तमिलनाडु में BJP बैकफुट पर? सिर्फ 27 सीटों पर सिमटी, AIADMK के सहारे चुनाव

तमिलनाडु में स्टालिन के नेतृत्व को चुनौती देना आज के समय में भाजपा के लिए मुश्किल हो रहा है इसलिए AIADMK का सहारा लिया गया और मात्र 27 सीट पर संतोष करना पड़ा।
तमिलनाडु बीजेपी और एआईएडीएमके
तमिलनाडु में अपनी जमीन मजबूत करने के लिए भाजपा ने बिहार मॉडल अपनाया है, जहाँ उसने बड़े भाई की भूमिका AIADMK को सौंप दी है। X
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  • तमिलनाडु में अपनी जमीन मजबूत करने के लिए भाजपा ने बिहार मॉडल अपनाया है, जहाँ उसने बड़े भाई की भूमिका AIADMK को सौंप दी है।

  • स्टालिन (DMK) की सत्ता को चुनौती देने के लिए AIADMK ने एक विशाल गठबंधन तैयार किया है, जिसमें PMK (18 सीटें) और AMMK (11 सीटें) जैसे प्रभावी क्षेत्रीय दल शामिल हैं।

  • द्रविड़ अस्मिता और क्षेत्रीय समीकरणों के बीच भाजपा की यह सीमित भागीदारी भविष्य में उसकी स्वीकार्यता तय करेगी। परीक्षा का परिणाम 4 मई 2026 को चुनावी नतीजों के रूप में आएगा।

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। विश्व की सबसे बड़ी पार्टी होने का दंभ भरने वाली भाजपा तमिलनाडु में इस तरीके से समझौते को अंजाम देगी यह किसी को उम्मीद नहीं थी।

तमिलनाडु में स्टालिन के नेतृत्व को चुनौती देना आज के समय में भाजपा के लिए मुश्किल हो रहा है इसलिए AIADMK का सहारा लिया गया और मात्र 27 सीट पर संतोष करना पड़ा। दूसरे राज्यों में ऑपरेशन लोटस चलाने वाली भाजपा के हाल का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 169 में से सिर्फ 27 सीट पर ही उम्मीदवार उतार रही है।

तमिलनाडु एनडीए का हाल !

तमिलनाडु में भाजपा को लेकर चर्चा तेज है। विश्व की सबसे बड़ी पार्टी को महज 27 सीटें ही मिली हैं। गठबंधन का नेतृत्व  AIADMK  कर रही है। तमिलनाडु में डीएमके के खिलाफ भाजपा ने लामबंदी में AIADMK का नेतृत्व स्वीकार कर लिया है।

बता दें कि AIADMK स्वयं इस चुनाव में 169 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़ा करेगी। इस गठबंधन में PMK, AMMK, TMC, UK, TMMK आदि दलों को भी सीट शेयरिंग में  संतुलित हिस्सा दिया गया है। इस चुनाव में तमिलनाडु की क्षेत्रीय पार्टी PMK को गठबंधन में कुल 18 सीटें मिली हैं। 

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पीएमके और AIADMK का संबंध !

दरअसल, पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) का संबंध एआईएडीएमके से काफी पुराना है। पीएमके 1990 के दशक से ही तमिलनाडु में AIADMK के साथ चुनाव लड़ती आ रही है। बहुत सारे चुनावों में दोनों दलों को अच्छी सफलता हाथ लगी। साल 2026 के चुनाव में दोनों दलों ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है। यह चुनाव स्टालिन के खिलाफ ऐतिहासिक चुनाव हो हो रहा है क्योंकि तमिलनाडु में तीसरी पार्टी TVK भी मैदान में उतर चुकी है। 

तमिलनाडु में भाजपा अपने बिहार वाले फार्मूले से ही चुनाव लड़ रही है। जिस तरीके से बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में भाजपा गठबंधन के शुरुआती दौर में जेडीयू से कम सीटों पर चुनाव लड़ती थी लेकिन अब बराबर की साझेदार है। उसी तरीके से तमिलनाडु में पहले एआईएडीएमके के साथ खाता खोलकर संगठन विस्तार करना भाजपा का पहला उद्देश्य है, बाद में धरातल पर मजबूत होने पर गठबंधन में बराबरी की मांग कर सकती है। 

तमिलनाडु में छोटे दलों की भूमिका 

बता दें कि पीएमके प्रमुख अंबुमणि रामदास राज्यसभा सांसद हैं। पीएमके इस चुनाव में AIADMK के लिए एक मजबूत क्षेत्रीय साथी की भूमिका में है। एआईएडीएमके वाले गठबंधन में अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (AMMK) को 11 सीटें मिली हैं। इसी तरीके से अन्य क्षेत्रीय दलों को एआईएडीएमके ने साधने में सफलता हासिल कर ली है।

अब देखना यह है कि इन दलों का गठबंधन चुनाव बाद भी कायम रहता है या फिर भविष्य में गठबंधन के बनावट में बदलाव होगा। पिछले चुनाव में एआईएडीएमके के साथ लगभग 13 दलों का गठबंधन था लेकिन इस बार लगभग 20 से ज्यादा दलों का गठबंधन है। 

वहीं डीएमके (DMK) के नेतृत्व वाले गठबंधन में सीट बंटवारे की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। डीएमके खुद 164 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है जबकि बाकी सीटें उसके सहयोगी दलों को दी जाएंगी। कांग्रेस को 28 सीटें मिलने की संभावना है। इसके अलावा डीएमडीके को 10 सीटें, वीसीके को 8 सीटें और सीपीआई व सीपीआई(एम) को 5-5 सीटें मिल सकती हैं। बता दें कि 2026 के चुनाव में डीएमके के नेतृत्व में 20 से ज्यादा दलों का गठबंधन है। 

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