मद्रास हाई कोर्ट ने विजय के चुनावी हलफनामे की जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से किया इनकार

मद्रास उच्च न्यायालय ने सोमवार को एक अहम याचिका खारिज कर दी, जिसमें अभिनेता-राजनेता जोसेफ विजय के चुनावी हलफनामे में दी गई वित्तीय जानकारी की जांच की मांग की गई थी। यह मामला 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से जुड़ा हुआ है, जहां विजय पहली बार चुनावी मैदान में उतरे हैं।
मद्रास हाई कोर्ट ने विजय के चुनावी हलफनामे की जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से किया इनकार
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मद्रास उच्च न्यायालय ने सोमवार को एक अहम याचिका खारिज कर दी, जिसमें अभिनेता-राजनेता जोसेफ विजय के चुनावी हलफनामे में दी गई वित्तीय जानकारी की जांच की मांग की गई थी। यह मामला 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से जुड़ा हुआ है, जहां विजय पहली बार चुनावी मैदान में उतरे हैं।

यह याचिका चेन्नई के रहने वाले एमपी वेंकटेश नाम के व्यक्ति ने दाखिल की थी। उनका आरोप था कि विजय ने अपने नामांकन के साथ जो फॉर्म 26 हलफनामा जमा किया है, उसमें उनकी आर्थिक जानकारी पूरी तरह सही और पारदर्शी नहीं है। हलफनामे में कई जगह विरोधाभास दिखाई देते हैं।

कोर्ट की बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश संजय वी. गंगापुरवाला धर्माधिकारी और जस्टिस अरुल मुरुगन शामिल थे, ने इस याचिका को सुनने से ही मना कर दिया और बिना किसी जांच के इसे खारिज कर दिया।

याचिकाकर्ता का कहना था कि विजय ने अपने हलफनामे में करोड़ों रुपये के लेन-देन दिखाए हैं, जैसे कि परिवार के सदस्यों और कुछ संस्थाओं को बड़े-बड़े लोन देना, जबकि अपनी देनदारियां शून्य बताई हैं। वेंकटेश के मुताबिक यह जानकारी भ्रामक है और चुनावी नियमों के मुताबिक पूरी सच्चाई सामने नहीं रखती।

याचिका में यह भी दावा किया गया कि विजय ने अपनी पत्नी को 12 करोड़ रुपये से ज्यादा का लोन दिया और एक ट्रस्ट को भी बड़ी रकम ट्रांसफर की। लेकिन इन पैसों का स्रोत क्या है और इनका मकसद क्या था, इस बारे में साफ जानकारी नहीं दी गई।

वेंकटेश ने कानून का हवाला देते हुए कहा कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 33ए के तहत उम्मीदवारों को अपनी पूरी और सही जानकारी देना जरूरी है। उनका कहना था कि अगर जानकारी अधूरी या गलत है, तो यह मतदाताओं के जानने के अधिकार का उल्लंघन है, जो संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत सुरक्षित है।

हालांकि, कोर्ट ने इन दलीलों को मानने से इनकार कर दिया और किसी भी तरह की जांच का आदेश नहीं दिया।

दिलचस्प बात यह है कि इसी मुद्दे पर एक और याचिका अभी भी हाई कोर्ट में लंबित है। उस मामले में कोर्ट ने पहले ही चुनाव आयोग और आयकर विभाग को नोटिस भेजा था। वहां यह आरोप लगाया गया है कि विजय के हलफनामे में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति का खुलासा नहीं किया गया।

विजय, जिन्होंने 2024 में अपनी पार्टी तमिलगा वेट्री कजगम शुरू की थी, इस बार 2026 के चुनाव में पहली बार किस्मत आजमा रहे हैं। वह चेन्नई के पेरंबूर और तिरुचि ईस्ट सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।

[VT]

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(यह रिपोर्ट IANS न्यूज़ एजेंसी से स्वचालित रूप से ली गई है। न्यूज़ग्राम इस कंटेंट की कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता।)

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