एक बिहारी नेता ने 57 साल पहले रखी थी राजधानी एक्सप्रेस की नींव, नेहरू-इंदिरा की खबू करते थे आलोचना

राम सुभग सिंह को प्रायः राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन के लिए जाना जाता है। राम सुभग सिंह ने स्वतंत्रता आंदोलन में भी अपना योगदान दिया था।
इंदिरा गांधी और राम सुभग सिंह
राम सुभग सिंह ने राजधानी एक्सप्रेस की रखी थी नींव, नेहरू-इंदिरा की खबू करते थे आलोचनाX
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Summary
  • लोकतांत्रिक विपक्ष की मजबूती : जहां डॉ. राममनोहर लोहिया सत्ता के विरुद्ध मुखर आवाज़ के प्रतीक रहे, वहीं डॉ. राम सुभग सिंह ने भारतीय संसदीय व्यवस्था में आधिकारिक और संस्थागत विपक्ष की भूमिका को मजबूती देकर लोकतंत्र की जड़ों को सुदृढ़ किया।

  • संघवाद और आपातकाल का विरोध : डॉ. राम सुभग सिंह सत्ता के केंद्रीकरण के विरोधी और संघवाद व सहकारी संघवाद के प्रबल समर्थक थे। आपातकाल के दौरान उन्होंने खुलकर विरोध किया, गिरफ्तारी झेली और बाद में जनता पार्टी के गठन में अहम भूमिका निभाई।

  • राजधानी एक्सप्रेस और विकास दृष्टि : रेल मंत्री रहते हुए उन्होंने राजधानी एक्सप्रेस की शुरुआत की, जिसने तेज़, आधुनिक और दूरदर्शी परिवहन की नींव रखी और राष्ट्रीय एकीकरण व आर्थिक विकास को गति दी।

भारत में लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने में अनेक नेताओं ने भूमिका निभाई है। फिलहाल लोगों को यही पता है कि जवाहर लाल नेहरू की सत्ता के खिलाफ डॉ राममनोहर लोहिया ही मुखर होकर बोलते थे और विपक्ष की भूमिका में अहम किरदार निभा गए। इस बात में कोई संदेह नहीं है कि डॉ राममनोहर लोहिया ने लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने में बहुत बड़ा योगदान दिया था। लेकिन भारतीय संसदीय परंपरा में आधिकारिक तौर पर विपक्ष की भूमिका में डॉ राम सुभाग सिंह ने एक अमिट छाप छोड़ी है। राम सुभग सिंह (Ram Subhag Singh) को प्रायः राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन के लिए जाना जाता है। भारतीय राजनीति में राम सुभग सिंह की भूमिका कुछ इस प्रकार थी

आजादी के पहले 

राम सुभग सिंह (Ram Subhag Singh) का जन्म बिहार (Bihar) के बक्सर में साल 1917 में हुआ था। प्रारम्भिक शिक्षा के पश्चात उच्च शिक्षा के लिए राम सुभग सिंह अमेरिका गए और वहाँ से पत्रकारिता में पीएचडी (Ph.D) की डिग्री मिसौरी विश्वविद्यालय से हासिल की। राम सुभग सिंह ने स्वतंत्रता आंदोलन में भी अपना योगदान दिया था। महात्मा गांधी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इन्होंने देश के आजादी हेतु लड़ाई लड़ी। भारत छोड़ो आंदोलन (1942) में भी इन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।  साल 1980 में इनका निधन हो गया।  

आजादी के बाद  

आजादी के बाद राम सुभग ने साल 1952 में लोकसभा में सासाराम (Sasaram) लोकसभा क्षेत्र का नेतृत्व किया। इसके बाद जब भारतीय राजनीति करवट बदल रही थी, उस समय इन्होंने विपक्ष की भूमिका निभाई। बता दें कि साल 1969 में  इंदिरा गांधी के समय जब काँग्रेस का विभाजन हुआ था, उस समय राम सुभग ने काँग्रेस (O) की  तरफ जाने का चुनाव किया और बाद में विपक्षी नेता की भूमिका निभाई। आपातकाल की जमकर आलोचना करने वाले रामसुभग सिंह का मानना था कि सत्ता का विकेन्द्रीकरण किया जाना चाहिए। इसलिए वो हमेशा संघवाद के प्रबल समर्थक रहे और सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism)  की हमेशा वकालत की।

रामसुभग सिंह कहते थे कि जनता के सबसे नजदीक रहने वाली सरकार ही जनता की समस्याओं को बेहतर तरीके समझ सकती है।

इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) के समय जब देश भर में (1975-1977) आपातकाल लागू हुआ और विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार किया जा रहा था, तो उस समय राम सुभग सिंह को भी  गिरफ्तार किया गया था। आपातकाल के बाद जनता पार्टी के गठन में भी राम सुभग सिंह का महत्वपूर्ण योगदान था। महात्मा गांधी के करीब रहने वाले नेताओं में से एक राम सुभग सिंह ने बाद में काँग्रेस से दूरी बना ली और समाजवादी धारा में अपने आपको समाहित कर दिया।

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राजधानी एक्स्प्रेस ट्रेन 

1969 में काँग्रेस (Congress) विभाजन से पहले इंदिरा गांधी की सरकार में राम सुभग सिंह (Ram Subhag Singh) के हाथ रेल मंत्रालय आया। राम सुभग सिंह ने उस समय ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए दिल्ली से देश के अन्य हिस्से को जड़ने के लिए राजधानी एक्स्प्रेस चलाने का फैसला लिया था। बाद मे उनका यह फैसला देश के विकास की यात्रा में काफी सटीक साबित हुआ। बता दें कि उस समय लगभग सभी ट्रेनों की चाल औसतन 70-90 किमी/घंटा ही रहता था। लेकिन उस समय राजधानी एक्सप्रेस की रफ्तार 130किमी/घंटा था। इस हिसाब से राजधानी एक्सप्रेस (Rajdhani Express) ने दिल्ली से बंगाल तक की यात्रा को मात्र 17 घंटे मे तय कर दिया। उस समय यह देश के लिए एक ऐतिहासिक बदलाव था। 

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