पीएम केयर्स फंड : जन-विश्वास, पारदर्शिता की चुनौती और अनसुलझे सवाल

27 मार्च 2020 को नई दिल्ली (New Delhi) में पीएम केयर फंड पंजीकृत किया गया था। लगभग 5 वर्ष पूरे होने पर प्रधानमंत्री से जब पीएम केयर फंड का हिसाब मांग जा रहा है तो पीएमओ की तरफ से निर्देश मिल रहे हैं कि पीएम केयर फंड का हिसाब नहीं मांगा जा सकता।
नरेंद्र मोदी
27 मार्च 2020 को नई दिल्ली (New Delhi) में पीएम केयर फंड पंजीकृत किया गया था। सरकार ये बोल रही है कि पीएम केयर फंड (PM CARES Fund) एक निजी ट्रस्ट है। जब यह एक निजी ट्रस्ट है तो संवैधानिक पदों पर विराजमान नेता इसका संचालन और प्रबंधन क्यों कर रहे हैं ?NewsGram
Published on
Updated on
3 min read

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2020 में कोरोना महामारी के दौरान पीएम केयर फंड की स्थापना की थी। उस समय देश की जनता को लगा था कि देश मुश्किलों से जूझ रहा है। इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊपर विश्वास जताते हुए देश की जनता ने पीएम केयर फंड में पैसा जमा किया। लगभग 5 वर्ष पूरे होने पर प्रधानमंत्री से जब पीएम केयर फंड का हिसाब मांग जा रहा है तो पीएमओ की तरफ से निर्देश मिल रहे हैं कि पीएम केयर फंड का हिसाब नहीं मांगा जा सकता। लोकसभा सचिवालय को निर्देश मिले हैं कि पीएमकेयर फंड से जुड़ा कोई भी सवाल संसद में नहीं पूछा जा सकता। 

पहला सवाल यह है कि जनता के पैसों का हिसाब संसद में सरकार क्यों नहीं देना चाहती। दूसरा सवाल यह है कि आपदा से लड़ने के लिए जब दो तंत्र, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) और राष्ट्रीय रक्षा कोष पहले से ही स्थापित थे तो पीएम केयर फंड की स्थापना के पीछे नरेंद्र मोदी की क्या मंशा थी ?

पीएम केयर फंड 27 मार्च 2020 को ही नई दिल्ली (New Delhi) में पंजीकृत किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने इस फंड को शुरू करने में अहम भूमिका निभाई। देश के स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने और गरीबों को कोरोना महामारी में आर्थिक मदद देने हेतु इस फंड की शुरुआत एक सार्वजनिक धर्मार्थ न्यास (Public Charitable Trust) के रूप में की गई थी।

मात्र तीन महीने के अंदर इसमे 3000 करोड़ रुपए बहुत सारे पीएसयू द्वारा जमा किए थे। वहीं मात्र तीन साल के अंदर ही 13000 करोड़ रुपए इस फंड में इकट्ठे हुए थे। बाद में धीरे-धीरे बहुत सारे लोगों ने इस फंड पर विश्वास करके इसमें अपने पैसे दान किए। देश के अंदर से लेकर देश के बाहर तक, हर जगह से लोगों ने इसमें अपने पैसे भेजे थे। इसके बाद भी इस फंड में पैसा जमा करने का सिलसिला चलता रहा। 

जब लोगों ने फंड के पैसे का हिसाब सूचना के अधिकार अधिनियम (RTI) के माध्यम से मांगने का प्रयास किया तो यह जवाब दिया गया कि यह एक प्राइवेट फंड है। लगभग 5 साल बीत जाने के बाद अब देश कि जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपने पैसे का हिसाब मांगना चाहती है। इतने समय बीत जाने पर इस फंड में कितना पैसा आया। जितने पैसे इकट्ठा हुए, उन सारे पैसों का क्या हुआ? लेकिन अब सरकार बोल रही है कि यह फंड आरटीआई (RTI) के दायरे से बाहर है। 

यह भी पढ़ें : 11531 करोड़ के मालिक नरेंद्र मोदी, फिर भी लोगों को नहीं मिलेगी पीएम केयर फंड की जानकारी, PMO का सख्त निर्देश

देश के प्रधानमंत्री ने प्रत्यक्ष रूप से इस फंड के बारे में देश की जनता को बताया था। जब देश की आवाम पैसे का हिसाब मांग रही है तो यह कहा जा रहा है कि यह एक प्राइवेट फंड है। पीएम केयर फंड (PM CARES Fund) बनने के बाद देश के अलग-अलग राज्यों में चुनाव हुए थे, जिसमें उत्तर प्रदेश,उत्तराखंड  सहित अलग-अलग राज्यों में भाजपा ने चुनाव लड़ा था। अब सवाल यह उठ रहा है कि इन सारे चुनावों में भाजपा को चुनाव लड़ने के लिए पीएम केयर फंड से पैसा तो नहीं दिया गया ? भाजपा ने साल 2022 से लेकर 2024 तक विधानसभा सहित लोकसभा का जो चुनाव लड़ा था, सारा पैसा जोड़ने पर लगभग 2040 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। ये आँकड़े केवल सरकारी दस्तावेजों के आधार पर हैं। भारत में चुनाव की प्रक्रिया से सभी परिचित हैं कि चुनाव में राजनीतिक पार्टियां पैसा किस तरीके से खर्च करती हैं। 

'द क्विंट की रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशों में भारतीय दूतावासों को पीएम केयर फंड (PM CARES Fund) का प्रचार करने के लिए बोला गया। अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, चीन, जापान, जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन, दक्षिण कोरिया और यहाँ तक कि पाकिस्तान से भी इस फंड में पैसा जमा होने की आशंका जताई जा रही है, इसलिए इस फंड की जांच आधिकारिक तौर पर होनी चाहिए। 

सरकार ये बोल रही है कि पीएम केयर फंड (PM CARES Fund) एक निजी ट्रस्ट है। जब यह एक निजी ट्रस्ट है तो संवैधानिक पदों पर विराजमान नेता इसका संचालन और प्रबंधन क्यों कर रहे हैं ?

यह भी देखें :

नरेंद्र मोदी
केजरीवाल का पर्दाफाश ! शीश महल पर लुटा दिए थे इतने करोड़ रूपये, पूरा सच आया सामने

Related Stories

No stories found.
logo
www.newsgram.in