

कपिल बजाज ने अपने ब्लॉग My Stint with Kejriwal: Wising up to ‘Democracy’ and Social Activism’ में आरोप लगाया कि 2008 में तिरुवनंतपुरम गेस्ट हाउस में उन्होंने अरविंद केजरीवाल और शिल्पा(बदला हुआ नाम) नाम की एक युवती के बीच कथित निजी संबंध जैसी स्थिति देखी।
बजाज के अनुसार, वे केजरीवाल की टीम के साथ केरल में एक प्रोजेक्ट का अध्ययन कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने कमरे के दरवाजे की दरार से दोनों को एक साथ देखा और केजरीवाल ने कथित तौर पर उस युवती को अलमारी में छिपाने की कोशिश की।
इस घटना के बाद बजाज के अनुसार केजरीवाल की पारदर्शिता और सामाजिक कार्यकर्ता की छवि पर उन्हें संदेह होने लगा। उन्होंने कहा कि इस अनुभव ने लोकतंत्र और सामाजिक सक्रियता की दुनिया के बारे में उनकी सोच बदल दी।
5 अक्टूबर 2016 को लिखे गए अपने ब्लॉग “My Stint with Kejriwal: Wising up to ‘Democracy’ and ‘Social Activism’” में कपिल बजाज ने 18 नवंबर 2008 को तिरुवनंतपुरम गेस्ट हाउस में केजरीवाल और शिल्पा (पहचान छिपाने के लिए नाम बदला गया) के बीच कथित संबंध के बारे में चौंकाने वाले खुलासे लिखे हैं।
न्यूज़ग्राम ने दिल्ली स्थित कपिल बजाज से संपर्क किया और उनसे लगभग 45 मिनट तक फोन पर बात की। कपिल कहते हैं कि वह अपने ब्लॉग में लिखी बातों पर अभी भी कायम हैं। उनके फोन नंबर की बाद में Truecaller के जरिए पुष्टि भी की गई। कपिल बजाज ने ई-मेल के माध्यम से न्यूज़ग्राम (NewsGram) को अपने ब्लॉग पोस्ट की सामग्री प्रकाशित करने की अनुमति भी दी है। इसके बाद न्यूज़ग्राम (NewsGram) ने यह निर्णय लिया कि उनके ब्लॉग से कुछ अंश प्रकाशित किया जाए।
बजाज अपने ब्लॉग में बताते हैं कि केजरीवाल का एक युवती के साथ कथित संबंध था, बाद में अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री बने तो उस युवती को वैधानिक संस्था (Statutory Body) का प्रमुख नियुक्त किया गया।
लेखक के अनुसार, उन्होंने नवंबर 2008 से दिसंबर 2009 तक अरविंद केजरीवाल और उनकी टीम के साथ स्थानीय स्वशासन (Local Self-Government) के विषय पर काम किया था। अपने ब्लॉग में लेखक बताते हैं कि शिल्पा केजरीवाल से 16 वर्ष छोटी थी और शिल्पा अक्सर उन्हें मजाक में ‘आलू’ कहकर संबोधित करती थी।
बजाज के अनुसार, “मुझे याद है कि शिल्पा उनसे पैसे मांग रही थीं और केजरीवाल ने तुरंत बड़ी राशि के नोट उन्हें दे दिए।”
बजाज का दावा है कि यह घटना उनके आँखों के सामने घटित हुआ,क्योंकि 2008 में वे केजरीवाल और शिल्पा के साथ तिरुवनंतपुरम गए थे, जहां वे केरल सरकार द्वारा चलाए जा रहे पीपुल्स प्लानिंग इन डेमोक्रेसी (People’s Planning in Democracy) प्रोजेक्ट का अध्ययन कर रहे थे।
वे आगे लिखते हैं:
“मैं इंतजार करता रहा और दरवाजे के दो पल्लों के बीच बने खाली हिस्से से मुझे बिस्तर का एक हिस्सा साफ दिखाई दे रहा था।
अचानक मेरा दिल जोर से धड़कने लगा जब मैंने देखा कि शिल्पा और केजरीवाल बिस्तर के उस हिस्से से बाहर निकलते हुए दिखाई दिए।
केजरीवाल ने जल्दी से उन्हें पीछे धकेलते हुए अलमारी की ओर भेज दिया, जो मेरे खड़े होने की जगह के बाईं तरफ थी।”
दोनों कपड़े पहने हुए थे; केजरीवाल अपने कुर्ता-पायजामा में थे।
लेखक लिखते हैं कि उस समय उनका दिल तेजी से धड़क रहा था।
लेखक के अनुसार, “दरवाजे की दरार से दृश्य इतना साफ दिखाई दे रहा था कि मुझे डर था कहीं केजरीवाल की नजर मुझसे न मिल जाए, लेकिन वह शिल्पा को अलमारी में छिपाने की जल्दी में थे।
यह एक असाधारण दृश्य था।”
ब्लॉग में विस्तार से लिखी इस घटना में बजाज बताते हैं कि इस घटना ने केजरीवाल की पारदर्शिता (Transparency) को लेकर उनके मन में संदेह पैदा कर दिया। वे लिखते हैं:
“रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित ‘सामाजिक कार्यकर्ता’, जिन्हें मैंने कोच्चि में पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए सम्मानित होते देखा था, उस समय अपने एक युवती के साथ किसी गुप्त बेडरूम में एक नाटक में लगे हुए थे।”
लेखक आगे लिखते हैं कि वह पल बेहद असहज था। उन्हें पता था कि केजरीवाल सामान्य व्यवहार दिखाने की कोशिश कर रहे थे और शायद डर रहे थे कि कहीं उन्हें शक न हो जाए। हम दोनों जानते थे कि शिल्पा अलमारी में छिपी हुई थी।
इसके बाद केजरीवाल (Kejriwal) ने अपने आपको सहज दिखाने की कोशिश करते हुए लेखक से पूछा:
“शिल्पा कहाँ है?”
लेखक ने अनजान बनने का नाटक किया और कमरे से खुद बाहर चले गए।
लेखक कपिल बजाज अंत में लिखते हैं कि केरल यात्रा के दौरान केजरीवाल के साथ काम करने के पहले दो हफ्तों में ही उन्हें उन दो चीजों के बारे में (लोकतंत्र और सामाजिक कार्यकर्ताओं की दुनिया) वास्तविकता से भेंट करा गई जिनके कारण वे केजरीवाल की टीम से जुड़े थे।