

मार्कंडेय काटजू (Markandey Katju) भारतीय नागरीक हैं. काटजू भारतीय सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज, दिल्ली और मद्रास हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और प्रेस कौंसिल ऑफ़ इंडिया के चेयरमैन रह चुके हैं. उनका जन्म 20 सितम्बर 1946 में लखनऊ में एक कश्मीरी हिन्दू परिवार में हुआ था. मार्कंडेय काटजू हमेशा ही सुर्ख़ियों में बने रहते हैं और इसका मुख्य कारण है उनके विवादास्पद बयान. ऐसा कभी नहीं हुआ कि वो बयान दें और उस पर कोई टिप्पणी न करे या फिर उस पर कोई विवाद न खड़ा हो. वो अपने हर बयान में किसी न किसी पर तंज कसते हैं और उसकी बुराई करते हैं.
अब एक नजर काटजू के टॉप 10 विवादित बयानों पर:
लालू प्रसाद यादव के बहाने बिहारियों पर तंज कसते हुए कहा कि:
सब बिहारी लोग मूर्ख हैं.
मुझे लगा था कि लालू के राज में फ्रीडम ऑफ़ प्रेस थी लेकिन अब बिहार में फ्रीडम ऑफ़ प्रेस ख़त्म हो गई है. उनके इस बयान से बिहार की राजनीति गरमा गई और राजद के कार्यकर्ता इस बयान का विरोध करते हुए काटजू के पुतले भी फूंके.
सुभाष चन्द्र बोस जापान के एजेंट थे और महात्मा गाँधी ब्रिटिश एजेंट थे: काटजू
काटजू के मुताबिक सुभाष चन्द्र बोस जापान के लिए काम करते थे और महात्मा गाँधी ब्रिटिश एजेंट थे, उन्होंने धर्म के सहारे लोगों को गुमराह किया. संसद में भी यह चर्चा का विषय बना रहा.
“जिन महिला वकीलों ने मुझे आंख मारी, उन्हें कोर्ट से अनुकूल फैसले मिले.”
काटजू ने महिलाओं का अपमान करते हुए ये बयान दिया है, एक महिला ने काटजू से पुछा कि कोर्ट में किस प्रकार से अपने बात को प्रभावशाली ढ़ंग से रखें ? उस पर काटजू ने ये बयान दिया l
मार्कंडेय काटजू ने आम आदमी पार्टी की शाज़िया इल्मी को किरण बेदी से सुंदर बताया था.
अपने एक बयान में काटजू ने शाजिया इल्मी जो आम आदमी पार्टी की कार्यकर्ता थीं, उनका तारीफ करते हुए काटजू ने कहा कि शाजिया इल्मी की खूबसूरती किरण बेदी से कई गुना आगे है.
सलमान रुश्दी मामूली औसत दर्जे का लेखक: काटजू
मार्कंडेय काटजू सलमान रुश्दी की किताब “मिडनाइट्स चिल्ड्रेन” की आलोचना करते हुए कहा था कि रुश्दी आले-दर्जे के लेखक हैं.
90% प्रतिशत भारतीय बेवकूफ हैं, एक सेमीनार में काटजू का बयान
मार्कंडेय काटजू ने एक सेमीनार को संबोधित करते हुए भारतीयों का ही बुराई करने लगे और कहा कि भारतीय लोग आसानी से धर्म के बहकावे में आ जाते हैं.
सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न नहीं देना चाहिए था: काटजू
काटजू की आलोचना केवल लेखक और स्वतंत्रता सेनानी तक सीमित नहीं बल्कि खेल और सिनेमा जगत के सितारों पर भी थी. उन्होंने एक बार कहा था कि सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न नहीं मिलना चाहिए था इससे समाज में असमानता बढ़ती है और विशिष्ट सम्मानों का अपमान होता है.
अमेरिकन एडल्ट अभिनेत्री सनी लियॉन पर टिप्पणी:
मार्कंडेय ने एक बार अपने बयान में सनी लियॉन का जिक्र करते हुए कहा था कि अगर वो पोर्नस्टार हैं तो उसके लिए उनके काम की निंदा नहीं होनी चाहिए.
नरेन्द्र मोदी पर तंज: मोदी तो RSS और मीडिया की देन हैं
भारत के वर्तमान प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के शाशनकाल पर तंज कसते हुए मार्कंडेय काटजू ने कहा था कि “नरेन्द्र मोदी तो RSS और मीडिया की बनाई हुई छवि हैं.
गौ रक्षा दिखावा और ढ़ोंग है l
काटजू के अनुसार गाय रक्षा के नाम पर जो हो रहा है वह केवल दिखावा और राजनीति के लिए हो रहा है. उत्तर प्रदेश में बूचडखाने को बंद करने को ले कर कहा था कि: beef (जाय का माँस) मैं भी खाता हूँ और इसमें गलत क्या है, खान-पान किसी की व्यक्तिगत इच्छा होती है और सरकार को इस पर रोक लगाने का कोई अधिकार नहीं है.
तो ये थे काटजू के 10 विवादित बयान।
[VT]
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