विरासत और विश्वास का पुराना संगम: ममता, अखिलेश और स्टालिन, समझिए कैसे हैं पारिवारिक बंधन

ममता बनर्जी का मुलायम सिंह यादव को बड़ा भाई और करुणानिधि को पिता तुल्य मानना एक पारिवारिक रिश्ते की गहराई को दर्शाता है। सैफई से लेकर चेन्नई तक, सुख-दुख में एक-दूसरे के साथ खड़े होना इन दलों को एक राजनीतिक परिवार के रूप में स्थापित करता है।
ममता बनर्जी का मुलायम सिंह यादव को बड़ा भाई और करुणानिधि को पिता तुल्य मानना एक पारिवारिक रिश्ते की गहराई को दर्शाता है। सैफई से लेकर चेन्नई तक, सुख-दुख में एक-दूसरे के साथ खड़े होना इन दलों को एक राजनीतिक परिवार के रूप में स्थापित करता है।
ममता बनर्जी का मुलायम सिंह यादव को बड़ा भाई और करुणानिधि को पिता तुल्य मानना एक पारिवारिक रिश्ते की गहराई को दर्शाता है। सैफई से लेकर चेन्नई तक, सुख-दुख में एक-दूसरे के साथ खड़े होना इन दलों को एक राजनीतिक परिवार के रूप में स्थापित करता है।AI Generated
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  • ममता बनर्जी का मुलायम सिंह यादव को बड़ा भाई और करुणानिधि को पिता तुल्य मानना एक पारिवारिक रिश्ते की गहराई को दर्शाता है। सैफई से लेकर चेन्नई तक, सुख-दुख में एक-दूसरे के साथ खड़े होना इन दलों को एक राजनीतिक परिवार के रूप में स्थापित करता है।

  • 90 के दशक में जहाँ ये दल गैर-कांग्रेसवाद और क्षेत्रीय स्वायत्तता के नाम पर एकजुट हुए थे, वहीं आज के समय में गैर-भाजपवाद के नाम पर एकजुटता बनी हुई है।

  • ये तीनों पार्टियां (TMC, SP, DMK) अपने-अपने राज्यों में बंगाली अस्मिता, सामाजिक न्याय और द्रविड़ पहचान के ध्वजवाहक होने का दावा करती हैं।

साल 2014 में भाजपा की लहर लगभग पूरे देश में थी। लोकसभा चुनाव में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिली थी। इसके बाद से देश के सियासत में दलगत राजनीति का एक नया रूप देखने को मिला। राजग गठबंधन में बीजेपी के विजय रथ को रोकने के लिए तमाम सियासी समीकरण साधे गए। इसी बीच ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और एमके स्टालिन के सियासी संबंध को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हुई थी।

क्या है ममता, अखिलेश यादव और स्टालिन का सियासी संबंध ?

8 जनवरी 2026 को ED ने कोलकाता के साल्ट लेक स्थित I-PAC के कार्यालय पर छापा मारा था। I-PAC कंपनी ममता बनर्जी के लिए काम करती है। इसके बाद बंगाल में सियासी बयानबाजियों का सिलसिला फिर एक बार परवान चढ़ा। इसके बाद  I-PAC  की चर्चा हाल ही में इसलिए हो रही थी कि उत्तर प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए साल 2027 के चुनाव की रणनीति  I-PAC द्वारा तैयार किया जाएगा।

ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन के आपसी सहमति से यह निर्णय लिया गया। तीनों पार्टियां अलग-अलग हैं, तीनों अलग-अलग राज्यों में चुनाव लड़ती हैं लेकिन इनके रिश्ते ऐसे लगते हैं जैसे ये सब एक ही परिवार के हैं।

आज का नहीं बहुत पुराना संबंध है तीनों का 

दरअसल, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी, बंगाल में तृणमूल काँग्रेस और तमिलनाडु में डीएमके तीनों पार्टियों की स्थापना अलग-अलग समय पर हुई। 90 के दशक की राजनीति में तीनों पार्टियों के नेताओं में आपसी संबंध गहरे थे। समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव का राजनीतिक संबंध ममता बनर्जी से बहुत अच्छा था। इसका सबसे बड़ा कारण यह था कि दोनों नेता गैर-कांग्रेसवाद (Non-Congressism) के समर्थक थे।

वहीं दक्षिण भारत में डीएमके भी गैर-कांग्रेसवाद (Non-Congressism) का नारा 1950 के दशक में बुलंद कर चुकी थी। तमिल भाषा के सवाल पर डीएमके एक इंच समझौता करने के लिए तैयार नहीं होती है। विकेन्द्रीकरण का समर्थन करने वाली इन पार्टियों के नेताओं ने समय और जरूरत के साथ अपने संबंधों को मजबूत बनाया था ताकि कांग्रेस के खिलाफ एक मजबूत विपक्ष तैयार किया जाए। 90 के दशक में मण्डल कमीशन लागू कराने में करुणानिधि और मुलायम सिंह प्रमुख चेहरों में गिने जाते थे।

विचारधारा की बात करें तो तमिलनाडु में करुणानिधि और यूपी में मुलायम सिंह की पार्टी जाति आधारित शोषण के खिलाफ सामाजिक न्याय की समर्थक रही हैं। अपने-अपने राज्यों में लगभग दो दशक से ज्यादा सक्रिय इन पार्टियों की खासियत यह है इनमें परिवार वालों का बोलबाला है। डीएमके में स्टालिन परिवार, समाजवादी पार्टी में अखिलेश यादव का परिवार और टीएमसी में ममता का परिवार मजबूत पकड़ रखता है। राष्ट्रीय स्तर पर तीनों पार्टियां जब एक होती हैं तो एक अलग मोर्चा बनते दिखाई पड़ता है। 

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राजनीति के अलावा पारिवारिक संबंध भी हैं ?

दरअसल, मुलायम सिंह यादव, ममता बनर्जी और करुणानिधि का आपसी संबंध अच्छा रहा है। करुणानिधि और ममता बनर्जी का संबंध एक पिता-पुत्री के समान था। 7 अगस्त 2018 को जब करुणानिधि का निधन हुआ तो ममता बनर्जी तुरंत चेन्नई पहुंची थी। उनके निधन पर ममता ने कहा था कि वह उनके अभिभावक और मार्गदर्शक थे। राजनीति के अलावा भी करुणानिधि से बहुत कुछ सीखने को मिला था।

10 अक्टूबर 2022 को मुलायम सिंह के निधन पर ममता ने कहा था वह उनके बड़े भाई थे। उनके जाने से केवल राजनीतिक क्षति नहीं बल्कि पारिवारिक क्षति हुई। ममता उस समय मुलायम सिंह के गाँव सैफई पहुंची थी और उनके बेटे अखिलेश यादव से मिलकर परिवार के सदस्य की भांति रिश्तों को निभाया था। पारिवारिक संबंध का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अखिलेश के सम्बन्धी तेजस्वी यादव को जब बेटी हुई तो तेजस्वी की पत्नी रेचल गोडिन्हो ममता के संरक्षण में थी। 

विरासत की सियासत, ममता को समर्थन !

साल 2024 के चुनाव में ममता बनर्जी को करुणानिधि के बेटे स्टालिन और मुलायम सिंह के बेटे अखिलेश यादव का समर्थन हासिल था। अखिलेश यादव बहुत बार ममता बनर्जी के पार्टी के कार्यक्रमों में शरीक हो चुके हैं और बंगाल के लगभग प्रत्येक चुनाव में समर्थन देते हैं।

साल 2024 के बाद विपक्ष के नेतृत्व को लेकर अखिलेश यादव ने ममता पर बहुत बार सहमति दर्ज करा दी है। वहीं स्टालिन की तरफ से भी ममता बनर्जी को खुला समर्थन मिलता है।

एक तरफ भाजपा इन तीनों पार्टियों पर परिवारवाद का आरोप लगाती है, तो दूसरी तरफ तीनों ही पार्टियां गैर-भाजपवाद के लिए एकजुट होकर काम कर रही हैं।  

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ममता बनर्जी का मुलायम सिंह यादव को बड़ा भाई और करुणानिधि को पिता तुल्य मानना एक पारिवारिक रिश्ते की गहराई को दर्शाता है। सैफई से लेकर चेन्नई तक, सुख-दुख में एक-दूसरे के साथ खड़े होना इन दलों को एक राजनीतिक परिवार के रूप में स्थापित करता है।
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