महिला आरक्षण बिल 2026: PM मोदी बना रहे 2029 का प्लान, विपक्ष ने OBC महिलाओं के लिए कोटा के भीतर कोटा का मुद्दा उठाया

महिला आरक्षण का मुद्दा पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से संसद में महिलाओं के 33 प्रतिशत सीट आरक्षित करने की बात सामने निकलकर आ रही है।
 नारी शक्ति वंदन अधिनियम
महिला आरक्षण का मुद्दा पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से संसद में महिलाओं के 33 प्रतिशत सीट आरक्षित करने की बात सामने निकलकर आ रही है। AI Generated
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महिला आरक्षण का मुद्दा पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से संसद में महिलाओं के 33 प्रतिशत सीट आरक्षित करने की बात सामने निकलकर आ रही है। यह एक ऐतिहासिक बिल है क्योंकि महिलाओं को इस बिल के बहुत लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा था। इस बिल को लेकर दो तरीके की बातें सामने निकलकर आ रही हैं

क्या है महिला आरक्षण बिल ?

महिला आरक्षण बिल नारी शक्ति वंदन अधिनियम के नाम से संसद में पास होने वाला है। इस बिल के माध्यम से संसद में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित किया जाएगा और उनको 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। 16-18 अप्रैल 2026 के बीच संसद का एक विशेष सत्र आहूत है। विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल पेश करके इसे 2029 लोकसभा चुनाव से पहले लागू करने की संभावना जताई जा रही है। नए बिल के अनुसार लोकसभा के सीटों में बदलाव हो सकता है। महिलाओं के लिए लगभग 273 सीट अलग से जोड़ा जा सकता है। इस हिसाब से लोकसभा में कुल सीटों की संख्या बढ़कर 816 हो सकती है। महिला आरक्षण के लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाया गया है जबकि इसके पहले यह सुनश्चित किया गया था कि महिला आरक्षण को नई जनगणना और नए परिसीमन के बाद लागू किया जाएगा। यह आरक्षण 15 वर्षों के लिए रहेगा। संसद के पास यह अधिकार है कि जरूरत के हिसाब से इस आरक्षण के समय सीमा को बढ़ाया जा सकता है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बिल को महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि देश एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है, जहां महिला शक्ति को समर्पित बड़ा फैसला लिया जाने वाला है। 

महिला आरक्षण बिल पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है, "देश की विकास यात्रा के इन अहम पड़ावों के बीच भारत 21वीं सदी के सबसे बड़े निर्णयों में से एक लेने जा रहा है। मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं कि यह निर्णय नारी शक्ति को समर्पित है, नारी शक्ति वंदन को समर्पित है।"

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महिला आरक्षण बिल में संशोधन की मांग ! 

महिला आरक्षण को लेकर बहुत सारे लोगों ने सहमति दर्ज कराते हुए इसमें कुछ अन्य प्रावधानों को जोड़ने की वकालत की है। इस बिल पर सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि इसमें अन्य पिछड़े वर्ग से आने वाली महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण का प्रावधान नहीं है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि महिला आरक्षण के इस बिल का उपवर्गीकरण किया जाना चाहिए अर्थात कोटा के भीतर कोटा की मांग हो रही है। कोटा के भीतर कोटा का समर्थन करने वालों का तर्क है कि अगर आरक्षण बिल का उपवर्गीकरण नहीं होगा तो संसद में वहीं महिलाएं पहुंचेंगी जो पहले से सम्पन्न और बड़े घराने की हैं। 

बता दें कि इस बिल में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए अलग से कोटा बनाया गया है। लेकिन अन्य पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए अलग से कोटा नहीं है। बहुत सारे राजनीतिक दलों ने इस बिल में OBC वर्ग की महिलाओं के लिए भी आरक्षण के भीतर आरक्षण की बात दोहराई है। राष्ट्रीय जनता दल, समाजवादी पार्टी, बसपा और कांग्रेस ने महिला आरक्षण के भीतर ओबीसी महिलाओं के लिए सीट आरक्षित करने की वकालत की है। 

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