

AI generated summary, newsroom reviewed
हाल ही में नीट परीक्षा में हुई धांधली को लेकर बवाल मचा हुआ है। सरकार ने फैसला सुनाया है कि अब परीक्षा दोबारा कराई जाएगी। इसी बीच परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था NTA पर सवालों की बौछार हो गई है। छात्रों और विपक्ष ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इसी बीच NTA के अध्यक्ष को लेकर नया बवाल खड़ा हो गया है।
दरअसल, NTA बहुत सारी परीक्षाओं को कराता है, जिसमें नीट परीक्षा भी शामिल है। NTA के अध्यक्ष प्रदीप कुमार जोशी हैं। प्रदीप कुमार जोशी साल 2023 में NTA के अध्यक्ष बने। उनके अध्यक्ष बनने के बाद बहुत सारी परीक्षाओं में गड़बड़ी सामने निकलकर आई। 18 जून 2024 को यूजीसी-नेट (UGC-NET) का पेपर लीक हो गया और बवाल मच गया था। इसके बाद किसी तरीके से सरकार ने इस पूरे मामले को संभालने का प्रयास किया और यूजीसी-नेट परीक्षा दोबारा हुई। उसके पहले 5 मई 2024 को आयोजित हुई नीट परीक्षा का आयोजन किया गया था। यह पेपर भी लीक हो गया और भारी बवाल मच गया था। सरकार ने पूरे मामले को संभाला और नीट परीक्षा दोबारा हुई। पेपर लीक होने का मामला यहीं तक नहीं रुका, यह सिलसिला आगे बढ़ा और साल 2026 में भी पेपर लीक का दंश छात्रों को झेलना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल सिर्फ शिक्षा मंत्री से ही नहीं, बल्कि संस्थागत कमजोरी पर भी उठाया जाना चाहिए। NTA अध्यक्ष प्रदीप कुमार जोशी विगत 3 साल से क्या कर रहे हैं?
5 अप्रैल 1957 को बॉम्बे में जन्मे प्रदीप कुमार जोशी के पिता मूल रूप से उत्तराखंड के रहने वाले थे। शुरुआती पढ़ाई-लिखाई के बाद प्रदीप कुमार जोशी ने स्नातक की पढ़ाई कानपुर विश्वविद्यालय से की। इसके बाद उन्होंने वहीं से पीएचडी भी की है। जानकारी के मुताबिक, प्रदीप जोशी शुरू से आरएसएस (RSS) और भाजपा समर्थित छात्र इकाई एबीवीपी (ABVP) से जुड़े रहे हैं। ABVP में रहते हुए उन्होंने संगठन को आगे बढ़ाने में काफी मदद की। परिणामस्वरूप भाजपा और आरएसएस के नेता खुश थे। साल 1981 में उन्होंने पीएचडी पूरी करने के बाद बरेली में कुछ दिनों तक अध्यापक के तौर पर काम किया।
इसके बाद साल 2006 में उन्हें मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) का अध्यक्ष बनाया गया। उस समय मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार थी और शिवराज सिंह चौहान सीएम थे। इसके बाद प्रदीप जोशी को साल 2011 में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) का अध्यक्ष बनाया गया। उस समय छत्तीसगढ़ में रमन सिंह मुख्यमंत्री थे अर्थात भाजपा की सरकार थी। इसके बाद 2015 में उन्हें संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) का सदस्य बनाया गया। उस समय केंद्र में भाजपा सरकार थी और नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री थे। इसके बाद 2020 में वे यूपीएससी के अध्यक्ष बनाए गए। उस समय देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद थे और नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री थे।
4 अगस्त 2020 को यूपीएससी परीक्षा का परिणाम आया और 829 सफल उम्मीदवारों की सूची में ओम बिड़ला की बेटी अंजलि बिड़ला का नाम नहीं था। इसके ठीक तीन दिन बाद 7 अगस्त 2020 को प्रदीप जोशी यूपीएससी के अध्यक्ष बन गए। 4 जनवरी 2021 को कंसोलिडेटेड रिजर्व लिस्ट जारी की गई जिसमें 89 उम्मीदवार थे। इस लिस्ट में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला की बेटी अंजलि बिड़ला का नाम भी शामिल था। विवाद का विषय यह था कि कंसोलिडेटेड रिजर्व लिस्ट तैयार करने में किन-किन पैमानों का ख्याल रखा गया, उसका खुलासा नहीं हुआ था और
इस नई लिस्ट को तैयार करने के पीछे क्या उद्देश्य था? सभी सीटों का रिजल्ट एक साथ घोषित क्यों नहीं किया गया? जब यह घटना घटित हुई, उस समय प्रदीप जोशी ही संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष थे।
बता दें कि ओम बिड़ला और प्रदीप जोशी दोनों आरएसएस से जुड़े रहे हैं। हालांकि इस मामले पर ओम बिड़ला ने अपनी बेटी का पक्ष लेते हुए मामले को स्पष्ट करने का प्रयास किया था, लेकिन इस मामले में आज भी संदेह बना हुआ है। इसके बाद 4 अप्रैल 2022 को प्रदीप जोशी का कार्यकाल समाप्त हो गया और वे इस पद से हट गए। इसके बाद उनको अगस्त 2023 में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) का नया चेयरमैन नियुक्त किया गया। बता दें कि साल 2024 से पेपर लीक का खेल लगातार जारी है।
आरएसएस पर लगातार यह आरोप लगता रहा है कि आज देश की हर संवैधानिक और स्वायत्त संस्था पर उसका परोक्ष या pप्रत्यक्ष रूप से कब्जा हो चुका है। शिक्षा से लेकर देश की शीर्ष चयन एजेंसियों तक, संघ पृष्ठभूमि से जुड़े चेहरों को जिस तरह से बैठाया जा रहा है, उसने संस्थाओं की निष्पक्षता और साख को गंभीर संकट में डाल दिया है।
विपक्ष का कहना है कि प्रदीप जोशी जैसे लोगों पर जांच बैठना चाहिए क्योंकि उनके माध्यम से संवैधानिक मूल्यों के स्तर को नीचे गिराया गया है।
यह भी देखें :