

महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर सियासत एक बार फिर तेज हो गई है। ओबीसी संगठनों और नेताओं ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर मराठा समुदाय को ओबीसी श्रेणी में शामिल किया गया या ‘सगे-सोयरे’ अध्यादेश को लागू किया गया तो राज्यभर में बड़ा और उग्र आंदोलन किया जाएगा। नेताओं ने साफ कहा कि इस फैसले का सीधा असर ओबीसी समुदाय के अधिकारों पर पड़ेगा और इसके लिए सरकार पूरी तरह जिम्मेदार होगी।
ओबीसी महासंघ से जुड़े नेता मंगलवार को मुंबई में एकत्र हुए, जहां उन्होंने सरकार के सामने अपना विरोध दर्ज कराया और इसे वापस लेने की मांग की। उनका कहना है कि अगर मराठा समुदाय को ओबीसी में शामिल किया जाता है तो यह मौजूदा आरक्षण ढांचे को प्रभावित करेगा।
नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया, जिसमें आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत तय की गई है। उनका कहना है कि महाराष्ट्र में पहले से ही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को 22 प्रतिशत और ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है, ऐसे में किसी भी नए वर्ग को जोड़ने से संतुलन बिगड़ जाएगा।
नेताओं ने यह भी दावा किया कि मराठा समुदाय सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत है, इसलिए उसे ओबीसी वर्ग में शामिल करना उचित नहीं होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि कुणबी और मराठा अलग-अलग जातियां हैं, लेकिन ‘सगे-सोयरे’ जैसे प्रावधानों के जरिए पुराने रिकॉर्ड खंगालकर फर्जी प्रमाणपत्र बनाए जाने की संभावना है, जिससे ओबीसी समुदाय के युवाओं की नौकरी और शिक्षा के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।
ओबीसी नेताओं ने सरकार को 12 जून तक का समय दिया और कहा कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो राज्यभर में बड़े आंदोलन शुरू किए जाएंगे। इसमें मुंबई में मोर्चा निकालने और जरूरत पड़ने पर महाराष्ट्र बंद तक की चेतावनी शामिल है।
इस बीच ओबीसी नेता प्रकाश शेंडगे ने कहा कि ओबीसी समाज के हितों की रक्षा के लिए बनाई गई विशेष समिति को तुरंत रद्द किया जाना चाहिए और इसके स्थान पर एक नई समिति का गठन किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा समिति ओबीसी हितों को प्रभावी तरीके से नहीं देख रही है। [SP]
(यह रिपोर्ट IANS न्यूज़ एजेंसी से स्वचालित रूप से ली गई है। न्यूज़ग्राम इस कंटेंट की कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता।)