

भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) (UPI) को 11 अप्रैल को 10 वर्ष पूरे हो रहे है। इस दौरान यूपीआई की लेनदेन की वॉल्यूम में 12,000 गुना से अधिक का इजाफा हुआ है और लेनदेन की वैल्यू 4,000 गुना से अधिक बढ़ी है।
एनालिटिक्स फर्म ट्रैक्सन (Analytics firm Traxon) के आंकड़ों के अनुसार, यूपीआई के जरिए वित्त वर्ष 26 में 218.98 अरब लेनदेन हुए और इनकी वैल्यू 285 लाख करोड़ रुपए थी। वहीं, वित्त वर्ष 17 में यह आंकड़ा 1.786 करोड़ लेनदेन (transaction) पर था और इनकी वैल्यू 6,952 करोड़ रुपए थी।
शुरुआती वर्षों में लेनदेन धीरे-धीरे बढ़े और वित्त वर्ष 18 में 91.5 करोड़ और वित्त वर्ष 19 में 5.39 तक तक पहुंचे। फिर वित्त वर्ष 20 में यूपीआई मुख्यधारा में आया और 12.52 अरब लेनदेन के आंकड़े पर पहुंचा और इनकी वैल्यू 21 लाख करोड़ रुपए से अधिक थी।
महामारी के वर्षों में यूपीआई के उपयोग में तेजी आई और वित्त वर्ष 21 में लेनदेन की संख्या 22.33 अरब और वित्त वर्ष 22 में 45.97 अरब तक पहुंच गई, और वित्त वर्ष 2023 में यह फिर से दोगुनी होकर 83.75 अरब लेनदेन तक पहुंच गई।
यूपीआई ने वित्त वर्ष 24 में 130.13 अरब और वित्त वर्ष 25 में 185.87 अरब लेनदेन दर्ज किए।
2025 में व्यापारियों द्वारा भुगतान स्वीकार करने का आधार भी विस्तारित हुआ, यूपीआई क्यूआर कोड (UPI QR Code) की संख्या में पिछले वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 73.13 करोड़ तक पहुंच गई।
पॉइंट-ऑफ-सेल टर्मिनलों (point of sale terminal) की संख्या में 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह बढ़कर 1.148 करोड़ हो गई।
नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (National Payments Corporation of India-NPCI) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में यूपीआई ने 2016 में लॉन्च होने के बाद से अब तक का सबसे अधिक मासिक लेनदेन दर्ज किया।
यूपीआई ने मार्च में 22.64 अरब लेनदेन प्रोसेस किए, जो फरवरी में दर्ज किए गए 20.39 अरब लेनदेन से काफी अधिक है।
मार्च का आंकड़ा जनवरी में दर्ज किए गए 21.70 बिलियन लेनदेन के पिछले उच्चतम स्तर को भी पार कर गया। इस दौरान वार्षिक आधार पर, लेनदेन की मात्रा में 24 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
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(यह रिपोर्ट IANS न्यूज़ एजेंसी से स्वचालित रूप से ली गई है। न्यूज़ग्राम इस कंटेंट की कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता।)