गाज़ियाबाद : अंतिम संस्कार के बाद जिंदा हुआ शख्स, तेरहवीं भोज में जिंदा देख हैरान हुए घर वाले, यहां जानिए पूरा मामला

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद (Ghaziabad, Uttar Pradesh) से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने परिवार, पड़ोसियों और पुलिस प्रशासन सभी को हैरान कर दिया।
गिरधर सिंह बिष्ट (Girdhar Singh Bisht)
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उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद (Ghaziabad, Uttar Pradesh) से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने परिवार, पड़ोसियों और पुलिस प्रशासन सभी को हैरान कर दिया। जिस व्यक्ति को मृत मानकर परिवार ने अंतिम संस्कार कर दिया, उसकी तेरहवीं का भोज भी आयोजित कर दिया गया। लेकिन इसी दौरान वह व्यक्ति अचानक जिंदा घर लौट आया। इस घटना ने न केवल परिवार को सदमे में डाल दिया, बल्कि पुलिस की पहचान प्रक्रिया और जांच व्यवस्था पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

गाजियाबाद के वैशाली स्थित कल्पना अपार्टमेंट में रहने वाले 38 वर्षीय गिरधर सिंह बिष्ट (Girdhar Singh Bisht) के लापता होने से उनके परिवार की जिंदगी अचानक चिंता और अनिश्चितता में बदल गई। कई दिनों तक तलाश करने के बावजूद उनका कोई सुराग नहीं मिला, जिससे परिजनों की बेचैनी लगातार बढ़ती गई। इसी बीच पुलिस को एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिला और पहचान के लिए परिवार को बुलाया गया। शव की शक्ल-सूरत और अन्य परिस्थितियों के आधार पर परिजनों ने उसे गिरधर सिंह बिष्ट का शव मान लिया। इसके बाद पोस्टमार्टम की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद पुलिस ने शव परिवार को सौंप दिया। दुख और सदमे में डूबे परिवार ने पूरे हिंदू रीति-रिवाज से उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया। सभी को यही यकीन था कि गिरधर अब इस दुनिया में नहीं रहे। लेकिन किसी ने भी नहीं सोचा था कि कुछ ही दिनों बाद ऐसा चौंकाने वाला मोड़ आएगा, जो न केवल परिवार बल्कि पुलिस और पूरे इलाके को हैरान कर देगा।

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गिरधर सिंह कैसे हुए थे लापता?

दरअसल बीते महीने 16 मई को स्थानीय दुकानदारों से किसी बात पर विवाद होने के बाद कौशाम्बी थाना पुलिस ने गिरधर को धारा 151 के तहत शांति भंग में डासना जेल भेज दिया था। इसके बाद 21 मई को वह जेल से रिहा तो हुआ, लेकिन अपने घर नहीं पहुंचा। परिजन उसकी तलाश में जुटे थे। इसी बीच 13 जून को मसूरी थाना क्षेत्र में पुलिस को एक अज्ञात शख्स का शव मिला। सूचना मिलने पर गिरधर के परिजन मौके पर पहुंचे और पुलिस के सामने शव की पहचान गिरधर के रूप में कर दी। इसी आधार पर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई और शव परिवार को सौंप दिया गया। गहरे दुख में डूबे परिवार ने बिना किसी संदेह के पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार कर दिया और सभी ने मान लिया कि गिरधर अब इस दुनिया में नहीं रहे।

तेरहवीं के दिन ऐसा क्या हुआ जिसने पूरे मामले पर खड़े कर दिए सवाल?

25 जून को गिरधर सिंह बिष्ट (Girdhar Singh Bisht) के परिवार में उनकी तेरहवीं का भोज चल रहा था।
25 जून को गिरधर सिंह बिष्ट (Girdhar Singh Bisht) के परिवार में उनकी तेरहवीं का भोज चल रहा था। X

25 जून को गिरधर सिंह बिष्ट (Girdhar Singh Bisht) के परिवार में उनकी तेरहवीं का भोज चल रहा था। घर में रिश्तेदार, पड़ोसी और मेहमान मौजूद थे और सभी उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे थे। तभी अचानक दरवाजे पर खुद गिरधर सिंह बिष्ट (Girdhar Singh Bisht) आ पहुंचे। उन्हें सामने देखकर परिवार के लोगों के होश उड़ गए। कुछ देर तक किसी को अपनी आंखों पर यकीन ही नहीं हुआ, क्योंकि जिस व्यक्ति का अंतिम संस्कार किया जा चुका था, वह सबके सामने जिंदा खड़ा था। इस हैरान कर देने वाली घटना के बाद पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठने लगे। आखिर बिना डीएनए जांच के शव परिवार को कैसे सौंप दिया गया? केवल परिजनों की पहचान के आधार पर शव की पुष्टि क्यों कर दी गई? सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि जिस अज्ञात व्यक्ति का अंतिम संस्कार कर दिया गया, उसकी असली पहचान अब तक क्यों नहीं हो सकी? इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यप्रणाली और पहचान प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

गिरधर आखिर इतने दिनों तक कहां थे ?

तेरहवीं के दिन घर लौटने के बाद गिरधर सिंह बिष्ट (Girdhar Singh Bisht) ने बताया कि जेल से रिहा होने के बाद वह सीधे पंजाब चले गए थे। वहां उन्होंने एक धार्मिक आश्रम में रहकर सत्संग और आध्यात्मिक गतिविधियों में समय बिताया। उनका कहना है कि वह मानसिक रूप से काफी परेशान थे, इसलिए उन्होंने न तो परिवार से संपर्क किया और न ही किसी को अपनी जानकारी दी। बाद में मां की याद सताने लगी तो उन्होंने घर लौटने का फैसला किया। हालांकि, उनके लौटने के साथ ही पुलिस के सामने कई नए सवाल और चुनौतियां खड़ी हो गईं। अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी उस अज्ञात शव की वास्तविक पहचान करना है, जिसका अंतिम संस्कार गिरधर समझकर कर दिया गया था। इसके अलावा पूरे मामले की दोबारा जांच, पहले दर्ज मामले की समीक्षा और यह पता लगाना भी जरूरी है कि आखिर पहचान की प्रक्रिया में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई। [SP]

गिरधर सिंह बिष्ट (Girdhar Singh Bisht)
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