दिल्ली के इस पॉश इलाके में खड़ा है 'अवैध' मॉल? जब खुली बीजेपी विधायक के चमचमाते साम्राज्य की पोल, तो उड़ गए सबके होश!

'सौ फुटा रोड' पर खड़ा है वह चमचमाता बहुमंजिला मॉल, जो आज की तारीख में विवादों का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है।
दिल्ली के इस पॉश इलाके में खड़ा है 'अवैध' मॉल?
दिल्ली के इस पॉश इलाके में खड़ा है 'अवैध' मॉल? Ai
Published on
Updated on
4 min read

जरा कल्पना कीजिए... आप अपने शहर की सबसे व्यस्त और वीआईपी सड़क से गुजर रहे हों। आपकी नजर एक बेहद खूबसूरत, चमचमाती हुई बहुमंजिला इमारत पर पड़ती है। आप सोचते हैं, "वाह! क्या शानदार मॉल है।" लेकिन तभी अचानक आपको पता चले कि जिसे आप विकास की चमचमाती तस्वीर समझ रहे थे, दरअसल वह कानून की धज्जियां उड़ाकर खड़ा किया गया एक 'अवैध' ढांचा है! सुनकर झटका लगा न?

ऐसा ही एक बड़ा झटका इस वक्त दिल्ली के छतरपुर इलाके के लोगों को लगा है, और इसी झटके के पीछे का सच खंगालने के लिए न्यूजग्राम (NewsGram Hindi) की टीम सीधे ग्राउंड जीरो यानी छतरपुर के सबसे चर्चित 'सौ फुटा रोड' पर जा पहुंची।

जैसे ही हमारी टीम छतरपुर स्टेशन से उतरी और इस मुख्य सड़क की तरफ बढ़ी, तो चारों तरफ का माहौल किसी पहेली जैसा नजर आया। इसी 'सौ फुटा रोड' पर खड़ा है वह चमचमाता बहुमंजिला मॉल, जो आज की तारीख में विवादों का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। दरअसल, यह कोई साधारण इमारत नहीं है; यह आलीशान मॉल स्थानीय विधायक करतार सिंह तंवर (Kartar Singh Tanwar) का बताया जा रहा है, जिसे लेकर दिल्ली नगर निगम (MCD) ने एक कड़ा नोटिस थमा दिया है।

लेकिन इस ग्राउंड रिपोर्ट की सबसे हैरान करने वाली बात यह आलीशान मॉल नहीं, बल्कि इसके ठीक बगल में दिखने वाला एक कड़वा विरोधाभास (Contrast) है। एक तरफ जहां विधायक जी का करोड़ों का चमचमाता साम्राज्य खड़ा है, वहीं दूसरी तरफ इसी छतरपुर की आम जनता बूंद-बूंद पानी जैसी बेहद बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है। आखिर रसूख की इस ऊंची दीवार के पीछे का पूरा सच क्या है? आइए, न्यूजग्राम की इस तफ्तीश को आगे बढ़ाते हैं...

विधायक का मॉल और एमसीडी का नोटिस

छतरपुर के 'सौ फुटा रोड' (Chhatarpur's 'Sau Phuta Road') पर बना यह चमचमाता बहुमंजिला मॉल इस वक्त कानूनी और राजनीतिक जंग का मैदान बन चुका है। दिल्ली नगर निगम (MCD) ने स्थानीय विधायक करतार सिंह तंवर की इस आलीशान इमारत को एक कड़ा 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया है। आरोप है कि यह इमारत नियमों को ताक पर रखकर खड़ी की गई है।

हैरानी की बात यह है कि एमसीडी द्वारा यह नोटिस 17 फरवरी 2025 को ही भेजा गया था। लेकिन अब 2026 आ चुका है और सालभर से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी प्रशासन की तरफ से कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई है। विपक्ष इसी बात को लेकर हमलावर है कि आखिर आम जनता की झुग्गी-झोपड़ियों पर तुरंत चलने वाला पीला पंजा (बुल्डोजर) विधायक के इस आलीशान साम्राज्य के आगे क्यों हांफ रहा है?

जब न्यूजग्राम (Newsgram) की टीम सच जानने इस बहुमंजिला इमारत पर पहुंची, तो वहां सन्नाटा पसरा था। मॉल के नए मैनेजर ने कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, स्थानीय लोग भी विधायक के रसूख और डर के चलते इस विवाद पर चुप्पी साधे हुए हैं। आखिर प्रशासन और रसूखदारों की यह जुगलबंदी क्या छिपाना चाहती है?

कौन हैं करतार सिंह तंवर?

करतार सिंह तंवर (Kartar Singh Tanwar)
करतार सिंह तंवर (Kartar Singh Tanwar) X

छतरपुर के इस सियासी घमासान को समझने के लिए विधायक करतार सिंह तंवर (Kartar Singh Tanwar) के राजनीतिक सफरनामे को जानना बेहद जरूरी है। करतार सिंह तंवर दिल्ली की राजनीति का एक ऐसा चेहरा हैं, जिनका राजनीतिक सफर दलबदल और बड़े सियासी यू-टर्न से भरा रहा है।

  • शुरुआती सफर: उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत भारतीय जनता पार्टी (BJP) से की थी और पहली बार भाजपा के टिकट पर ही पार्षद चुने गए।

  • 2015 का यू-टर्न: दिल्ली में जब आम आदमी पार्टी (AAP) की लहर चली, तो तंवर ने पाला बदला। साल 2015 के विधानसभा चुनाव में वह 'आप' के टिकट पर मैदान में उतरे और छतरपुर से विधायक चुने गए।

  • 2020 में फिर घर वापसी: राजनीतिक समीकरण एक बार फिर बदले और साल 2020 में करतार सिंह तंवर ने दोबारा भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। वह भाजपा के टिकट पर फिर से छतरपुर के विधायक बने।

उनके इस दलबदल को लेकर सियासी गलियारों में कई तरह के आरोप-प्रत्यारोप लगते रहे हैं। विपक्षी दलों का सीधा आरोप है कि उनके पाला बदलने के पीछे कोई नीति नहीं, बल्कि केंद्रीय जांच एजेंसियों का डर था। आरोप लगाए जाते हैं कि ED और CBI जैसी जांच एजेंसियों के कथित दबाव और कार्रवाई से बचने के लिए उन्होंने भाजपा के पाले में जाने का फैसला किया। हालांकि, इन आरोपों के बीच विधायक का रसूख और उनका यह बहुमंजिला मॉल अब उनकी राजनीति के लिए गले की हड्डी बनता दिख रहा है।

वार्ड 169 की महिलाओं का फूटा गुस्सा और नदारद जनप्रतिनिधि

चमचमाते मॉल और सियासी दावों से छतरपुर विधानसभा के वार्ड संख्या 169 (Chhatarpur Assembly Constituency Ward No. 169) की असली जमीनी हकीकत बेहद दर्दनाक है। न्यूज़ग्राम की टीम जब इस इलाके की तंग गलियों में दाखिल हुई, तो हमारा सामना आक्रोशित महिलाओं के एक समूह से हुआ, जिनका गुस्सा पीने के पानी की भीषण किल्लत को लेकर फूट पड़ा। स्थानीय महिलाओं ने बताया कि पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए उन्हें घंटों और कई बार दिनों तक लंबा इंतजार करना पड़ता है। हालत यह है कि संकरी गलियों के कारण पानी के टैंकर यहाँ तक पहुँचने में हांफने लगते हैं और समय पर कभी नहीं पहुँच पाते, जिससे लोग बूंद-बूंद पानी के लिए लाचार हैं।

जनता की इस बेहद गंभीर समस्या पर जवाब मांगने जब न्यूज़ग्राम की टीम (Newsgram Team) स्थानीय पार्षद पिंकी के कार्यालय पहुँची, तो वहाँ भी केवल निराशा ही हाथ लगी। पार्षद पिंकी अपने कार्यालय में मौजूद नहीं थीं और उनके सहयोगियों के पास इस बात का कोई जवाब नहीं था कि वे कब तक वापस आएँगी। यह उदासीनता साफ दर्शाती है कि जहाँ एक तरफ रसूखदार लोग करोड़ों के साम्राज्य खड़े करने में व्यस्त हैं, वहीं दूसरी तरफ जनता को पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव के अंधकार में धकेल दिया गया है। [SP]

दिल्ली के इस पॉश इलाके में खड़ा है 'अवैध' मॉल?
गांधी परिवार के सबसे वफादार का ऐसा दर्दनाक अंत? सोनिया गांधी के आने पर क्यों रोया था कांग्रेस का ये 'बाहुबली' संगठनकर्ता!
logo
www.newsgram.in