रोकने के लिए आपके सोशल मीडिया अकाउंट, ईमेल और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म को एक्सेस करने का अधिकार मिल जाएगा।

इस मैसेज से कई टैक्सपेयर्स में यह जानने की उत्सुकता पैदा हुई कि क्या I-T डिपार्टमेंट को सच में ऐसी शक्तियां मिलेंगी। ca.sakchijain नाम के इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट में दावा किया गया है कि 1 अप्रैल, 2026 से इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को टैक्स चोरी रोकने के लिए नागरिकों के सोशल मीडिया अकाउंट, ईमेल और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म को एक्सेस करने की बड़ी शक्तियां मिल जाएंगी।

क्या है इसके पीछे की सच्चाई?

इनकम टैक्स एक्ट 2026 को लेकर सोशल मीडिया पर एक नहीं बल्कि कई तरह की बातें चल रही हैं। इस की बात की पड़ताल PIB फैक्ट चेक टीम ने किया। X (पहले ट्विटर) पर एक सोशल मीडिया पोस्ट में, PIB फैक्ट चेक टीम ने बताया कि इस तरह की बातें मात्र अफवाह हैं और लोगों को गुमराह किया जा रहा है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को ऐसी कोई पावर नहीं मिलेगी।

फैक्ट चेक टीम उन मामलों के बारे में बताती है जब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ऐसा एक्शन ले सकता है- इनकम टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 247 के प्रावधान सख्ती से सर्च और सर्वे ऑपरेशन तक ही सीमित हैं।

जब तक कोई टैक्सपेयर बड़े टैक्स चोरी के सबूतों के कारण फॉर्मल सर्च ऑपरेशन से नहीं गुजर रहा है, तब तक डिपार्टमेंट को उनके प्राइवेट डिजिटल स्पेस को एक्सेस करने की कोई पावर नहीं है। PIB ने अब यह साफ़ कर दिया कि जिस प्रकार की बातें सोशल मीडिया पर चल रही हैं, वो मात्र एक अफवाह है।

क्या है इनकम टैक्स एक्ट 2026?

भारत में आयकर अधिनियम, 2026 1 अप्रैल, 2026 से पूरी तरह प्रभावी होगा। यह नया कानून दशकों पुराने 1961 के एक्ट की जगह लेगा और इसका मकसद साफ़ है, टैक्स प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना। इस नए एक्ट में सबसे बड़ा बदलाव इसकी भाषा में है; पुराने जटिल कानूनी शब्दों को हटाकर इसे आम नागरिक के समझने लायक सरल बनाया गया है। साथ ही, अब 'असेसमेंट ईयर' जैसे भ्रमित करने वाले शब्दों को हटाकर सीधे 'Tax Year' का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे टैक्स गणना की प्रक्रिया बहुत आसान हो जाएगी।

बता दें कि FY 2026-27 के तहत बेसिक छूट की लिमिट ₹4 लाख है। हालांकि, सेक्शन 87A के तहत ₹60,000 की बढ़ी हुई टैक्स छूट के कारण, ₹12 लाख तक की टैक्सेबल इनकम वाले रेजिडेंट व्यक्तियों को कोई टैक्स नहीं देना पड़ता है। कुल मिलाकर, यह नया एक्ट तकनीकी जटिलताओं को कम करने और डिजिटल माध्यम से टैक्स फाइलिंग को तेज करने पर केंद्रित है, ताकि मध्यम वर्ग के लोगों को सीए (CA) या विशेषज्ञों पर निर्भर न रहना पड़े।