अंतरराष्ट्रीय शिक्षा दिवस: 'नील बट्टे सन्नाटा' से लेकर 'आई एम कलाम' तक, शिक्षा का असली अर्थ समझाती फिल्में

अंतरराष्ट्रीय शिक्षा दिवस (International Day of Education) के अवसर पर ऐसी प्रेरणादायक फिल्मों की चर्चा करना प्रासंगिक है, जो शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाती हैं।
इस इमेज में फिल्म 'आई एम कलाम' का पोस्टर देखा जा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय शिक्षा दिवस: 'नील बट्टे सन्नाटा' से लेकर 'आई एम कलाम' तक।IANS
Author:
Published on
Updated on
3 min read

शिक्षा समाज की मजबूत नींव है, जो राष्ट्र के विकास की दिशा तय करती है। बच्चे देश का भविष्य होते हैं और शिक्षा ही वह माध्यम है, जो उन्हें बेहतर कल की ओर ले जाता है। शिक्षा किसी विशेष वर्ग की सुविधा नहीं, बल्कि हर बच्चे का मूल अधिकार है। शिक्षा के महत्व को रेखांकित करने में बॉलीवुड भी अपनी भूमिका निभाता रहा है।

अंतरराष्ट्रीय शिक्षा दिवस (International Day of Education) के अवसर पर ऐसी प्रेरणादायक फिल्मों की चर्चा करना प्रासंगिक है, जो शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाती हैं। ये फिल्में न केवल ज्ञान का महत्व समझाती हैं, बल्कि बच्चों और विद्यार्थियों के मन में सीखने की ललक और आगे बढ़ने का आत्मविश्वास भी जगाती हैं।

पहली फिल्म (Film) है आमिर खान की 'तारे जमीन पर'। ये फिल्म ना सिर्फ शिक्षा प्रणाली को चुनौती देती है, बल्कि शिक्षित करने का नया तरीका भी सिखाती है। फिल्म में ईशान नाम के एक लड़के की कहानी है, जिसके माता-पिता उसे पढ़ाई में कमजोर प्रदर्शन के कारण बोर्डिंग स्कूल भेज देते हैं, जहां उसकी मुलाकात आमिर खान से होती है, जो बच्चे के मानसिक विकार को पहचानते हैं और माता-पिता और बच्चे दोनों का मार्गदर्शन भी करते हैं। ये फिल्म बच्चे और माता-पिता के रिश्ते को भी दिखाती है।

दूसरी फिल्म है 'नील बट्टे सन्नाटा'। स्वरा भास्कर की कॉमेडी (Comedy) लेकिन गंभीर शिक्षा के विषय पर बनी फिल्म नील बट्टा सन्नाटा को बॉक्स ऑफिस पर अच्छा रिस्पांस मिला था और वैश्विक स्तर पर फिल्म को 'द न्यू क्लासमेट' के नाम से रिलीज किया था। फिल्म एक मां-बेटी की जोड़ी पर बनी है। मां अपनी बेटी को पढ़ाना चाहती है लेकिन खुद घरों में घरेलू नौकरानी का काम करती है। अपनी बेटी को शिक्षा के लिए प्रेरित करने के लिए मां बेटी की कक्षा में दाखिला ले लेती है और शर्त रखती है कि अगर वो उससे ज्यादा नंबर लेकर आएगी तो वो खुद स्कूल छोड़ देगी।

तीसरी फिल्म है 'चॉक एंड डस्टर'। फिल्म में शबाना आज़मी और जूही चावला मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म टीचर और छात्रों के बीच के खास रिश्ते को दिखाती है। फिल्म की कहानी दो शिक्षिकाओं विद्या और ज्योति के जीवन पर आधारित है, जिनके अंदर पढ़ाने का जुनून है और इसी जुनून के साथ वे स्कूली छात्रों के जीवन में आने वाली हर परेशानी का हल निकालने में उनकी मदद करती हैं।

वहीं, शाहिद कपूर अभिनीत फिल्म 'पाठशाला' आज की शिक्षा व्यवस्था की सच्चाई को प्रभावी ढंग से सामने रखती है। फिल्म शिक्षा के साथ यह भी दिखाती है कि स्कूल प्रबंधन का ध्यान मुनाफा कमाने पर अधिक केंद्रित हो गया है। फिल्म की कहानी में शाहिद कपूर एक शिक्षक की भूमिका में नजर आते हैं, जो छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय हो जाते हैं। फिल्म में निजी स्कूलों के बढ़ते व्यवसायीकरण, शिक्षा के निजीकरण और प्रबंधन की मनमानी जैसे गंभीर मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया है।

साल 2011 में आई फिल्म 'आई एम कलाम' शिक्षा के क्षेत्र की सबसे बड़ी फिल्म रही है। फिल्म में किसी बड़े स्टार को कास्ट नहीं किया गया है लेकिन फिर भी कहानी आपके दिल को छू लेगी। फिल्म की कहानी एक गरीब राजस्थानी बच्चे की है, जो भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से प्रेरित होकर शिक्षा के पथ पर निकल पड़ता है। इसके अलावा, 'फालतू', 'चल चलें', 'आरक्षण', '12वीं फेल', 'कोटा फैक्ट्री', और 'थ्री इडियट्स' जैसी फिल्मों को भी नहीं बुलाया जा सकता है। ये फिल्में शिक्षा को महत्व देने के साथ समाज को बदलने की ताकत रखती हैं।

(PO)

इस इमेज में फिल्म 'आई एम कलाम' का पोस्टर देखा जा सकता है।
जानिए कौन हैं स्टेडियम में कुत्ता घुमाने वाले संजीव खिरवार? सरकार ने MCD में सौंपी बड़े पद की जिम्मेदारी

Related Stories

No stories found.
logo
www.newsgram.in