तमिलनाडु का 'ओवैसी' कौन? स्टालिन और AIADMK के बीच फंसी 4 मुस्लिम पार्टियां, जानिए दक्षिण का वो 'किंगमेकर' चेहरा!

भारत में चुनाव का माहौल चल रहा है। अप्रैल के महीने में 5 राज्यों में चुनाव होने वाले हैं। 9 अप्रैल को करेल, पुदुचेरी और असम में चुनाव होंगे होंगे जबकि 23 अप्रैल को बंगाल-तमिलनाडु (Tamil Nadu Election 2026), तो वहीं, 29 अप्रैल को बंगाल के दूसरे चरण का चुनाव होगा।
बाईं ओर सबसे ऊपर, मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन (DMK) गंभीर मुद्रा में हैं। उनके बगल में एआईएडीएमके के ई. पलानीस्वामी खड़े हैं।
तमिलनाडु में DMK और AIADMK दो मुख्य पार्टियां हैं, जिनके बीच सीधी टक्कर देखने को मिल सकती है। ऐसे में राज्य में अल्पसंख्यकों को दोनों पार्टियां लुभाने में जुटी हुई हैं। AI Generated
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Tamil Nadu Election 2026: भारत में चुनाव का माहौल चल रहा है। अप्रैल के महीने में 5 राज्यों में चुनाव होने वाले हैं। 9 अप्रैल को करेल, पुदुचेरी और असम में चुनाव होंगे होंगे जबकि 23 अप्रैल को बंगाल-तमिलनाडु, तो वहीं, 29 अप्रैल को बंगाल के दूसरे चरण का चुनाव होगा। तमिलनाडु की बात करें, तो 23 अप्रैल को यहाँ चुनाव होने वाले हैं और सभी पार्टियां जोरो शोरे से चुनावी मैदान में जीत दर्ज करने के लिए उतरी हैं।

तमिलनाडु में DMK और AIADMK दो मुख्य पार्टियां हैं, जिनके बीच सीधी टक्कर देखने को मिल सकती है। ऐसे में राज्य में अल्पसंख्यकों को दोनों पार्टियां लुभाने में जुटी हुई हैं। हालांकि, इस राज्य में भी अल्पसंख्यकों की एक पार्टी है, जिसे दूसरा AIMIM कहते हैं। ऐसे में आइये समझते हैं, कि इस राज्य में वो कौन सी पार्टी है, जो अल्पसंख्यकों की आवाज बनती है और ये कितनी मजबूत है।

कौन है तमिलनाडु की अल्पसंख्यक पार्टी?

तमिलनाडु में चुनाव (Tamil Nadu Election 2026) है और वहां भी अल्पसंख्यकों के मुद्दे उठाने वाली पार्टियां हैं। इस राज्य की मुस्लिम राजनीति हाशिए पर है लेकिन कुछ राजनीतिक दल हैं, जो खुद को अल्पसंख्यकों का हितैषी बताती हैं। अमूमन आप इन्हें दूसरा AIMIM कह सकते हैं। ऐसी कुल 4 पार्टियां हैं, जिनके बारे में हम समझते हैं।

मानिथेनया जननायक कची (MJK): 28 फरवरी 2016 को इसकी स्थापना हुई थी। इस पार्टी के अध्यक्ष तमीमुन अंसारी हैं। इन्होने ही इस पार्टी की नींव रखी थी। अंसारी ने मानिथेनया मक्कल कची से अलग होकर यह पार्टी बनाई थी। बता दें कि ये पार्टी, AIADMK के साथ मिलकर भी चुनाव लड़ चुकी है।

मानिथेनया मक्कल कची (MMK): 7 फरवरी 2009 को इस पार्टी की स्थापना हुई थी। प्रो एमएच जवाहिरुल्लाह इस पार्टी के अध्यक्ष हैं, जिन्होंने इसकी नींव रखी थी। वर्तमान में यह पार्टी DMK के साथ गठबंधन में है। इस चुनाव में MMK का 2 सीटों पर समझौता हुआ है।

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML): 10 मार्च 1948 को इस पार्टी की स्थापना हुई थी। ये राज्य की काफी पुरानी मुस्लिम पार्टी है। इसकी स्थापना एम. मोहम्मद इस्माइल (M. Muhammad Ismail) ने की थी, जिन्हें 'कायदे मिल्लत' के नाम से भी जाना जाता है। इस चुनाव में यह पार्टी DMK के साथ 2 सीटों पर गठबंधन के साथ चुनाव लड़ रही है। वर्तमान में प्रो. के. एम. कादर मोहिदीन (K. M. Kader Mohideen) इस पार्टी के अध्यक्ष हैं।

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI): 21 जून 2009 को नई दिल्ली में इस पार्टी का गठन हुआ था। ई. अबूबकर (E. Abubacker) ने इसकी नींव रखी थी। ये पार्टी भी DMK का हिस्सा है और इस चुनाव में 1 सीट पर चुनाव लड़ रही है। एम. के. फैजी वर्तमान में इस पार्टी के अध्यक्ष हैं।

कितने जिले में हैं अल्पसंख्यक लोग?

2026 में 'मुस्लिम पॉपुलेशन डिस्ट्रीब्यूशन इन इंडिया' की एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमे यह बता चला कि तमिलनाडु में कितने ऐसे इलाके हैं, जो मुस्लिम बहुल इलाके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक विलुप्पुरम, थिरुवरुर, पुडुकोट्टई, वेल्लूर और रामानाथापुरम क्षेत्रों में मुस्लिमों की संख्या ज्यादा है। थुरुवरुर में 16 फीसीदी से ज्यादा मुसलमान हैं, रामाथापुरम और वेल्लूर में 22 फीसदी विल्लुपुरम में मुस्लिम आबादी 12 फीसदी जबकि पुडुकोट्टाई में 14.5 फीसदी अल्पसंखयक हैं।

कितने ताकतवर हैं अल्पसंख्यक?

आपको बता दें कि तमिलनाडु में ये अल्पसंख्यक समाज राज्य की सरकार तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। साल 2011 में जब जनगणना हुई थी, तब के मुताबिक हिन्दुओं की आबादी 87.58 फीसदी थी। उस आंकड़ें के मुताबिक अल्पसंख्यक वोटरों की संख्या कम है। यहाँ 32 जिले हैं जहाँ हिन्दुओं का दबदबा है। आखिरी जनगणना के मुताबिक यहाँ मुस्लिमों की संख्या 42.29 लाख है। मतलब औसतन 5.86 है। वहीं, ईसाईयों की बात करें तो तमिलनाडु में इनकी संख्या मुसलमानों से भी ज्यादा है। 44.18 लाख राज्य में ईसाई हैं, जो कुल आबादी का करीब 6.12 फीसदी हिस्सा है।

बाईं ओर सबसे ऊपर, मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन (DMK) गंभीर मुद्रा में हैं। उनके बगल में एआईएडीएमके के ई. पलानीस्वामी खड़े हैं।
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