किसी फिल्म से कम नहीं है नीतीश कुमार की लव स्टोरी, अपनी पत्नी को देखने के लिए आधी रात दौड़ा दी बाइक

नीतीश का राजनीतिक करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है. उनके करियर से जुड़ी अधिकतर बातें लोग जानते हैं, लेकिन नीतीश के निजी जीवन से जुड़ी कई ऐसी बातें हैं, जो कि अधिकतर लोगों को नहीं पता. एक इसी तरह का किस्सा उनकी पत्नी मंजू सिन्हा से जुड़ा है l
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने स्वर्गीय पत्नी मंजू कुमारी सिन्हा के साथ
नीतीश का राजनीतिक करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है. उनके करियर से जुड़ी अधिकतर बातें लोग जानते हैं, लेकिन नीतीश के निजी जीवन से जुड़ी कई ऐसी बातें हैं, जो कि अधिकतर लोगों को नहीं पता. एक इसी तरह का किस्सा उनकी पत्नी मंजू सिन्हा से जुड़ा है l X
Published on
Updated on
4 min read

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) और उनकी दिवंगत पत्नी मंजू कुमारी सिन्हा (Manju Kumari Sinha) की प्रेम कहानी पारंपरिक रूप से तयशुदा शादी, सादगी और गहरे, शांत स्नेह का अनूठा संगम है। तयशुदा शादी होने के बावजूद, यह एक गहरे बंधन में तब्दील हो गई, और मंजू की 2007 में असमय मृत्यु तक दंपति ने एक-दूसरे के प्रति सम्मान और प्रेम का भाव बनाए रखा। 

नीतीश का राजनीतिक करि उतार-चढ़ाव से भरा रहा है. उनके करियर से जुड़ी अधिकतर बातें लोग जानते हैं, लेकिन नीतीश के निजी जीवन से जुड़ी कई ऐसी बातें हैं, जो कि अधिकतर लोगों को नहीं पता. एक इसी तरह का किस्सा उनकी पत्नी मंजू सिन्हा से जुड़ा है l 

नीतीश कुमार का जन्म 1 मार्च 1951 को बिहार के बख्तियारपुर में हुआ था l उनकी प्रारंभिक शिक्षा बख्तियारपुर में ही हुई थी l इसके बाद उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी पटना (National Institute of Technology Patna) में इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की l नीतीश कुमार और मंजू देवी की लव स्टोरी बहुत ही साधरण मानी जाती है, लेकिन वास्तव में थी नहीं l दोनों की प्रेम कहानी बहुत दिलचस्प है. नीतीश कुमार और मंजू देवी की लव स्टोरी तब शुरू होती है. जब नीतीश कुमार पटना के इंजीनियरिंग कॉलेज के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के स्टूडेंट थे, दोनों में प्यार के भाव अनुकुरित होने लगे और धीरे धीरे उनका प्रेम प्रगाढ़ होने लगा l 

इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही परिवार वालों ने नीतीश का रिश्ता मंजू कुमारी सिन्हा से तय कर दिया। उस वक्त मंजू पटना के मगध महिला कॉलेज से सोशियोलॉजी की पढ़ाई कर रही थीं।जब नीतीश और मंजू की शादी तय हुई तो दोनों पटना में ही पढ़ाई कर रहे थे। 

नीतीश की शादी परिवार वालों ने ही तय की थी। वो मंजू को देखे बिना ही शादी के लिए राजी हो गए ।नीतीश ने बहुत पहले ही शादी में दहेज न लेने की कसम खाई थी और यह बात उनके परिवार को भी पता थी। उन्होंने अपने और मंजू के परिवार से साफ कह दिया कि वे तिलक या दहेज के नाम पर एक रुपये नहीं लेंगे। शादी के कार्ड बंट जाने के बाद नीतीश को पता चला कि तिलक में 22 हजार रुपए देने की बात तय हुई है। ऐसे में जब उन्हें तिलक में पैसे लेने की बात पता चली तो वे काफी नाराज हुए। 

साथ ही उन्होंने शादी के लिए दो शर्तें रख दीं। पहली- जैसे मंजू के बारे में उनसे सहमति ली गई, वैसे ही मंजू से भी उनके बारे में सहमति ली जाए। दूसरी- अगर मंजू को कोई समस्या न हो तो बिना किसी तामझाम के, पारंपरिक तरीके से बारात निकाले बिना और सिर्फ करीबियों की मौजूदगी में शादी करेंगे। और शादी ठीक वैसे ही एक दम सादगी से हुई l उस समय नीतीश कुमार अपने छात्र राजनीति के उभरते चेहरे थे और उसी समय जय प्रकाश नारायण आन्दोलन (Jay Prakash Narayan Movement) भी चल रहा था l

बचपन से ही नीतीश को राजनीति में गहरी दिलचस्पी थी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी होने के बाद नौकरी करने से उन्होंने साफ़ इनकार कर दिया l और वह राजनीति की दुनिया में अपने कदम रखने के लिए बेताब थे l जे.पी आन्दोलन में उन्हें राजनीति में आने का मौका मिला और उसी सिलसिले में वह जेल भी गए l उस समय मंजू उनसे जेल में मिलने आती थी l लेकिन उनकी बातचीत भी एक लोहे के जाली के आर-पार से ही हो रही था l 

नीतीश कुमार जब पहली बार साल 1985 में हरनौत से विधायक बने तो बख्तियारपुर (Bakhtiyarpur) में उनके घर पर जोरदार स्वागत हुआ, सब लोग उनको बधाई देने के लिए उनके आस-पास भटक रहे थे l लेकिन नीतीश की आँखें अपनी  धर्मपत्नी को तलाश रही थी वह उस समय अपने मायके में थी l नीतीश उनको देखे बगैर नहीं रह सके और उन्होंने फैसला किया कि वह रात को ही अपने पत्नी से मिलने के लिए रवाना होंगे l

उन्होंने अपने एक मित्र से मोटरसाइकिल का जुगाड़ करवाया और अपने ससुराल चल पड़े l यह उस समय की बात है जब बिहार में गुंडा-गर्दी अपने चरम पर थी l लेकिन किसी सुरक्षा कि  परवाह न करते हुए नीतीश अपनी बाइक लेकर निकल पड़े l 40 कि.मी. का फासला तय कर  ससुराल पहुँचते-पहुँचते सुबह हो चुकी थी l जब घरवालों ने दरवाजा खोला तो सब नीतीश को देखकर हैरान रह गए l उनकी पत्नी तो उन्हें देखकर फूले न समा रही रही थी l 

उनका दांपत्य जीवन ज्यादा खुशहाल नहीं रहा l अधिक समय तक दोनों साथ नहीं रह सके l दोनों अपने-अपने काम में व्यस्त थे, एक ओर नीतीश कुमार राजनीति में वहीँ दूसरी ओर उनकी पत्नी शिक्षिका थी l 2007 में जब मंजू को निमोनिया (Pneumonia) हुआ, तो नीतीश उन्हें दिल्ली के मैक्स अस्पताल इलाज के लिए ले गए। यहां पूरे समय नीतीश, मंजू के साथ ही रहते थे। अस्पताल में नीतीश अक्सर मंजू के पास बैठकर उनके साथ समय न बिता पाने का अफसोस करते।

तब मंजू कहतीं कि मेरे रिटायरमेंट के बाद हम सभी साथ रहेंगे। उस समय मंजू के रिटायरमेंट में पांच साल बाकी थे। वे 2012 में रिटायर होने वाली थीं, लेकिन रिटायरमेंट से पहले ही 14 मई, 2007 को मंजू ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।‘अपनी पत्नी की मौत पर नीतीश कुमार फूट-फूटकर रोए थे।’ बाद में नीतीश ने मंजू के नाम पर पटना के कंकड़बाग (Kankadbaag) में मंजू कुमारी स्मृति पार्क और स्मारक बनवाया। अब हर साल नीतीश अपनी पत्नी की पुण्यतिथि पर इस स्मारक पर जाते हैं और फूल चढ़ाते हैं।

[VT]

यह भी पढ़ें:

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने स्वर्गीय पत्नी मंजू कुमारी सिन्हा के साथ
एक बिहारी नेता ने 57 साल पहले रखी थी राजधानी एक्सप्रेस की नींव, नेहरू-इंदिरा की खबू करते थे आलोचना

Related Stories

No stories found.
logo
www.newsgram.in