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15 अप्रैल 2026 को बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन (Lt Gen Syed Ata Hasnain) के सामने सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस शपथ के साथ बिहार एनडीए में नई राजनीतिक पीढ़ी का शंखनाद हुआ। सम्राट चौधरी बिहार के दिग्गज नेता शकुनी चौधरी के सुपुत्र हैं। उनके सीएम बनने पर बहुत लोगों ने खुशी जाहिर किया तो कुछ लोगों ने उनके विवादित राजनीतिक सफर को याद कर कटाक्ष किया। पूर्व आईपीएस अमिताभ दास ने सम्राट चौधरी के विवादित राजनीतिक जीवन को याद करते हुए हुए बड़ा खुलासा किया है।
अमिताभ दास बिहार कैडर के पूर्व आईपीएस हैं। लालू यादव और नीतीश सरकार दोनों के राज में उन्होंने काम किया है और दोनों के शासन काल का अच्छा अनुभव रखते हैं। नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के ऊपर उन्होंने बयान दिया है। उन्होंने साल 1995 की एक घटना का जिक्र करते हुए सम्राट के ऊपर गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि साल 1995 में मुंगेर के तारापुर में एक घटना हुई थी। घटना में सम्राट ने 7 लोगों को जान से मार दिया था। पुलिस ने उस समय सम्राट को गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया। पूर्व आईपीएस ने आगे बताया कि सम्राट ने जेल से बाहर निकलने के लिए फर्जी दस्तावेज का सहारा लिया। सम्राट उस समय राकेश मौर्य के नाम से जाने जाते थे लेकिन इस घटना के बाद उन्होंने अपना नाम बदलकर सम्राट चौधरी कर लिया। अमिताभ दास के इस आरोप से सम्राट की ताजपोशी पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा होता है।
11 जनवरी 2026 को पटना में नीट छात्रा की मौत हुई थी। अमिताभ दास ने नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को लेकर यह बयान दिया था कि वह पटना नीट छात्रा की मौत का मुख्य आरोपी है। अमिताभ दास ने यह भी कहा कि उनके पास सारे सबूत हैं और वह सीबीआई (CBI) डायरेक्टर को सारे सबूत सौंपने की तैयारी में थे। 13 फरवरी 2026 को बिहार पुलिस ने अमिताभ दास को पटना के स्काइज अपार्टमेंट में उनके आवास पर छापेमारी किया और गिरफ्तार कर लिया।
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बिहार में प्रशांत किशोर जनसुराज पार्टी के संस्थापक हैं। उन्होंने भी सम्राट चौधरी पर गंभीर आरोप लगाया है। बिहार विधानसभा चुनाव-2025 के समय प्रशांत ने बताया कि एक मामला साल 1995 का है जब बिहार के तारापुर में नरसंहार हुआ था। सम्राट चौधरी भी इस मामले में सम्मिलित थे। उन्होंने इस मामले में अपने आपको नाबालिग साबित करने के लिए एक हलफ़नामा दिया और उस समय उनकी उम्र लगभग 15 साल बताई गई। इसके बाद सम्राट ने साल 2020 के विधान परिषद चुनावी हलफनामे में अपना उम्र लगभग 56 वर्ष बताया था। चुनावी हलफनामे के हिसाब से साल 1995 के नरसंहार के समय उनकी आयु लगभग 26 साल होनी चाहिए। यह गड़बड़ी साल 2025 के विधानसभा चुनाव में उजागर हुई थी। इसके अलावा सम्राट चौधरी पर शिल्पी हत्याकांड का आरोप है। साल 1999 में पटना में शिल्पी गौतम हत्याकांड में नाम आ चुका है।
प्रशांत किशोर ने यह आरोप भी लगाया है कि सम्राट चौधरी ने मदुरै कामराज यूनिवर्सिटी से PFC (Pre-Foundation Course) किया है। उनके अनुसार प्रायः यह कोर्स वही छात्र करते हैं जिन्हें तमिल भाषा का ज्ञान हो। सम्राट के ऊपर प्रशांत ने आरोप लगाया है कि सम्राट को तमिल भाषा का कितना ज्ञान है कि उन्होंने इस कोर्स में दाखिला लिया।
सम्राट चौधरी बिहार के कद्दावर नेता शकुनी चौधरी के बेटे हैं। सम्राट के पिता शकुनी चौधरी का संबंध लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार दोनों से ही बड़ा खास रहा है। सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर राष्ट्रीय जनता दल से शुरू हुआ। साल 1999 में राबड़ी देवी की सरकार में सम्राट को कृषि मंत्री बनाया गया था। उस समय उनकी उम्र को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। राज्यपाल सुंदर सिंह भंडारी ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए तत्कालीन बिहार सरकार से जवाब मांगा था। इसके बाद जब यह स्थिति साफ होने लगी कि सम्राट की आयु में हेरफेर हुआ है तो उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद पहली बार 2000 में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के टिकट पर परबत्ता सीट से चुनाव लड़े और विधायक बने।
बहुत लंबे समय बाद साल 2014 में उन्होंने आरजेडी से बगावत कर दिया और करीब 14 विधायकों को आरजेडी से तोड़कर नीतीश कुमार को समर्थन दे दिया। दरअसल, 2014 में बीजेपी और मोदी की लहर में बिहार का राजनीतिक समीकरण बदल रहा था। सम्राट ने समय रहते सबकुछ भांप लिया और राजद को छोड़ दिया। कुछ ही समय बाद सम्राट 2014 में जनता दल यूनाइटेड में शामिल हो गए, लेकिन नीतीश कुमार की पार्टी में ज्यादा दिन नहीं रह सके और साल 2017 में बीजेपी में शामिल हो गए। इसके बाद सम्राट की पहचान बिहार बीजेपी में बड़े चेहरे के रूप में होने लगी। सम्राट और अमित शाह के बीच मजबूत संबंध है, यही कारण है कि बिहार बीजेपी में सम्राट को विरोध का सामना नहीं करना पड़ा।
सम्राट चौधरी जबसे बिहार के सीएम बने हैं बीजेपी के भीतर बहुत सारे लोग थोड़े असहज महसूस कर रहे हैं। दरअसल सम्राट चौधरी शुरू से बीजेपी में नहीं रहे हैं, उनका राजनीतिक सफर लालू यादव की पार्टी में शुरू हुआ। सूत्रों के मुताबिक बीजेपी के भीतर बहुत सारे लोगों का यह मानना है कि किसी ऐसे शख्स को सीएम बनाना चाहिए था जो आरएसएस से जुड़ा हो और बीजेपी में ही अपना राजनीतिक सफर शुरू किया हो।
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