

पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटला (West Bengal Teacher Recruitment Scam): साल 2016 में बंगाल के माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के जरिए शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों कि बहाली के लिए स्कूल सेवा आयोग (SSC) कि ओर से भर्तियाँ निकाली गई थी l लेकिन इस पर कई तरह के सवाल उठे जैसे की टोपर्स के नाम के साथ छेड़खानी और भी बहुत कुछ l बंगाल में सत्ताधारी पार्टी ने राज्य के विपक्षी पर आरोप लगाया और इस तरह आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी चलने लगा l इसी बीच जब मामले की सुनवाई अदालत में हुई तो भर्तियों पर कोर्ट द्वारा रोक लगाई गई l अब इसी बीच बंगाल में चुनाव है तो नौकरी घोटाला सुर्खियों में आ रहा है। क्या है पूरा मामला आइए समझते हैं।
ममता बनर्जी (Mamta Banarjee) पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्या मंत्री हैं l साल 2011 मई 20 को पहली बार मुख्यमंत्री के पद पर शपथ लिया और राज्य में वामपंथी सरकार का शासन समाप्त किया l उनका पहला कार्यकाल 2011 से 2016 तक, दूसरा कार्यकाल 2016 से 2021 और तीसरा कार्यकाल 2021 से वर्तमान यानी अभी मार्च तक है l वह लगातार 3 बार राज्य की मुख्यमंत्री के रूप में चुनी गई l ऐसे में अब बंगाल में विधान सभा चुनाव होने वाले है और इसका ऐलान भी हो चुका है l इस बार बंगाल चुनाव 2 चरणों में होगा पहला चरण में 23 अप्रैल और दूसरे चरण का चुनाव 29 अप्रैल को होगा l और 4 मई को चुनाव के नतीजे आएंगे l
इन सब के बीच शिक्षक भर्ती घोटला का मुद्दा एक बार फिर उजागर हुआ है l इस खबर से राज्य का सियासी पारा काफी गरमा गया है l एक ओर बंगाल में भाजपा अपनी जीत का दावा कर रही है तो वहीं दूसरी ओर ममता दीदी का कहना है कि इस बार भी हम ही बाजी मारेंगे चाहे बीजेपी कितनी ही चाल क्यों न चले l जाहिर सी बात है जब एक पार्टी दूसरी पार्टी पर कोई इल्जाम लगाती है तो उसे एक सियासी चाल ही समझा जाता है l लेकिन हकीकत यह है कि जो लोग इस घोटाले का शिकार हुए हैं, जिनके साथ नाइन्साफी हुई है उन्हें तो सब हकीकत पता है l
इस पूरे मामले में 2 नाम बहुत चर्चित हैं l पहला बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी (Paarth Chatterjee) और उनकी करीबी माने जाने वाली अर्पिता चटर्जी (Arpita Chatterjee) l आखिर अर्पिता का इस मामले से क्या लेना-देना है, वह कैसे इसके चपेट में आई ? जब बंगाल में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों कि बहाली के लिए स्कूल सेवा आयोग (SSC) कि ओर से भर्तियाँ निकाली गई थी और इसमें कुल 20 उम्मीदवारों का चयन होना था l परीक्षा का रिजल्ट वर्ष 2017 नवम्बर 27 को आया l सिलीगुड़ी की बबीता सरकार (Babita Sarkaar) 77 अंकों के साथ टॉप 20 में अपनी जगह पक्की कर ली l लेकिन आयोग ने किसी वजह से इस मेरिट लिस्ट को रद्द कर दिया और कुछ दिनों बाद दूसरी मेरिट लिस्ट जारी की l
सबसे चौकाने वाली बात ये थी कि बबीता सरकार (Babita Sarkar) का नाम इस लिस्ट में था ही नहीं और वेटिंग लिस्ट में चला गया जबकि तृणमूल कांग्रेस सरकार में मंत्री परेश अधिकारी की बेटी अंकिता अधिकारी (Ankita Adhikari) का नाम दूसरी सूची में पहले नंबर पर आ गया। सबसे परेशान करने वाली बात यह है कि अंकिता को बबीता के मुक़ाबले 16 अंक कम मिले थे l कलकत्ता हाईकोर्ट में दूसरी मेरिट लिस्ट को चुनौती देते हुए बबीता सरकार (Babita Sarkaar) के पिता ने कहा कि एसएससी (SSC) परीक्षा में 77 नंबर हासिल करने के बावजूद उनकी बेटी का नाम वेटिंग लिस्ट में है जबकि उससे 16 नंबर कम यानी 61 नंबर पाने वाली मंत्री की बेटी अंकिता (Ankita) का नाम पहले नंबर है और उसे नौकरी भी मिल गई l
इस नई लिस्ट आने के बाद बबीता सरकार (Babita Sarkaar) ने कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया l हाई कोर्ट ने आयोग से दोनों की मार्क्स शीट मांगी जिससे खुलासा हुआ कि 16 नंबर कम पाने के बावजूद मंत्री जी की बेटी का नाम टॉप पर आ गया और 21 नंबर पर बबिता सरकार आ गई l कलकत्ता हाई कोर्ट ने(Kolkata High Court) आदेश दिया कि अंकिता अधिकारी (Ankita Adhikari) को तुरंत निलंबित किया जाए और उनको जितना सैलरी मिली है वो वापस लिया जाए और वेतन वसूल कर पैसा बबिता सरकार (Babita Sarkar) को दिया जाए और उसे नौकरी पर रखा जाए l अदालत ने पहले इस घोटाले की जांच के लिए रिटायर्ड न्यायमूर्ति रंजीत कुमार बाग (Ranjeet Kumar Bag) की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था l समिति ने अपनी रिपोर्ट में घोटाले में शामिल तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की सिफारिश की थी l
प्रवर्तन निर्देशालय (Enforcement Directorate) ने आर्पिता मुखर्जी को भी हिरासत में लिया था जो पार्थ चटर्जी की करीबी बताई जा रही हैं l ईडी ने एक बयान में कहा कि अर्पिता के घर पर बरामद 20 करोड़ रुपये एसएससी (SSC) घोटाले के अपराध की आय होने का संदेह है, कुछ वक्त के लिए अभिनेत्री रह चुकीं अर्पिता 2019 और 2020 में पार्थ चटर्जी की दुर्गा पूजा समिति के प्रचार अभियानों का मुख्य चेहरा भी रहीं हैं l जब यह घोटाला हुआ था पार्थ चटर्जी उस समय शिक्षा मंत्री थे, CBI उनसे पहले भी दो बार पूछताछ कर चुकी थी l पहली बार पूछताछ 25 अप्रैल, जबकि दूसरी बार 18 मई को की गई थी l शुक्रवार 23 जुलाई 2020 में पश्चिम बंगाल के दो मंत्रियों-पार्थ चटर्जी और परेश अधिकारी के घरों पर भी छापेमारी की गई l
बाग़ कमिटी की रिपोर्ट:
बाग समिति ने ग्रुप-डी और ग्रुप-सी पदों पर नियुक्तियों में अनियमितता पाई थी. समिति ने कहा था कि ग्रुप-सी में 381 और ग्रुप-डी में 609 नियुक्तियां अवैध रूप से की गई थीं l
राज्य स्कूल सेवा आयोग के चार पूर्व बड़े अधिकारियों और पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष कल्याणमय गांगुली के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही की सिफारिश की थी l
अदालत ने समिति की सिफारिशों को मानते हुए इस मामले की आगे की कार्रवाई सीबीआई को सौंप दिया l
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