पत्रकार रवि नायर को कोर्ट ने सुनाई 1 साल की सजा, तो प्रशांत भूषण ने ज़ाहिर की नाराजगी!

गुजरात की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने मंगलवार, 10 फरवरी 2026 को एक पत्रकार रवि नायर (Ravi Nair) को अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड द्वारा दायर आपराधिक मानहानि मामले में एक साल की सजा और 5,000 रुपये का जुर्माना सुनाया।
 बाईं ओर चश्मा पहने प्रशांत भूषण हल्के रंग की शर्ट में दिखाई दे रहे हैं, जबकि दाईं ओर पत्रकार रवि नायर ग्रे टी-शर्ट में किताबों की अलमारी के सामने खड़े नजर आ रहे हैं।
गुजरात कोर्ट ने अदाणी एंटरप्राइजेज मानहानि केस में पत्रकार रवि नायर को एक साल की सजा सुनाई, जिस पर प्रशांत भूषण ने फैसले की आलोचना की।X
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  • गुजरात कोर्ट ने पत्रकार रवि नायर को अदाणी एंटरप्राइजेज मानहानि केस में 1 साल की सजा और ₹5,000 जुर्माना सुनाया।

  • कोर्ट ने ट्वीट्स को मानहानिकारक माना, जबकि बचाव पक्ष ने उन्हें जनहित की आलोचना बताया; प्रशांत भूषण ने फैसले की आलोचना की।

  • नायर ने “हम देखेंगे” कहकर फैसले को चुनौती देने के संकेत दिए।

गुजरात की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने मंगलवार, 10 फरवरी 2026 को एक पत्रकार रवि नायर (Ravi Nair) को अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड द्वारा दायर आपराधिक मानहानि मामले में एक साल की सजा और 5,000 रुपये का जुर्माना सुनाया। रवि एक स्वतंत्र पत्रकार हैं, जो कॉरपोरेट एकाधिकार और कथित गड़बड़ियों, जिनमें अदाणी-हिंडनबर्ग विवाद भी शामिल है, पर लगातार रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

यह सजा अक्टूबर 2020 से जुलाई 2021 के बीच रवि द्वारा अपने एक्स (पहले ट्विटर) अकाउंट और “अदाणी वॉच” पर प्रकाशित जांच से जुड़ी पोस्टों के आधार पर दी गई। टीएनएम (TNM) ने ट्वीट्स की जाँच की और पाया कि उनमें से 14 ट्वीट टाइम्स ऑफ इंडिया, ब्लूमबर्ग, न्यूज़क्लिक, कारवां और अदाणी वॉच की खबरों के लिंक थे, जिन पर रवि ने टारगेट करते हुए टिप्पणी की थी। अब इसी मामले पर प्रशांत भूषण ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। आइये समझते हैं, पूरा मामला।

इस मामले में रवि नायर को मिली सजा

रवि नायर को ज्यूडिशियल फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट दामिनी दीक्षित ने दोषी पाया और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 499 (आपराधिक मानहानि) के तहत सजा सुनाया। कोर्ट ने इस दलील को ख़ारिज किया कि उनके ट्वीट्स जनहित और शासन से जुड़े मुद्दों पर निष्पक्ष टिप्पणी और आलोचना थी।

कोर्ट में जिन पोस्टों को मानहानिकारक बताया गया, उनमें एक पोस्ट अक्टूबर 2020 में केंद्र सरकार द्वारा प्राकृतिक गैस विपणन (Natural Gas Marketing) सुधारों की घोषणा की आलोचना से जुड़ा था। उस पोस्ट में कैबिनेट के फैसले का लिंक था और सवाल किया गया था कि क्या यह पारदर्शी कदम है, साथ ही कहा गया था कि अदाणी सीएनजी (CNG) बाजार में ‘नंबर वन’ बनना चाहता है।

वहीं, रवि के वकील ने दलील दी कि अदाणी एंटरप्राइजेज ने अपनी 2020-21 की वार्षिक रिपोर्ट में जेएनपीटी कंटेनर टर्मिनल (JNPT Container Terminal) को निजी निवेश के अवसर के रूप में बताया था। उन्होंने सवाल उठाया कि एक पत्रकार संभावित एकाधिकार पर चिंता क्यों नहीं जता सकता?

20 अक्टूबर 2020 के एक अन्य ट्वीट में रवि ने टाइम्स ऑफ इंडिया का एक लेख साझा किया, जिसमें डीएचएफएल (DHFL) की बोली प्रक्रिया को लेकर सरकार के रवैये की आलोचना की गई थी। रवि ने लिखा था कि यह समूह एक “बुलबुला” है जो कभी भी फूट सकता है। उनके वकील ने कहा कि ऐसी बातें अन्य प्रकाशनों ने भी कही थीं, लेकिन केवल रवि को निशाना बनाया गया।

एक अन्य ट्वीट में रवि ने हीरा कारोबारी जतिन मेहता, जिन पर बैंकों से हजारों करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप है। उसे भारत वापस क्यों नहीं लाया गया, यह सवाल उठाया और पूछा कि क्या उनके अदाणी परिवार से संबंधों ने उन्हें बचाया।

रवि के वकील ने कहा कि अदाणी एंटरप्राइजेज ने प्रतिष्ठा या आर्थिक नुकसान का दावा तो किया, लेकिन यह साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं दिया कि उनके ट्वीट्स से कोई नुकसान हुआ भी है या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि रवि के ट्वीट आईपीसी (IPC) की धारा 499 के अपवादों के तहत आते हैं।

हालांकि, कोर्ट ने यह दलील खारिज कर दी और कहा कि उनके ट्वीट्स या उनके द्वारा लिखे गए आर्टिकल को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता।

प्रशांत भूषण ने की फैसले की आलोचना

वहीं, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने इस फैसले को “अन्यायपूर्ण और गलत” बताया। उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “रवि नायर दुनिया के बेहतरीन खोजी पत्रकारों में से एक हैं। उन्होंने अदाणी के खिलाफ कभी भी कोई ऐसी बात नहीं लिखी जो गलत या बिना आधार के हो। लेकिन क्या हमें हैरान होना चाहिए?”

बता दें कि प्रशांत भूषण के ट्वीट से भी ऐसा महसूस हो रहा है, जैसे वो भी मोदी सरकार को टारगेट कर रहे हैं, क्योंकि एक वकील का एक का कोर्ट के फैसले पर सवाल खड़े करना, ये एक चिंताजनक बात प्रतीत होती है।

हालांकि, प्रशांत भूषण का भी अपना इतिहास है। वो भी राजनीति के क्षेत्र से जुड़े रह चुके हैं। प्रशांत आम आदमी पार्टी से जुड़े थे लेकिन केजरीवाल की पार्टी ने उन्हें अप्रैल 2015 में पार्टी से निष्कासित (expel) कर दिया था और उनपर "घोर अनुशासनहीनता" और "पार्टी विरोधी गतिविधियों" के आरोप लगाए थे। प्रशांत पर दिल्ली चुनाव के दौरान पार्टी को हराने की कोशिश करने और अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व के खिलाफ काम करने का आरोप था। वहीं, पूर्व नेता ने अपने बचाव में कहा था कि केजरीवाल तानाशाह हैं और पार्टी अपने मूल आदर्शों से भटक गई है।

कोर्ट के फैसले पर रवि नायर का जवाब

गुजरात के कोर्ट ने रवि नायर को एक साल की सजा और 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद उनका जवाब भी सामने आया है। उन्होंने अपने X अकाउंट पर एक ट्वीट करते हुए लिखा, ''हम देखेंगे।" मतलब सीधे शब्दों में वो कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए दिखाई दे रहे हैं।

बता दें कि पत्रकार रवि नायर अक्सर ही केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ बोलते दिखाई दिए हैं। उनके X अकाउंट पर कई ऐसे पोस्ट हैं, जो बीजेपी के खिलाफ हैं। उन्होंने एक ऐसे पोस्ट को भी रीट्वीट किया है, जिसमे यह लिखा गया है कि RSS को आतंकवादी संगठन घोषित कर देना चाहिए।

 बाईं ओर चश्मा पहने प्रशांत भूषण हल्के रंग की शर्ट में दिखाई दे रहे हैं, जबकि दाईं ओर पत्रकार रवि नायर ग्रे टी-शर्ट में किताबों की अलमारी के सामने खड़े नजर आ रहे हैं।
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