

उज्जैन में होने वाले आगामी सिंहस्थ कुंभ 2028 (Ujjain Simhastha Kumbha) और कई बड़े हाईवे प्रोजेक्ट्स (Highway Projects) के चलते मालवा क्षेत्र की जमीनें इस वक्त बेहद कीमती हो चुकी हैं। लेकिन इन विकास कार्यों के शुरू होने से ठीक पहले, मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। मामला प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ( MP Chief Minister Mohan Yadav) और उनके परिवार से जुड़ा है। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री के परिवार के 11 सदस्य और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियां उज्जैन में एक बड़े जमीन अधिग्रहण विवाद के केंद्र में हैं।
इस खुलासे के बाद से ही विपक्षी दल कांग्रेस सरकार पर बेहद हमलावर है और इसे 'महाकाल की भूमि की लूट' ('Looting of Mahakal's land') करार दे रहा है। हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय और भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया है। इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि आखिर यह पूरा विवाद क्या है, इसमें कौन-कौन से नाम शामिल हैं और मुख्यमंत्री मोहन यादव से उनका क्या संबंध है।
यह पूरा विवाद जून 2026 में तब सामने आया, जब प्रतिष्ठित राष्ट्रीय समाचार पत्र 'द इंडियन एक्सप्रेस' ने एक विस्तृत खोजी रिपोर्ट प्रकाशित की। इस खोजी रिपोर्ट में सरकारी लैंड रिकॉर्ड्स और रजिस्ट्रियों का हवाला देते हुए दावा किया गया कि 13 दिसंबर 2023 को मोहन यादव (CM Mohan Yadav) के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से उनके परिवार के लैंड बैंक में अप्रत्याशित तेजी आई है। रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री बनने के बाद से उनके परिवार के 11 सदस्यों और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट फर्मों ने उज्जैन तथा उसके आसपास के इलाकों में कम से कम 137 अलग-अलग प्लॉट्स खरीदे हैं। इन जमीनों का कुल क्षेत्रफल लगभग 168 एकड़ है, जिसकी अनुमानित रजिस्ट्री वैल्यू करीब 45 करोड़ रुपये आंकी गई है। आंकड़ों के विश्लेषण से यह भी पता चलता है कि जमीन खरीदने की यह रफ्तार साल 2025 में सबसे तेज रही, जब महज एक साल के भीतर 62 प्लॉट्स यानी लगभग 92 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री कराई गई।
इस मामले में सबसे गंभीर आरोप इन जमीनों की रणनीतिक लोकेशन को लेकर लग रहे हैं। विपक्ष का दावा है कि यह कोई सामान्य व्यापारिक लेन-देन नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं की पहले से जानकारी होने (इंसाइडर ट्रेडिंग) और पद के दुरुपयोग का मामला है। खरीदे गए 168 एकड़ में से करीब 111 एकड़ जमीन ठीक उन्हीं ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में स्थित है, जहाँ राज्य सरकार द्वारा नए हाईवे, रिंग रोड या सड़कों को चौड़ा करने के बड़े प्रोजेक्ट्स मंजूर किए गए हैं। इनमें गंगेड़ी, उन्हेल, जयवंतपुरा और चंदेसरा जैसे प्रमुख हॉटस्पॉट शामिल हैं। इसके अलावा, उज्जैन मास्टर प्लान 2035 (Ujjain Master Plan) के तहत जिन कृषि भूमियों को आवासीय या व्यावसायिक जोन में बदला गया, मुख्यमंत्री के परिवार की होल्डिंग्स ठीक उन्हीं जोन्स में आती हैं, जैसे पंड्याखेड़ी में मास्टर प्लान के तहत 'कमर्शियल' घोषित किए गए इलाके में परिवार द्वारा 18 एकड़ जमीन खरीदी गई। इन सभी इलाकों को आगामी सिंहस्थ कुंभ 2028 के मद्देनजर तेजी से विकसित किया जा रहा है, जिससे इन जमीनों की कीमतें आसमान छू रही हैं।
इस पूरे जमीन विवाद की गंभीरता को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि इस मामले में किन लोगों पर आरोप लगे हैं और मुख्यमंत्री मोहन यादव से उनका क्या रिश्ता है। मीडिया रिपोर्ट और विपक्षी दावों के अनुसार, इस कथित घोटाले के केंद्र में मुख्यमंत्री के परिवार के कुल 11 सदस्य और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट इकाइयां (Entities) शामिल हैं। इन सभी सदस्यों पर मिलकर लगभग 168 एकड़ जमीन खरीदने का आरोप है।
इस सौदे में शामिल मुख्यमंत्री के परिवार के सदस्यों की सूची निम्नलिखित है:
सीमा यादव (पत्नी)
वैभव यादव (बेटा)
शालिनी यादव (बहू)
नंदलाल यादव (भाई)
नारायण यादव (भाई)
रेखा यादव (भाभी)
अभय यादव (भतीजा)
कलावती यादव (बहन)
गोविंद यादव (चचेरा भाई)
नीलेश यादव (चचेरा भाई)
सुनीता यादव (भाभी)
राजनीतिक विश्लेषक डॉ मुनीश कुमार रायजादा (Dr. Munish Kumar Raizada) ने इसपर अपनी प्रतिक्रिया ज़ाहिर की। उन्होंने X पर लिखा, ''भ्रष्ट मोहन यादव भाजपा के लिए विनाशकारी (काल) साबित होंगे। अयोध्या में भगवान राम के मंदिर से चंदा चोरी के बाद, इस नए तूफान ने बाढ़ के रास्ते खोल दिए हैं और हमारी राजनीति के गहरे भ्रष्टाचार को उजागर कर दिया है, जिसमें भाजपा भी बराबर की भागीदार है। इस दलदल से बाहर निकलने के लिए देश को 'सम्पूर्ण क्रांति' की जरूरत है, जिसे इन राजनीतिक दलों और व्यवस्था ने पैदा किया है। नेताओं और राजनीतिक दलों की मौजूदा पीढ़ी भारत पर राज करने के लायक नहीं साबित हुई है। आप चारों तरफ देखें, हर जगह भ्रष्टाचार और जवाबदेही की कमी साफ दिखाई देती है।''
बता दें कि इस मामले पर कांग्रेस ने भी मोहन यादव (Mohan Yadav) सरकार को घेरा है। उनका आरोप है कि उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ और हाईवे प्रोजेक्ट्स के नाम पर नियमों को ताक पर रखकर मुख्यमंत्री के परिवार को फायदा पहुँचाया गया है। ऐसे में सीएम को इस्तीफा देना चाहिए। वहीं, बीजेपी का कहना है कि न तो मुख्यमंत्री मोहन यादव ने और न ही उनकी पत्नी ने अपने नाम पर कोई नई जमीन खरीदी है। मुख्यमंत्री के परिवार का रियल एस्टेट और जमीन का बिजनेस उनके इस पद पर आने से कई दशक पुराना है। [SP]