

रिंकू सिंह ने मुजफ्फरनगर में छात्रवृत्ति योजना में करीब 100 करोड़ के घोटाले का पर्दाफाश किया, जिसके बाद 2009 में उन पर हमला हुआ और उन्हें 7 गोलियां लगीं।
गंभीर हमले और कई प्रशासनिक परेशानियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और 2022 में दिव्यांग कोटे से यूपीएससी पास कर आईएएस अधिकारी बने।
शाहजहांपुर में एसडीएम रहते हुए एक कर्मचारी को सजा देने के बाद वकीलों के विरोध पर उन्होंने खुद भी उठक-बैठक लगाई, जिसके बाद उनका तबादला कर दिया गया।
एक बड़ी पुरानी कहावत है, "मुद्दई लाख बुरा चाहे तो क्या होता है, वही होता है जो मंज़ूरे ख़ुदा होता है।" जिसका अर्थ है कि दुश्मन या बुरा चाहने वाले चाहे जितनी कोशिश कर लें, अंत में वही होगा जो ईश्वर की इच्छा होगी। कुछ ऐसी ही कहानी है, रिंकू सिंह की। हम यहाँ बात क्रिकेटर रिंकू सिंह की नहीं बल्कि IAS अफसर रिंकू सिंह (IAS Rinku Singh) की कर रहे हैं, जिन्होंने बड़े भ्रष्टाचार का उजागर किया लेकिन ईनाम स्वरुप उन्हें सीने में 7 गोलियां खानी पड़ीं। यहाँ तक कि एक बार तो उन्हें कोर्ट में उठक-बैठक तक लगानी पड़ी थी। क्या है पूरा मामला, आइये जानते हैं।
दअरसल, यह घटना साल 2008 की है। जब रिंकू सिंह (IAS Rinku Singh) ने मुजफ्फरनगर में जिला समाज कल्याण अधिकारी रहते हुए, छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति योजना में बड़े घोटाले का खुलासा किया था। उन्होंने जो सबूत जुटाए थे, उसके मुताबिक करीब 100 करोड़ का घोटाला हुआ था।
छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के तहत फर्जी खातों के माध्यम से पैसे निकाले जा रहे थे। जब उन्होंने इस मामले को सबके सामने रखा, तो 26 मार्च 2009 को उन पर जानलेवा हमला हुआ। सुबह का समय था और वो बैडमिंटन खेल रहे थे, इसी दौरान उनपर हमलावरों ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी थी।
उन्हें करीब 7 गोलियां लगी थी। इस दौरान उनका जबड़ा टूट गया, उनके सिर में तीन गोलियां लगीं और एक आंख की रौशनी भी चली गई। करीब 4 महीने तक मेरठ के मेडिकल कॉलेज में उनका इलाज चला और वो ठीक होकर वापस लौटे और आईएएस-पीसीएस कोचिंग सेंटर का कार्यभार संभाला। बता दें कि रिंकू सिंह (IAS Rinku Singh) के ऊपर जो हमला हुआ था, उसमें कोर्ट ने कई आरोपियों को सजा सुनाई, जबकि कुछ सबूतों के अभाव के चलते बरी हो गए।
रिंकू सिंह (IAS Rinku Singh) अस्पताल से ठीक होकर जब वापस लौटे, तो उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखी। RTI के जरिए कई भ्रष्टाचार की जानकारियां मांगीं लेकिन जब जवाब नहीं मिला, तो उन्होंने साल 2012 में लखनऊ निदेशालय के बाहर अनशन किया। इसके बाद प्रशासन ने उन्हें जबरदस्ती वहां से हटाया और उन्हें पागल करार देते हुए मानसिक चिकित्सालय तक भिजवा दिया। इसके साथ ही रिंकू सिंह को अनेकों बार फर्जी शिकायतों और विभागीय चार्जशीट के जरिए परेशान करने की कोशिश की गई।
अंत में साल 2018 में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने उन्हें कई घोटालों का पर्दाफाश करने का ईनाम दिया और ये ईनाम निलंबन के तौर पर था। निलंबित करते समय दलील यह दी गई कि वो ललितपुर में ठेकेदारों का शोषण कर रहे थे। हालांकि, बावजूद इसके रिंकू सिंह (IAS Rinku Singh) ने हार नहीं मानी और 2022 में विकलांगता कोटे के तहत UPSC परीक्षा 683 रैंक के साथ पास की और एक नए सफर की शुरुआत की।
जुलाई 2025 में रिंकू सिंह (IAS Rinku Singh) को लेकर एक हैरान करने देने वाला मामला सामने आया। ये उठक-बैठक से जुड़ा किस्सा है, जो काफी चर्चित रहा। उन्होंने शाहजहांपुर की पुवायां तहसील में एसडीएम (SDM) के रूप में कार्यभार संभाला था और ये उनका पहला ही दिन था। इस दौरान उन्होंने परिसर में गंदगी देखी और एक मुंशी को खुले में पेशाब करते हुए पकड़ा।
इसके बाद रिंकू सिंह (IAS Rinku Singh) ने उसे सजा के तौर पर उठक-बैठक लगवाई, जिसका स्थानीय वकीलों ने कड़ा विरोध किया। जब स्तिथि शांत नहीं हुई, तब उन्होंने खुद वकीलों के सामने कान पकड़कर पांच बार उठक-बैठक लगाई। हालांकि, उन्होंने इसे अनुशासन और जवाबदेही का संदेश माना, लेकिन शासन ने इसे 'प्रशासनिक गरिमा' के खिलाफ माना और महज 36 घंटे के अंदर ही उनका तबादला लखनऊ कर दिया।
20 मई 1982 को रिंकू सिंह राही (IAS Rinku Singh) का जन्म हुआ था। वो अलीगढ़ के निवासी बताए जाते हैं। कहा जाता है कि उनका परिवार एक निम्न-मध्यमवर्गीय था। NIT जमशेदपुर से उन्होंने मेटलर्जी में बीटेक और GATE परीक्षा में ऑल इंडिया 17वीं रैंक हासिल की। इसके बाद उन्होंने 2004 में प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा पास की और एक सामाजिक कल्याण अधिकारी के रूप में नौकरी शुरू की।
2009 में हुए घटना के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और 2022 में दिव्यांग कोटे से IAS अधिकारी बने। बता दें कि रिंकू वर्तमान समय में लखनऊ में तैनात हैं। उठक-बैठक वाली घटना के बाद से वो यूपी सरकार में राजस्व परिषद में कार्यरत हैं।