5 साल की बच्ची से दरिंदगी, प्राइवेट पार्ट में चाकू डालकर की हत्या, लेकिन आरोपी की तिहरी फांसी की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

सितंबर 2024 में भोपाल के शाहजहांनाबाद में 5 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म और पानी की टंकी में शव छिपाकर की गई निर्मम हत्या के मामले में भोपाल स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी अतुल निहाले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर मानते हुए फांसी की सजा सुनाई थी।
सुप्रीम कोर्ट और अंधेरे में एक बच्ची
मध्य प्रदेश में पाँच साल की बच्ची से बलात्कार के मामले में निचली अदालत के फैसले पर 10 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। भोपाल स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने इस मामले पर अपना फैसला देते हुए दोषी अतुल निहाले को मौत की सजा सुनाई थी। X
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  • सितंबर 2024 में भोपाल के शाहजहांनाबाद में 5 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म और पानी की टंकी में शव छिपाकर की गई निर्मम हत्या के मामले में भोपाल स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी अतुल निहाले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर मानते हुए फांसी की सजा सुनाई थी।

  • 10 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने फांसी की सजा पर फिलहाल रोक लगा दी है।

  • कोर्ट ने भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल (BMHRC) की निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव को दोषी के मानसिक मूल्यांकन के लिए टीम गठित करने का आदेश दिया है और जेल अधीक्षक से रिपोर्ट मांगी है।

मध्य प्रदेश में पाँच साल की बच्ची से बलात्कार के मामले में निचली अदालत के फैसले पर 10 मार्च 2026 को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। भोपाल स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने इस मामले पर अपना फैसला देते हुए दोषी अतुल निहाले को मौत की सजा सुनाई थी। वहीं मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखने के पक्ष में अपना फैसला सुनाया था।

कब हुआ था बलात्कार ?

दरअसल, मध्य प्रदेश के भोपाल शहर में ही शाहजहांनाबाद इलाके से एक छोटी बच्ची लापता हो गई थी। 24 सितंबर 2024 को लापता हो चुकी बच्ची का शव दो दिन बाद 26 सितंबर 2024 को पास के ही अतुल निहाले के फ्लैट में मिली। बड़ी हैरानी वाली बात है कि बच्ची का शव पानी वाली टंकी में मिला।

जांच में सामने आया कि बच्ची के निजी अंगों (Private Parts) पर चाकू से प्रहार किया गया था। इतनी निर्मम हत्या पर निचली अदालत ने इसे रेयरेस्ट ऑफ द रेयर (Rarest of Rare) करार दिया। इस मामले को छुपाने के लिए आरोपी की माँ बसंती बाई ने उसकी मदद की थी। वहीं बहन चंचल भी इस आपराधिक कृत्य में भागीदार थी।

अदालत ने सुनाई फांसी की सजा !

इस मामले पर भोपाल की विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने फैसला 18 मार्च 2025 को सुनाया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि इस तरीके की हत्या जघन्य अपराधों में गिने जाते हैं। निचली अदालत ने अपराधी को फांसी की सजा सुनाई। कोर्ट ने माँ और बहन को दो-दो वर्ष कारावास में रखने का आदेश, सजा के तौर पर सुनाया।

विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत के फैसले को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने भी सुरक्षित रखा। 22 जनवरी 2026 को जस्टिस विवेक अग्रवाल, जस्टिस रामकुमार चौबे की बेंच ने इस फैसले पर अपनी मुहर लगाते हुए इस तरीके के संगीन अपराधियों को कड़ा संदेश दिया। 

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सुप्रीम कोर्ट ने फैसले पर लगाई रोक !

यह मामला जब सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा तो सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सुनवाई की। 10 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की पीठ ने अपना फैसला सुनाया।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता, जस्टिस एन. वी. अंजारिया के तीन सदस्यों वाली पीठ ने अपने फैसले में अतुल निहाले की फांसी पर फिलहाल रोक लगा दिया है। पीठ का कहना है कि आरोपी के मानसिक स्थिति का पता लगाया जाना चाहिए। अगर अपराधी के भीतर सुधार की गुंजाइश भविष्य में नजर आ रही है तो इस पर विचार किया जाना चाहिए। 

कोर्ट ने इसके लिए जेल के अधीक्षक से रिपोर्ट मांगी है कि जेल में अतुल का व्यवहार कैसा था। साथ ही कोर्ट ने अतुल के मानसिक संतुलन के मूल्यांकन हेतु भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (BMHRC) की वर्तमान प्रभारी निदेशक (Director In-charge) डॉ. मनीषा श्रीवास्तव (Dr. Manisha Shrivastava) को यह जिम्मेदारी सौंपी है कि इस मामले के संबंध में एक टीम गठित करके मूल्यांकन कार्य पूर्ण किया जाए। कोर्ट ने इन सभी कार्यों के लिए 12 सप्ताह का समय दिया और अगली सुनवाई रिपोर्ट तैयार होने के पश्चात होगी। 

देखना यह है कि इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला क्या होगा, क्योंकि इस तरीके के जघन्य अपराध के लिए वैसे तो समाज में कोई स्थान नहीं है,  पर कोर्ट के फैसले बहुत बार ऐसे होते हैं जिन्हें न चाहते हुए भी स्वीकार करना पड़ता है। वैसे कोर्ट का फैसला लगभग जुलाई के पहले या दूसरे सप्ताह में आने की उम्मीद है। कोर्ट से बच्ची के परिवार वालों की बहुत सारी उम्मीदें हैं  कि बच्ची को न्याय मिलेगा और सुप्रीम कोर्ट से उचित कार्रवाई का निर्णय सुनने को मिलेगा।

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