'हम साथ नहीं देंगे...,' ईरान संग जंग में अकेला पड़ा अमेरिका, NATO के देशों ने डोनाल्ड ट्रंप को दिखाया ठेंगा!

राष्ट्रपति ट्रंप की अपील के बावजूद, नाटो के प्रमुख सहयोगियों में ब्रिटेन, फ्रांस, इटली और जर्मनी ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सैन्य हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया है।
नाटो सदस्य और डोनाल्ड ट्रम्प
राष्ट्रपति ट्रंप की अपील के बावजूद, नाटो के प्रमुख सहयोगियों में ब्रिटेन, फ्रांस, इटली और जर्मनी ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया है।AI Generated
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  • राष्ट्रपति ट्रंप की अपील के बावजूद, नाटो के प्रमुख सहयोगियों में ब्रिटेन, फ्रांस, इटली और जर्मनी ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सैन्य हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया है।

  • ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाने के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा संकट मंडरा रहा है। जहाँ ट्रंप इसे ईरान के खिलाफ निर्णायक जीत के अवसर के रूप में देख रहे हैं, वहीं चीन और रूस जैसे देश इसे ईरान की संप्रभुता का मामला बताकर अमेरिका के खिलाफ खड़े हैं।

  • यह स्थिति दर्शाती है कि आधुनिक विश्व में देश अब किसी भी संधि से ऊपर अपने राष्ट्रीय हितों (National Interests) को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे दशकों पुराने सैन्य और रणनीतिक समीकरण बदल रहे हैं।

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष में नाटो के देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका के समर्थन में उतरने से साफ-साफ इनकार कर दिया है। अमेरिका के राष्ट्रपति इस युद्ध में उम्मीद से ज्यादा उलझते नजर आ रहे हैं। ट्रम्प ने हाल ही में कहा था कि ईरान के साथ युद्ध में लगभग जीत के कगार पर हैं। उधर ईरान ने अमेरिका और उसके साथी देशों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के निकालने पर रोक लगा दी। इस वजह से पूरे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर काफी असर भी देखने को मिल रहा है। 

ट्रम्प ने कई देशों से की अपील 

ट्रम्प ने अमेरिका को जबसे इस युद्ध में उतारा है, लगातार बयान देते रहते हैं। इसी बीच जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाजों के आवागमन पर रोक लगा दी, तो उन्होंने नाटो (NATO) देशों से अपील की थी कि इस मामले में सभी देश मिलकर एकजुट होकर ईरान के खिलाफ हस्तक्षेप करें। लेकिन नाटो समूह के कई देशों ने इस मामले में सीधे उतरने से साफ मना कर दिया। इटली की प्रधानमंत्री ने तो ईरान में मारे गए बच्चों के समर्थन में साफ-साफ बोलते हुए इशारा किया कि इटली कभी ऐसे देश का समर्थक नहीं हो सकता जो इस तरीके से बच्चों को अपना निशाना बनाए। 

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किस देश ने क्या कहा ?

दरअसल, नाटो (NATO) के जितने देश हैं उसमें से ज्यादातर देशों ने इस युद्ध में अमेरिका को सीधे-सीधे समर्थन देने से किनारा कर लिया है। 

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी (Giorgia Meloni- Prime Minister Italy) ने कहा कि ईरान में मारे गए बच्चों के प्रति इटली की पूरी सहानुभूति है। साथ ही यह भी कहा कि इटली की सेना इस युद्ध में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सीधे-सीधे अमेरिका के समर्थन में नहीं उतरेगा।  

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री स्टार्मर (British Prime Minister Prime Minister Starmer) ने कहा कि अमेरिका के साथ इस युद्ध में ब्रिटेन व्यापक भागीदार नहीं बनेगा। उन्होंने कहा कि इस युद्ध में अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया जा रहा है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने सीधे-सीधे इस तरीके से बात कहकर अमेरिका से मुंह मोड़ लिया है। 

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन (French President Emmanuel Macron) ने इस मामले पर पर बयान दिया है कि फ्रांस इस युद्ध में सीधे तौर पर किसी भी सैन्य अभियान का हिस्सा नहीं बनेगा। स्ट्रेट ऑफ होरमुज (Strait of Hormuz) की तरफ इशारा करते हुए  इमैनुएल मैक्रॉन ने कहा कि उसे खुलवाने वाले के लिए अमेरिका के किसी सैन्य अभियान का हिस्सा फ्रांस नहीं बनेगा। 

जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ (Chancellor of Germany Friedrich Merz) ने इस मामले पर काफी स्पष्ट बयान दिया और अमेरिका से दूरी बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि नाटो (NATO) एक रक्षात्मक संगठन है। यह संगठन किसी के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने वाला नहीं है। नाटो के सिद्धांतों को याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि यह युद्ध नाटो (NATO) समूह का नहीं है, इसमें सबको न धकेला जाए तो ठीक है। 

ट्रंप ने इन देशों पर क्या कहा ?

इसी तरीके से अन्य नाटों सदस्यों ने युद्ध से किनारा करते हुए इस युद्ध में अमेरिका को अकेला छोड़ दिया है। अब देखना यह है कि युद्ध के बाद नाटो समूह पर कोई असर पड़ता है कि नहीं, क्योंकि ट्रम्प ने कई बार कहा यही कि अमेरिका ने नाटो (NATO) देशों की रक्षा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। लेकिन अमेरिका को जब जरूरत पड़ रही है तो सभी देश पीछे जा रहे हैं। ट्रम्प बहुत बार बोल चुके हैं कि अमेरिका के बिना नाटो कुछ नहीं है। वहीं ब्रिटेन के बारे ट्रम्प ने कहा कि वह उनका बहुत पुराना मित्र है, बहुत बार जरूरत पड़ने पर अमेरिका ने ब्रिटेन की मदद की है।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन (French President Emmanuel Macron) के बारे में मीडिया ने जब सवाल किया तो ट्रंप ने काफी मजाकिया अंदाज में कहा कि इमैनुएल मैक्रॉन अगली बार चुनाव नहीं जीत सकते, वह बहुत जल्दी फ्रांस के राष्ट्रपति नहीं रहेंगे। 

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नाटो के अलावा इन देशों ने दिया साफ संदेश !

नाटो (NATO) के अलावा अन्य देशों ने भी अमेरिका से दूरी बना रखी है। चीन (China) ने साफ तौर यह बात कही है कि स्ट्रेट ऑफ होरमुज (Strait of Hormuz) में हस्तक्षेप करने का मतलब है ईरान की संप्रभुता से छेड़छाड़ करना। चीन कभी इस तरीके से हस्तक्षेप नहीं करेगा। 

रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) ने कई बार बयान दिया है कि वह इस युद्ध को खत्म करना चाहते हैं। वहीं रूस की तरफ से ईरान में मदद भी पहुंचाई जा रही है। युक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में में ईरान के खिलाफ लाए प्रस्ताव पर रूस ने वोट न देकर साफ इशारा देने का प्रयास किया है कि वह इस युद्ध में अमेरिका के खिलाफ है। 

इस बदलते भू-राजनीति (Geopolitics) के दौर में असल में हर देश अपने राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित रखने की प्राथमिकता को बरकरार रखना चाहता है। कोई भी राष्ट्र अपने राष्ट्रीय हितों की आहुति देकर किसी अन्य देश से संधि कर ले, यह कहना आज के वैश्विक राजनीति में शायद प्रासंगिक नहीं है।

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