

28 फरवरी 2026 को अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद 8 मार्च 2026 को उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुना गया।
8 सितंबर 1969 को मशहद में जन्मे मोजतबा खामेनेई, अली खामेनेई के दूसरे बड़े बेटे हैं। उन्होंने तेहरान में शिक्षा प्राप्त की और लंबे समय से धार्मिक व राजनीतिक तंत्र में पर्दे के पीछे प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे हैं।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने उनकी नियुक्ति को गरिमा और ताकत के नए युग की शुरुआत बताया।
हाल ही में शुरू हुआ अमेरिका और इजरायल का ईरान के साथ संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका ने ईरान के सुप्रीम लीडर के मारने की पुष्टि की। अब ईरान द्वारा अयातुल्ला अली खामेनेई के बाद 8 मार्च 2026 को सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई को चुना गया है।
संघर्ष का का यह सिलसिला वैश्विक राजनीति को एक नया मोड़ देते हुए दिखाई दे रहा है। अमेरिका ने कहा है कि जो हाल अयातुल्ला अली खामेनेई का हुआ था वही हाल मोजतबा खामेनेई का भी हो सकता है। 5 मार्च 2026 को एक्सियोस के साथ सवाल जवाब के क्रम में डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा, सुप्रीम लीडर की नियुक्ति में अमेरिका से सलाह ली जानी चाहिए।
मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) का जन्म 8 सितंबर 1969 को ईरान के मशहद में हुआ था। मोजतबा खामेनेई, अली खामेनेई के वारिसों में दूसरे सबसे बड़े बेटे हैं। कुल पाँच भाई-बहनों में से एक मोजतबा का जन्म ऐसे समय हुआ, जब उनके पिता ईरान में इस्लामिक क्रांति में लीन थे। रजा पहेलवी के शासन को खत्म करने के बाद जब ईरान में इस्लामी शासन (Islamic Rule) की स्थापना हुई, उसके बाद उनके परिवार में काफी बदलाव आया।
क्रांति के पश्चात मोजतबा का पूरा परिवार राजधानी तेहरान (Tehran) चला आया। इसके बाद उनकी पूरी शिक्षा-दीक्षा यहीं तेहरान में ही अलवी हाई स्कूल में हुई। इसके बाद धार्मिक गुरुओं से इस्लाम के परंपरागत शिक्षा और ट्रेनिंग हासिल किया। मोजतबा को प्रायः रूढ़िवादी परंपराओं का समर्थक माना जाता है।
28 फरवरी 2026 को ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई (Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei) को मारे जाने के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर को चल रही चर्चा पर विराम लग गया और 8 मार्च 2026 को मोजतबा खामेनेई को ईरान के सुप्रीम लीडर के रूप में स्वीकार कर लिया गया। मोजतबा ने दशकों तक पूर्व सुप्रीम लीडर के करीबी लोगों के साथ काम किया है, लेकिन फिर भी वे ज्यादातर लोगों की नजरों से दूर रहे हैं। ऐसा माना जाता है कि अपने पिता के नेतृत्व के दौरान, मोजतबा खामेनेई पर्दे के पीछे से राजनीतिक निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।
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ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) को ईरान का नया सुप्रीम लीडर बनाया गया है। उन्होंने मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति को ‘गरिमा और ताकत के नए युग’ की शुरुआत के रूप में बताया है।
अलजजीरा की रिपोर्ट (Al Jazeera report) के मुताबिक, मसूद पेजेश्कियान (Masoud Pezeshkian) ने ईरानी असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स द्वारा नए सुप्रीम लीडर के चुनाव का स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति देश के लिए गरिमा और ताकत के नए युग की शुरुआत है।
फार्स न्यूज एजेंसी (Fars News Agency) के मुताबिक, पेजेश्कियान ने अपने एक बयान में कहा कि यह एक अहम चुनाव था और यह इस्लामिक देश की राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की इच्छा का सबूत है, एक ऐसी एकता स्थापित हुई है, जो ईरान के दुश्मनों की साजिशों का जवाब देने लायक है।
मोजतबा ईरान की सिक्योरिटी फोर्स में असर रखने वाली शख्सियत हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि वे अपने पिता अयातुल्ला खामेनेई के नेतृत्व में बड़े बिजनेस नेटवर्क का संचालन करते थे। उन्हें रविवार को होने वाले वोट से पहले विशेषज्ञों की असेंबली ने सबसे आगे माना था। बता दें, असेंबली 88 मौलवियों की एक बॉडी है जिसे अली खामेनेई का वारिस चुनने का काम सौंपा गया था।
ईरान के अगले सुप्रीम लीडर (Supreme Leader of Iran) के चुनाव की रेस में कई लोगों का नाम सामने आया। हालांकि, मोजतबा के नाम को लेकर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद से ही चर्चा हो रही थी, लेकिन बाद में इस रेस में कई अन्य नाम भी आए।
मोजतबा के अलावा, इस रेस में आयतुल्लाह सैय्यद मोहम्मद मेहदी मीर बाघेरी, हसन खुमैनी, गोलाम-होसैन मोहसिनी-एजे'ई, और अयातुल्लाह अली रेजा अराफी का नाम रेस में था।
इस पद से मोजतबा को इस्लामिक रिपब्लिक में देश के सभी मामलों में आखिरी फैसला लेने का अधिकार मिल गया है। 56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई को लंबे समय से देश के राजनीतिक और धार्मिक संगठन में एक ताकतवर व्यक्ति माना जाता है। हालांकि, वे कभी किसी चुने हुए पद पर नहीं रहे और न ही लीडरशिप के लिए सार्वजनिक रूप से प्रचार किया।
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