पायलट मांगता रहा दया की भीख, गुजरात के मुख्यमंत्री को पाकिस्तान ने मार डाला, जानें सीएम के हत्या की पूरी कहानी!

क्या आप जानते हैं असलियत में पाकिस्तान ने एक कायराना हरकत की है। पाकिस्तान ने गुजरात के मुख्यमंत्री की हत्या परिवार समेत की है।
एक तरफ गुजरात की रैली का दृश्य है और दूसरी तरफ आसमान में लड़ाकू विमान के पास संकट में फंसा एक छोटा विमान दिखाई दे रहा है।
साल 1965 की जंग में पाकिस्तान ने गुजरात के मुख्यमंत्री के विमान को हवा में मार गिराया था AI Generated
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Summary
  • भारत-पाक युद्ध के बीच पाकिस्तान के लड़ाकू विमान ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री बलवंतराय मेहता के नागरिक विमान को मार गिराया, जिसमें कुल 8 लोगों की मृत्यु हुई।

  • पाक वायुसेना के पायलट को विमान जासूसी विमान होने की आशंका बताई गई; नागरिक संकेत देने के बावजूद गोलीबारी हुई और विमान कच्छ क्षेत्र में गिर गया।

  • पाकिस्तानी पायलट कैस हुसैन ने 2011 में घटना पर पछतावा जताते हुए पायलट की बेटी से ईमेल के जरिए माफी मांगी; यह भारतीय इतिहास की दुर्लभ घटना मानी जाती है।

साल 2004 में एक फिल्म आई थी, नाम था 'लक्ष्य।' इस फिल्म के निर्देशक फरहान अख्तर (Farhan Akhtar) थे। यह सिनेमा 1999 के कारगिल युद्ध (Kargil War) पर आधारित थी। सिनेमा के आखिरी पड़ांव में ओम पूरी जिन्होंने सूबेदार मेजर प्रीतम सिंह का किरदार निभाया था, उनका एक डायलॉग है, "करण साहब पाकिस्तानी हारे तो पलटकर फिर वापस आते हैं। अगर जीत जाओगे तो लापरवाह मत होता। यह ध्यान में रखना।"

ओम पुरी ने यह करण शेरगिल का किरदार निभाने वाले कलाकार ऋतिक रौशन से कही थी। इस डायलॉग का सार यही था कि पाकिस्तान (Pakistan) वो कायर है, जो पीछे से वार करता है। ये तो सिनेमा की कहानी थी लेकिन क्या आप जानते हैं असलियत में भी पाकिस्तान ने एक कायराना हरकत की है। पाकिस्तान ने गुजरात के मुख्यमंत्री की हत्या परिवार समेत की है। क्या है पूरी कहानी आइये समझते हैं।

साल 1965 की है घटना

ये घटना साल 1965 की है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध चल रहा था। इसी बीच पाकिस्तान (Pakistan) की ओर से गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री बलवंतराय मेहता (Balwantrai Mehta) की हत्या पाकिस्तान की तरफ से कर दी जाती है।

पाकिस्तान के लड़ाकू विमान ने गुजरात के सीएम के प्लेन को हवा में ही मार गिराया था। इस वजह से विमान में सवार मुख्यमंत्री बलवंतराय मेहता समेत आठ लोगों की मृत्यु हो गई। यह इतिहास की सबसे दुर्लभ गाथा है जहाँ मुख्यमंत्री समेत उनकी पत्नी की भी मृत्यु हो गई।

क्यों पाकिस्तान ने बलवंत राय को बनाया निशाना?

बाईं ओर गुजरात के पूर्व सीएम बलवंत राय मेहता, जबकि दाईं ओर पायलट जहांगीर इंजिनियर
गुजरात के मुख्यमंत्री बलवंत राय मेहता का प्लेन पाकिस्तान की तरफ से मार गिराया गया था। x

दरअसल, हुआ यह था कि साल 1965 में भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध चल रहा था। यह युद्ध अगस्त में शुरू हुआ था और सितंबर तक हालत बहुत ही ज्यादा तनावपूर्ण हो गए थे। इसके बाद 22 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने यह प्रस्ताव पारित किया कि बिना शर्त युद्धविराम हो। भारत की ओर से इसी स्वीकृति दे दी है जबकि पाकिस्तान (Pakistan) ने इसे 23 सितंबर को सहमति प्रदान की।

उसी दिन दोपहर के समय गुजरात के मुख्यमंत्री बलवंतराय मेहता (Balwantrai Mehta) का विमान अहमदाबाद से मिथापुर (कच्छ के पास) जा रहा था। प्लेन में उनकी पत्नी के साथ तीन सहयोगी और पत्रकार भी मौजूद थे। इस प्लेन के पायलट जहांगीर इंजिनियर थे, जो भारतीय वायुसेना और रॉयल एयर फोर्स के पूर्व पायलट रह चुके थे। उन्हें इस बात की भनक तक नहीं थी कि वो किस खतरे की ओर बढ़ रहे हैं।

उधर बॉर्डर पार पाकिस्तान (Pakistan) के वायुसेना के अधिकारी कैस हुसैन ने कराची के मौरिपुर एयरबेस से अमेरिकी एफ-86 सैबर जेट उड़ाया। लेफ्टिनेंट बुखारी भी हुसैन के साथ थे लेकिन विमान में हुए तेल की कमी के चलते, वो वापस लौट आए। पाकिस्तान में जमीनी स्तर पर यह सूचना मिली कि सीमा के पास कोई अनजान विमान उड़ता देखा गया है। पाकिस्तानी अधिकारी को यह लगा कि यह जासूसी विमान हो सकता है। पाकिस्तान के वायुसेना के अधिकारी कैस हुसैन को यह आदेश मिला कि वो 20,000 फीट से नीचे 3000 फीट पर आएं जहाँ गुजरात के मुख्यमंत्री का विमान था।

पाकिस्तानी विमान देखते ही पायलट जहांगीर इंजिनियर ने विमान का पंख हिलाकर संकेत दिया कि ये एक नागरिक विमान है लेकिन ग्राउंड कंट्रोल के आदेश पर हुसैन ने गोली बरसानी शुरू कर दी। पहली गोली बाएं पंख में लगी और दूसरी विमान के इंजन में। जैसे ही गोली इंजन में लगी, विमान में आग लग गया और प्लेन कच्छ क्षेत्र में सीमा के पास गिर गया। विमान में सवार सभी 8 लोगों की मृत्यु हो गई।

हुसैन को हुआ पछतावा, 46 साल बाद मांगी माफ़ी

गुजरात के तत्कालीन सीएम बलवंत राय (Balwantrai Mehta) के विमान को मार गिराने के बाद कैस हुसैन गर्व से फूले नहीं समा रहे थे लेकिन उनका सारा गर्व तब उतर गया, जब उन्हें सच्चाई का पता चला। शाम के करीब 7 बजे पर ऑल इंडिया रेडियो पर यह खबर आई कि पाकिस्तान (Pakistan) ने गुजरात के मुख्यमंत्री का विमान मार गिराया है, तो कैस हुसैन को बहुत पछतावा हुआ। उन्होंने अपने अधिकारियों से यह सवाल भी किया कि उन्हें ऐसा निर्देश क्यों दिया गया। इसपर जवाब आया कि दूसरे मोर्चे के खतरे को देखते हुए यह फैसला लिया गया था।

कैस हुसैन को इसपर काफी पछतावा हुआ था, जिसके बाद करीब 46 साल बाद, 2011 में उन्होंने माफ़ी मांगी। उन्होंने पायलट जहांगीर की बेटी फरीदा सिंह को खोजा, जो मुंबई में थीं, और उनसे ईमेल के जरिये माफ़ी मांगी। उन्होंने लिखा कि जो कुछ भी हुआ, वो नफरत में नहीं बल्कि आदेश का पालन करते हुए हुआ। इसपर फरीदा ने जवाब दिया कि उनके भीतर कोई नफरत नहीं है। बुरे और अच्छे काम युद्ध में हो ही जाते हैं।

बता दें भारतीय इतिहास में ये पहली और आखिरी ऐसी घटना थी, जब किसी अन्य देश की ओर से भारत के किसी नेता के विमान को निशाना बनाया गया था।

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