

हिंदू धर्म (Hindu Religion) में महाभारत सिर्फ एक पौराणिक कथा (Mythological Story) नहीं है बल्कि एक इंसान के लिए बहुत बड़ी सीख भी है। कहा जाता है कि महाभारत (Mahabharat) को कभी भी घर में नहीं रखना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से जिस तरह पांडवों और कौरवों के बीच युद्ध हुआ घर पर भी वही असर होता है। महाभारत को थोड़ा नकारात्मक तरीके से पेश किया गया है लेकिन असल में महाभारत एक इंसान के जीवन की सबसे बड़ी सीख है। महाभारत सिखाता है कि रिश्ते कैसे निभाने चाहिए। महाभारत सिखाता है कि अहंकार इंसान के जीवन को बर्बाद कर सकता है।
महाभारत (Mahabharat) सिखाता है कि एक सच्चा मित्र कैसा होना चाहिए। महाभारत एक इंसान को सिखाता है कि किन गलतियों से बचना चाहिए और सोच-बूझकर कोई भी फैसला और कदम आगे बढ़ाना चाहिए। अक्सर महाभारत ग्रंथ को लेकर उसके वास्तविक होने पर सवाल उठाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि यह सिर्फ एक पौराणिक कथा है और असल में महाभारत जैसा युद्ध हुआ ही नहीं। लेकिन समय-समय पर कई ऐसे साक्ष्य मिले हैं जो महाभारत के होने को लेकर प्रमाण देते हैं। तो चलिए आज हम आपको 7 ऐसे प्रमाण देंगे जो यह साबित करते हैं की महाभारत किसी समय हुआ था।
महाभारत (Mahabharat) में बताए गए कई ऐसे स्थल हैं जो उत्तर भारत में पाए गए। लगभग 35 ऐसे स्थानों के बारे में पता चला है जो खुद उत्तर भारत में स्थित है। इन स्थलों में तांबे के बर्तन, मुद्राएं, सोने के आभूषण तक मिले हैं, जिन्हें देखकर यह कहा जा सकता है कि वह किसी काल्पनिक दुनिया का हिस्सा नहीं हैं। यह खोज साबित करते हैं की महाभारत की दुनिया सचमुच इस धरती पर मौजूद थी।
लंबे समय तक यह माना जाता था कि महाभारत 900 से हजार ईसा पूर्व के बीच की कहानी है लेकिन पुरातात्विक बी. बी लाल (B.B Lal) ने यह धारणा बदल दी और सुझाव दिया कि यह 1500 से लेकर 2000 ईसा पूर्व की हो सकती है। सनौली की खुदाई में मिले प्राचीन हथियार, बर्तन, रथ इस बात का सबूत है कि इसकी टाइमलाइन लगभग 1500 से 2000 के बीच है और यह सभी किसी काल्पनिक कहानी या किसी काल्पनिक दुनिया का हिस्सा नहीं बल्कि इतिहास की निशानियां है।
महाभारत में भगवान श्री कृष्ण की नगरी द्वारका (Dwaraka) का समुद्र में डूब जाने का जिक्र मिलता है। पहले तो यह सिर्फ एक कल्पना मानी जाती थी लेकिन गुजरात के तट के पास समुद्र के नीचे एक ऐसी ही संरचनायेँ मिले जो लगभग 1500 ईसा पूर्व की है। ऐसा माना जाता है कि वह डूबा हुआ साम्राज्य द्वारका है या उसका अवशेष हो सकते हैं। अब यह नगरी महाभारत जैसी ही डूबी हो या नहीं इसका अस्तित्व आज भी एक चर्चा का विषय है।
कुरुक्षेत्र (Kurukshetra) जहां महाभारत का महान युद्ध होने का जिक्र मिलता है आज भी भारत में मौजूद है। यहां खुदाई में लोहे के हथियार, रथ के हिस्से और बड़े पैमाने पर युद्ध के प्रमाण मिलते हैं। यह विशेष लगभग 2800 ईसा पूर्व के हैं चाहे इन हथियारों को देवताओं ने चलाया हो या इंसानों ने वह ऐतिहासिक युद्ध का हिस्सा जरूर थे और इससे भी अनुमान लगाया जाता है कि महाभारत जैसी घटना हुई होगी।
गुजरात के खंभात की खाड़ी (Gulf of Khambhat) में समुद्र के नीचे एक प्राचीन सभ्यता के भी अवशेष मिले हैं। यहां की गई खोज में बर्तन और अन्य वस्तुएं मिले जो हजारों साल पुरानी सभ्यता की ओर इशारा करती हैं। यह जगह भी संभवतः उस दुनिया से जुड़ी हो सकती हैं जिसकी झलक महाभारत में मिलती है।
राजस्थान (Rajasthan) के वेझा गांव में पुरातत्व विभाग को कई ऐसे अवशेष मिले हैं जो लगभग महाभारत के समय से मेल खाते हैं। वहां पाए गए बर्तन औजार और अन्य चीज उस समय की सामान्य जनता की जिंदगी की कहानी कहती है, क्योंकि महाभारत सिर्फ देवताओं या राजाओं का युद्ध नहीं था बल्कि आम लोगों की भी कहानी थी।
महाभारत में सरस्वती नदी (Saraswati River) का उल्लेख मिलता है। आज भूगर्भीय और सैटेलाइट अध्ययन से यह भी सिद्ध हुआ कि ऐसी एक नदी मौजूद थी, जो बाद में भूगर्भीय परिवर्तनों और मौसम के कारण सूख गई। इस नदी के किनारे बसे शहर जैसे हस्तिनापुर, कुरुक्षेत्र और पानीपत में खुदाई से जो वस्तुएं मिली है वह महाभारत की घटना से मेल खाती है। [SP/MK]