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केरल में हिंदुओं के अलावा ईसाई लोगों की जनसंख्या बहुत है। केरल में धर्म परिवर्तन वाली सियासत को फिल्मों के माध्यम से बताने की कोशिश भी हुई है। ईसाई लोगों की संख्या केरल में सतत प्रक्रिया का परिणाम है।
केरल चुनाव-2026 में सभी राजनीतिक दलों द्वारा चर्च का चक्कर लगाया जा रहा है। उत्तर भारत में हिन्दू धर्म का कार्ड खेलने वाली भाजपा केरल जैसे राज्यों में चर्च के सहारे चुनाव में खाता खोलने में लगी है। आज जो ईसाइयों की संख्या केरल में दिखाई पड़ती है उसका एक लंबा इतिहास है।
ईसा मसीह ने धर्म प्रचार के लिए अपने 12 शिष्यों को चुना था। उन बारह शिष्यों में से एक सेंट थॉमस थे। सेंट थॉमस 52 ई में भारत आए थे। उन्होंने अपना पहला कदम केरल के तट पर रखा था। थॉमस का मुख्य उद्देश्य, भारत के परंपरागत धर्म से लोगों को ईसाई धर्म में बदलना था। उन्होंने धीरे-धीरे अपना काम शुरू किया। अपने काम को अंजाम देने हेतु उन्होंने सबसे पहले तथाकथित उच्च वर्ग/उच्च जाति के लोगों से संपर्क साधना शुरू किया। सेंट थॉमस ने लोगों को ईसा मसीह के बारे में बताना शुरू किया था। लोगों के मन में ईसा के लिए उन्होंने जगह बना दिया और प्रार्थना के लिए घर बनाए। यही घर आज के समय में चर्च का रूप धारण कर चुके हैं।
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सेंट थॉमस अपने चमत्कारी कार्यों से भी लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए सहमत होने पर मजबूर कर देते थे। सेंट थॉमस को लेकर बहुत सारी काल्पनिक कथाएं प्रसिद्ध हैं। एक कथा के अनुसार, एक बार की बात है, कुछ ब्राह्मण एक तालाब में स्नान कर रहे थे। सभी ब्राह्मण सूर्य देव को अर्घ्य दे रहे थे। उसी समय सेंट थॉमस वहाँ पहुँच गए थे। उन्होंने ब्राह्मणों से कहा कि आपके सूर्य देव आपके जल को स्वीकार करते हैं तो आपका पानी दोबारा लौटकर धरती ओर क्यों आता है? इसे तो ऊपर आपके भगवान के पास जाना चाहिए। इस पर ब्राह्मणों ने कहा कि यह कैसे संभव है कि पानी ऊपर जाए धरती पर न गिरे? सेंट थॉमस ने पानी को अपने हाथ में उठाकर ऊपर फेंका और पानी आसमान में ही रुक गया। थॉमस ने कहा कि मेरे ईश्वर मेरा पानी स्वीकार करते हैं। सभी ब्राह्मण आश्चर्यचकित रह गए थे। बाद में उन सभी ने थॉमस की बात मानते हुए अपना धर्म बदल लिया और सभी ईसाई हो गए।
इसके अलावा सेंट थॉमस ने मलियनकारा, पालायुर, कोट्टाकवू, कोक्कामंगलम, नीरानम, कोल्लम और चायल जैसे इलाकों में अपना अच्छा प्रभाव जमा लिया था और धर्म परिवर्तन बहुत तेजी से हुआ था।
केरल में आज के समय में ईसाइयों की जनसंख्या लगभग 18-20 प्रतिशत है। परंपरागत रूप में देखा जाए तो केरल में ईसाइयों का झुकाव यूडीएफ अर्थात कांग्रेस की तरफ ज्यादा था। परंतु ईसाइयों में भी बहुत सारे अलग-अलग शाखाएं हैं जैसे कैथोलिक, ऑर्थोडॉक्स, जैकबाईट आदि। इन लोगों के अपने-अपने हित होते हैं जिसके हिसाब से वोटिंग के वक्त असर देखने को मिलता है। बीजेपी ने पिछले कुछ समय से लगातार ईसाइयों को साधने का प्रयास किया है। इसी क्रम में बड़े छवि वाले ईसाई नेताओं को चुनाव में उतारा गया है।
जॉर्ज कुरियन (George Kurian) को कांजीरापल्ली से, पी.सी. जॉर्ज (P.C. George) को पून्जर से, शोन जॉर्ज को पाला (Pala) से, अनोप एंटनी जोसेफ को तिरुवल्ला (Thiruvalla) से, लिजॉय पॉल को मंकाडा (Mankada) से, बिजोंय थॉमस को ओल्लूर (Ollur) से और एम.जे. जोब को अलाप्पुझा (Alappuzha) से भाजपा ने टिकट दिया है। दूसरी तरफ सीपीआईएम ने भी कांग्रेस के परंपरागत वोट में सेंध लगाने की कोशिश की है। 4 मई 2026 के दिन यह स्पष्ट हो जाएगा कि केरल में ईसाई वोट बैंक में लेफ्ट और भाजपा ने सेंध लगाया या फिर कांग्रेस अपने परंपरागत वोट बैंक को संभालने में सफल रही।
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