

शुक्रवार को दिल्ली के जंतर मंतर पर जाति आधारित आरक्षण (Caste based reservation) के विरोध में उतरे जनरल वर्ग के हज़ारो लोग. प्रर्दशनकारियों ने रिजर्वेशन हटाओ का नारा देते हुए, जाति आधारित रिजर्वेशन हटाने की मांग की. इस दौरान दिल्ली पुलिस ने कई प्रर्दशनकारियों को हिरासत में लिया।
दिल्ली के जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर सामान्य वर्ग के लोगों ने सरकार से अपील की कि जाति आधारित आरक्षण को हटाया जाए। सोशल मीडिया से शुरू हुए इस आंदोलन ने व्यापक रूप ले लिया है। इस आंदोलन के समर्थन में हजारों लोगों ने जंतर-मंतर पर एकत्रित होकर आरक्षण के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
वहीं, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार को आरक्षण जाति के आधार पर नहीं, बल्कि आर्थिक आधार पर लोगों को आरक्षण की सुविधा देनी चाहिए। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "गरीब व्यक्ति को भी शिक्षा और कोचिंग का पूरा हक है, चाहे वह किसी भी जाति से आता हो।"
दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी। आगे पुलिस ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को रामलीला मैदान में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्रदान किया गया था, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जंतर-मंतर पर आ पहुंची। लोगों की सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात किया गया।
यूटुबर अजीत भारती (YouTuber Ajit Bharti) इस आरक्षण हटाओ आंदोलन की आवाज़ बनकर सामने आए। (Caste based reservation)आंदोलन के समर्थक प्रदर्शनकारी अजीत भारती ने कहा कि सरकार को एक श्वेत पत्र लाना चाहिए, जिससे यह साफ़ हो सके कि कितने लोगों को 80 सालों से सरकार आरक्षण की सहायता दे रही है। उन्होंने अपने बयान में मुसहर समुदाय का ज़िक्र करते हुए कहा कि बिहार में मुसहर समुदाय के लोगों की हालत बहुत खराब है। उनके बच्चों को आरक्षण की ज़्यादा ज़रूरत है, लेकिन उन्हें आरक्षण नहीं मिल रहा। क्यों?
प्रदर्शनकारियों ने दूसरी मांग की कि 'क्रीमी लेयर' की व्यवस्था को लागू किया जाए। यही नहीं, कुछ प्रदर्शनकारियों का मानना है कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए कुछ नए प्रावधान लाए जाएं, जो आज के ज़रूरतमंदों तक पहुँच सकें। अजीत भारती ने भी क्रीमी लेयर को लागू न करने को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह चीज़ आपको सोचने पर मजबूर कर देगी कि सरकार उन कुछ दलित नेताओं के आगे झुक रही है।
प्रदर्शनकारियों ने तीसरी मांग न्यूनतम अंकों की रखी है। उनका कहना है कि IIT और IIM जैसे बड़े संस्थानों में मेरिट के आधार पर मौका मिलना चाहिए। इससे देश की उत्पादकता और विकास में काफी मदद मिलेगी, और EWS वर्ग के लोगों को भी SC वर्ग की तरह वास्तविक सुविधाएं प्रदान कराई जानी चाहिए।(VR/MK)
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