माता-पिता दिहाड़ी मजदूर, फूस की झोपड़ी में काटी ज़िंदगी....मिलिए तमिलनाडु के गरीब विधायक के. मरिमुथु से, बहुत ही कम है सम्पत्ति

तमिलनाडु के तिरुवर जिला के कडुवाकुडी (Kaduvakudi) में साल 1973 में जन्में के. मरिमुथु का प्रारम्भिक जीवन बहुत कठिनाइयों में बीता है। के. मारिमुतहु के पिता कलियप्पन (Kaliyappan) दिहाड़ी मजदूरी करते थे।
के. मरिमुथु
27 साल तक पार्टी के लिए काम करने पर के. मरिमुथु को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की तरफ से 2021 में विधायक उम्मीदवार घोषित किया गया था। इस चुनाव में के. मरिमुथु ने एआईएडीएमके के प्रत्याशी सी. सुरेश कुमार को लगभग 36 हजार वोटों से पराजित किया था। X
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तमिलनाडु चुनाव-2026 में सभी राजनीतिक दलों ने जनता के ऊपर जाल फेंकना शुरू कर दिया है। डीएमके और एआईडीएमके के बीच ताबड़तोड़ जुबानीजंग जारी है। इसी बीच प्रत्याशियों के नामों की घोषणा लगभग सभी पार्टियों ने कर दिया है। कुछ विधायकों की संपत्ति को लेकर लगातार चर्चा जारी है। केरल के एक विधायक के. मरिमुथु की संपत्ति को लेकर फिर एक बार चर्चा हो रही है। यह विधायक आज भी झोपड़ी में रहता।

कौन हैं विधायक के. मरिमुथु ?

तमिलनाडु के तिरुवर जिला के कडुवाकुडी (Kaduvakudi) में साल 1973 में जन्में के. मरिमुथु (K. Marimuthu) का प्रारम्भिक जीवन बहुत कठिनाइयों में बीता है। के. मरिमुथु के पिता कलियप्पन (Kaliyappan) दिहाड़ी मजदूरी करते थे। चार बहनों के अलावा के. मरिमुथु अपने पिता के एकलौते बेटे थे। जिंदगी बहुत कठिनाइयों से गुजर रही थी। धीरे-धीरे पिता ने बच्चे की पढ़ाई को जारी रखा। के. मरिमुथु ने इंटर के बाद बी.कॉम में स्नातक की डिग्री हासिल की है। राजगोपालस्वामी राजकीय कला महाविद्यालय (Rajagopalaswamy Government Arts College) से पढ़ाई के दौरान ही वामदलों के छात्र संगठनों में सक्रियता बनी हुई थी। 

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छात्रजीवन से राजनीति 

के. मरिमुथु राजगोपालस्वामी राजकीय कला महाविद्यालय (Rajagopalaswamy Government Arts College) से बी.कॉम की पढ़ाई के दौरान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन से जुड़े हुए थे। यहीं से बहुत सारे आंदोलनों में भागीदारी भी सुनिश्चित किये। एआईएसएफ (All India Students Federation -AISF) के बाद इन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन में भी बहुत दिनों तक सेवा की। 

इसके बाद इन्होंने साल 1994 से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के लिए काम करना शुरू किया। यह बड़े आश्चर्य की बात है कि इस आदमी के पास रहने के लिए ठीक से घर भी नहीं था और इन्होंने जनांदोलनों में भागीदारी देना शुरू कर दिया। एक सामान्य आदमी जब राजनीति में आता है तो वह अपनी झोली भरने में लगा रहता है, लेकिन घर की चिंता किये बिना राजनीति में कदम रख चुके के. मरिमुथु ने कभी भी गरीबी को अपने जीवन का बाधा नहीं बनने दिया। चुनाव जीतने के लिए आज के समय में धनबल का होना बेहद जरूरी है इसके बावजूद विधायक बनने में के. मरिमुथु की गरीबी ज्यादा दिनों तक बाधा न बनी रह सकी। 

पहली बार बने विधायक !

लगभग 27 साल तक पार्टी के लिए काम करने पर के. मरिमुथु को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की तरफ से 2021 में विधायक उम्मीदवार घोषित किया गया था। उस समय के. मरिमुथु की आयु लगभग 50 वर्ष थी। तमिलनाडु का तिरुथुराइपूंडी सीट एक सुरक्षित (SC) सीट था। इस चुनाव में के. मरिमुथु ने एआईएडीएमके के प्रत्याशी सी. सुरेश कुमार को लगभग 36 हजार वोटों से पराजित किया था। यह चुनाव के. मरिमुथु के जीवन का एक ऐतिहासिक चुनाव था।

एक झोपड़ी में रहने वाला आदमी लोकतंत्र के ऐसे कालखंड में चुनाव जीतता है जिसमें धनबल और बाहुबल चुनाव का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। के. मरिमुथु ने विधायक बनने के बाद भी झोपड़ी नहीं बदली और उसी झोपड़ी में रहते थे। 2021 के हलफनामे के मुताबिक के. मरिमुथु के पास चल संपत्ति ₹1,55,460 और अचल संपत्ति ₹1,75,000 सामने निकलकर आई है। सब मिलकर देखा जाए तो के. मरिमुथु के पास कुल संपत्ति  ₹3,30,460 है। 

इस बार 2026 के तमिलनाडु  चुनाव में तिरुथुराइपूंडी (Thiruthuraipoondi) से सीपीआई ने एक बार फिर के. मरिमुथु को टिकट दिया है। डीएमके के साथ गठबंधन में सीपीआई के लिए यह सीट एक महत्वपूर्ण सीट है क्योंकि यह एक आरक्षित सीट (अनुसूचित जाति) है। 

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