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देश के पांच राज्यों में चुनाव का ऐलान हो चुका है। चुनाव में नेताओं द्वारा अलग-अलग तरीके से शक्ति प्रदर्शन किया जा रहा है। आज के बदलते दौर में राजनीतिक दलों में फैशन का प्रचलन बढ़ता जा रहा है। जनता को जोड़ने के लिए हर तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। आज पांच ऐसे नेताओं की बात करेंगे जो अपनी रैलियों में अचरज भरा करतब करते दिखाई पड़ते हैं
तमिलनाडु में नई पार्टी बनाकर चुनाव के समर में उतर चुके विजय थलपति की चर्चा बहुत है। थलपति अपने चुनावी रैलियों में जब जा रहे हैं तो उनके पीछे भीड़ बहुत ज्यादा आ रही है। इस भीड़ को नियंत्रित कर पाना भी एक चुनौती बनी हुई है। इसके इतर थलप तिकी स्टाइल बहुत चर्चा में है। थलपति पुडुचेरी में एक रैली कर रहे थे। अचानक एक समर्थक ने सड़क से ही उनके लिए चश्मा फेंका, थलपति ने सटीक समय पर चश्मा पकड़ लिया। यह वीडियो बहुत ज्यादा वायरल हो चुका है।
हिमन्त बिस्वा सरमा असम के मुख्यमंत्री हैं। उनकी रैली में भी भीड़ बहुत ज्यादा आ रहा है। हिमन्त की स्टाइल को लेकर भी चर्चा बहुत अधिक है। एक तो वो बहुत तीखे प्रहार काँग्रेस पर कर रहे हैं, दूसरी बात यह है कि चार पहिया वाहन के ऊपर खड़े होकर जनता को संबोधित कर रहे हैं। एक वीडियो बहुत तेजी से वायरल है जिसमें हिमन्त अपने कार के ऊपर खड़े हैं और नीचे से कार्यकर्ता ने कुछ पेय पदार्थ फेंका, हिमन्त ने बड़े ही अच्छे ढंग से हवा में लहराते बोतल को पकड़ लिया। यह असम के चुनावी समर में बहुत आकर्षक विषय बना हुआ है।
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राहुल गांधी कांग्रेस के नेता हैं। पिछले कुछ समय से उनके रैली को लेकर चर्चा जारी है। दरअसल, राहुल गांधी ने जनता से संपर्क करने के तरीके में बदलाव किया है। हाल ही में केरल में चुनावी जनसभा को संबोधित करने के लिए राहुल गांधी गए थे। उन्होंने वहाँ की जनता से संपर्क साधने के लिए साइकिल चलाया। साइकिल चलाना और जनता से संपर्क साधना, ये दोनों काम एक साथ करना केरल चुनाव में आकर्षण का केंद्र बन गया। केरल चुनाव में राहुल गांधी ने बस में यात्रा कर रहे लोगों से मुलाकात की। यह स्टाइल भी बड़ा मजेदार लग रहा है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों पर विगत एक दशक से चर्चा बना हुआ है। मोदी ने अपने चुनावी सभाओं को आकर्षक बनाने के लिए समय-समय पर तरीका बदला है। भाषण देते समय हाथ को सामने करके मुट्ठी बंद करके तर्जनी उंगली को ऊपर उठाते हुए विपक्ष पर वार करने वाली स्टाइल लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। मोदी ने असम के चाय बागानों में महिलाओं के साथ बातचीत की। उन्होंने महिलाओं से कहा कि बचपन में वे भी चाय बेचा करते थे। असम की महिलाओं को बीजेपी से जोड़ने के लिए मोदी का यह स्टाइल चर्चा में है। मोदी पर एक व्यंग्य भरा कहावत बहुत प्रसिद्ध हो गया है कि मोदी जहां जाते हैं वहाँ उनका पुराना संबंध मिल ही जाता है।
नेताओं का आम जनता से संवाद करने का तरीका परिस्थितियों के हिसाब से बदलता रहता है। कभी-कभी यह एक्शन वाली राजनीति नेताओं की छवि पर सकारात्मक प्रभाव डालता है तो कभी-कभी छवि पर बुरा असर भी पड़ता है। चुनावी सभाओं में अब प्रभावशाली भाषणों की जगह प्रभावशाली एक्टिंग को तरजीह दी जा रही है।
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