अमेरिका-चीन हैरान...! टेक्नोलॉजी के मामले में भारत नहीं है पीछे, इन 3 आविष्कारों का पूरी दुनिया में नहीं है कोई तोड़

भारत में इस समय इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 चल रहा है जहाँ दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्ष के साथ कई बिजमैन शिरकत कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी AI को लेकर काफी उत्साहित भी हैं।
भारत के तिरंगे के साथ भविष्यवादी भारत का दृश्य, इंडिया गेट और लोटस टेम्पल के बीच आधुनिक शहर, रॉकेट लॉन्च, हाई-स्पीड ट्रेन, ड्रोन डिलीवरी, सैटेलाइट डिश, इलेक्ट्रिक कार, रोबोट और वैज्ञानिक उन्नत तकनीक पर काम करते हुए दिख रहे हैं।
इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 के बीच भारत की तकनीकी ताकत उजागर हुईAI Generated
Summary
  • AI समिट में भारत की टेक शक्ति का संदेश, मोदी और मैक्रो ने भारत की डिजिटल प्रगति और AI नेतृत्व क्षमता को वैश्विक मंच पर रेखांकित किया।

  • UPI और डिजिटल भुगतान क्रांति, NPCI द्वारा विकसित UPI ने कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देकर भारत को वैश्विक डिजिटल पेमेंट लीडर बनाया।

  • भाषिनी और इंडिया स्टैक से डिजिटल समावेशन, Bhashini भाषा बाधा खत्म कर रही है, जबकि India Stack (आधार-डिजीलॉकर) ने डिजिटल पहचान और सेवाओं को आम जनता तक पहुँचाया।

भारत में इस समय इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 चल रहा है जहाँ दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्ष के साथ कई बिजमैन शिरकत कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी AI को लेकर काफी उत्साहित भी हैं। भारत मंडपम में इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि आज जो हम AI के बारे में देख और अनुमान लगा रहे हैं, वह उसके प्रभाव की केवल शुरुआती झलक है।

उन्होंने समिट में युवाओं की बड़ी भागीदारी को खास बताया और कहा कि इससे नया आत्मविश्वास पैदा होता है। वहीं, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी अपने विचार पेश किये। उन्होंने मुंबई के एक स्ट्रीट वेंडर का जिक्र कर भारत के डिजिटल बदलाव के बारे में सबको बताया। उन्होंने बताया कि जो व्यक्ति एक दशक पहले बैंक अकाउंट नहीं खोल पाता था, वह अब आसानी से ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम का इस्तेमाल करता है।

इन बातों से एक चीज साफ़ है कि भारत धीमे-धीमे ही सही लेकिन टेक्नोलॉजी का केंद्र बनता जा रहा है और भारत ने इसको साबित भी किया है और दुनिया को हैरान भी किया है। आज हम आपको भारत के 3 ऐसे आविष्कार के बारे में बताएंगे, जो पूरी तरह से 'MADE IN INDIA' है, जिसका लोहा पूरी दुनिया मान रही है।

1. यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI)

सफ़ेद बैकग्राउंड पर UPI लिखा दिख रहा है।
यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) 11 अप्रैल 2016 को भारत में लांच हुआ था। X

11 अप्रैल 2016 को भारत में एक नई चीज आई, जिसे यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) के नाम से जाना जाता है। देश ने पहली बार देखा कि कैसे मोबाइल के जरिये आप पेमेंट कर सकते हैं। आपको बस करना कुछ नहीं है। फ़ोन निकालना है, सामने एक स्कैनर होगा, उसे स्कैन करना है और रकम डालकर पेमेंट कर देना है। उस दौर में किसी ने नहीं सोचा होगा कि मोबाइल फोन से भी पेमेंट हो सकता है लेकिन भारत ने ऐसा कर दिखाया। इसे बनाने वाले भारत के लोग थे। NPCI (National Payments Corporation of India) ने इसे बनाया था और NPCI को RBI और IBA ने मिलकर बनाया था।

इसे बनाने में पूर्व RBI गवर्नर डॉ रघुराम राजन और कई टेक्नोलॉजी के एक्सपर्ट्स की टीम थी। इसको बनाने के पीछे का मकसद था, कैस (Cash) की झंझट को कम करना। भारत की इस टेक्नोलॉजी ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया था। आज चीन, अमेरिका और रूस जैसे देश भारत की इस टेक्नोलॉजी के कायल हैं। 10 से ज्यादा देश वर्तमान समय में भारत का UPI फ्रांस, यूएई (संयुक्त अरब अमीरात), सिंगापुर, श्रीलंका, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, वियतनाम, यूके (यूनाइटेड किंगडम), थाईलैंड, कतर, ओमान और जापान में चल रहा है।

2. भाषिनी (AI Translation Tech)

सफ़ेद बैकग्राउंड है जहाँ भारत की कई भाषाओँ के साथ मोबाइल फोन भी दिख रहा है।
भारत के पास अपना खुद का "AI Translation Tech" सिस्टम भी है और इसका नाम भाषिनी (Bhashini) है। X

शायद बहुत लोग इस बात से अनजान होंगे कि भारत के पास अपना खुद का "AI Translation Tech" सिस्टम भी है और इसका नाम भाषिनी (Bhashini) है। जुलाई 2022 में पीएम मोदी ने इसका उद्घाटन किया था। इसे Ministry of Electronics ने देश की भाषा के Translation के तहत विकसित किया था। इसका मकसद था भाषा की बाधा को खत्म करना क्योंकि भारत में हर 20 किमी के बाद भाषा बदल ही जाती है। इसके साथ ही देश में अंग्रेजी समझने वालों की संख्या 10-12% ही है। ऐसे में ये टेक सिस्टम उनकी काफी मदद करता है।

भारत सरकार आत्मनिभर्रता मिशन के तहत देश को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही है, इसलिए हर कोई चाहता था कि इंडिया का खुद का एक AI मॉडल हो, जो सरल भाषा में Translation करे। साल 2023 में जब भारत में G20 हुआ था, तब पीएम मोदी ने इसको दुनिया के राष्ट्राध्यक्षों से रूबरू कराया था। UNICEF जैसे अंतर्राष्ट्रीय संस्थान भाषिनी (AI Translation Tech) के साथ काम कर रहे हैं।

3. इंडिया स्टैक (India Stack)

नीले बैकग्राऊंड पर मोबाइल रखा है जिसमे डिजीलॉकर लिखा है।
इंडिया स्टैक की नींव साल 2009 में रखी गई थी आधार प्रोजेक्ट के जरिये। X

इंडिया स्टैक (India Stack) को एप्प या सॉफ्टवेयर नहीं है बल्कि भारत की डिजिटल ताकत का समावेश है। इसके अंतर्गत आधार और डिजीलॉकर जैसी चीजें आती हैं। इसे दुनिया का सबसे बड़ा Digital Public Infrastructure (DPI) माना जाता है। इसको बनाने की नींव साल 2009 में तब रखी गई, जब आधार प्रोजेक्ट लांच हुआ था। फिर आगे चलकर इसमें डिजीलॉकर जैसी चीजें जुड़ती चली गईं। NPCI और भारत सरकार ने इसे मिलकर बनाया था।

आधार का मकसद था कि सबकी पहचान को डिजिटल करना जबकि डिजीलॉकर में सभी डॉक्युमेंट और डाटा को डिजिटल तरीके से स्टोर करना ताकि भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं से निपटा जा सके। भारत ने जब इसे लांच किया था, तब पूरी दुनिया हैरान रह गई थी। पश्चमी देशों में ऐसी चीजें ज्यादातर प्राइवेट कंपनियां कंट्रोल करती हैं लेकिन भारत सरकार ने यह दिखाया कि सरकारी तंत्र भी ऐसी चीजें बना सकती है। बता दें कि G20 में भारत ने इसका नमूना पूरी दुनिया के सामने रखा भी था।

तो ये थी भारत की 3 टेक्नोलॉजी जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है।

भारत के तिरंगे के साथ भविष्यवादी भारत का दृश्य, इंडिया गेट और लोटस टेम्पल के बीच आधुनिक शहर, रॉकेट लॉन्च, हाई-स्पीड ट्रेन, ड्रोन डिलीवरी, सैटेलाइट डिश, इलेक्ट्रिक कार, रोबोट और वैज्ञानिक उन्नत तकनीक पर काम करते हुए दिख रहे हैं।
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