

भारत में 16 से 20 फरवरी 2026 तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता सम्मेलन (AI Summit) का आयोजन Bharat Mandapam, नई दिल्ली में किया गया। इस सम्मेलन के ज़रिए भारत ने वैश्विक स्तर पर AI नेतृत्व और तकनीकी सहयोग का संदेश दिया।
रोबोट विवाद में घिरा गलगोटिया विश्वविद्यालय: सम्मेलन के दौरान Galgotias University पर आरोप लगा कि उसने प्रदर्शनी में एक रोबोट को अपनी यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित बताकर पेश किया और उस पर 3 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का दावा किया। बाद में जाँच में सामने आया कि यह रोबोट चीन से आयातित था, जिसके बाद यूनिवर्सिटी को सफाई देनी पड़ी।
पहले भी 2020 का ताली-थाली वाला विवादित रिसर्च पेपर, फीस दबाव और अन्य मामलों में विश्वविद्यालय आलोचना झेल चुका है।
भारत में 16 से 20 फरवरी 2026 तक के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता सम्मेलन (India AI Impact Summit 2026) का आयोजन किया गया है। यह सम्मेलन दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया गया है। इस सम्मेलन का संदेश वैश्विक स्तर पर जा रहा है। इसी बीच गलगोटिया यूनिवर्सिटी के कारनामे ने लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया। गलगोटिया यूनिवर्सिटी की तरफ से एक रोबोट के निर्माण के झूठे दावे ने सभी को चौंका दिया। यह पहली बार नहीं है जब गलगोटिया विश्वविद्यालय के कारनामे जनता के समक्ष आए हैं। इसके पहले भी गलगोटिया विश्वविद्यालय की तरफ से कुछ ऐसे कार्य किए गए हैं जिनकी वजह से ये विश्वविद्यालय चर्चा का विषय बना रहा-
दरअसल, गलगोटिया यूनिवर्सिटी की तरफ से भारत मंडपम के प्रदर्शनी में एक रोबोट को अपनी यूनिवर्सिटी के माध्यम से विकसित करने का दावा किया गया। उनके द्वारा कहा गया कि इस रोबोट को बनाने में 300 करोड़ से ज्यादा पैसा खर्च किया गया। जब यह बात सार्वजनिक हुई तो खोजबीन करने के बाद पता चला कि यह रोबोट (Robot) चीन से मंगाया गया था। बाद में जब मामला तेजी से फैलने लगा और सब जगह यूनिवर्सिटी की बेइज्जती होने लगी, तो फिर गलगोटिया यूनिवर्सिटी की तरफ से कहा गया कि इस रोबोट को विकसित करने का दावा यूनिवर्सिटी की तरफ से नहीं किया गया है।
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साल 2024 की घटना
गलगोटिया यूनिवर्सिटी (University) का यह पहला मामला नहीं है जब इसकी बेइज्जती हो रही है। साल 2024 में गलगोटिया यूनिवर्सिटी के छात्रों ने वेल्थ डिस्ट्रिब्यूशन और इनहेरिटेंस टैक्स के मुद्दे पर काँग्रेस मुख्यालय का घेराव किया था। उस समय भी इस यूनिवर्सिटी का काफी मज़ाक बना था। उस समय गलगोटिया यूनिवर्सिटी के छात्रों से जब उनके हाथ में लिए पोस्टर के बारे में पूछा गया तो छात्रों का जवाब बड़ा ही हास्यास्पद था। उनको उस समय मुद्दे की बिल्कुल जानकारी नहीं थी और वो प्रदर्शन कर रहे थे।
ताली और थाली से कोरोना भगाने पर रिसर्च
साल 2020 में जब कोरोना था तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने देश की जनता से ताली और थाली बजाने का आह्वान किया था। पूरा देश उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर ताली और थाली बजा रहा था। गलगोटिया यूनिवर्सिटी की तरफ से इस पर रिसर्च किया गया। यूनिवर्सिटी ने उस समय यह बताने का प्रयास किया कि ताली और थाली बजाने से कोरोना भाग जाएगा । गलगोटिया यूनिवर्सिटी की तरफ से बाकायदा इसका एक रेसर्च पेपर भी साल 2020 में प्रकाशित किया गया था। बाद में इस रेसर्च पेपर की काफी आलोचना की गई। इसके बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी की तरफ से इस रेसर्च पेपर को भी वापस लेना पड़ा।
कोरोना काल में जबरदस्ती फीस वसूली
जब देश में कोरोना (Covid-19) का कहर था उस समय गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने अपने छात्रों के ऊपर फीस जमा करने का दबाव बनाया। उस समय पूरे देश में सभी लोग आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे। छात्रों के घर वाले भी परेशान थे, बाद मे छात्रों ने धरना प्रदर्शन किया तो यूनिवर्सिटी ने अपना निर्णय वापस ले लिया।
गलगोटिया यूनिवर्सिटी में अश्लील प्रदर्शन पर सवाल
दरअसल, जब से गलगोटिया यूनिवर्सिटी (Galgotias University) का कृतिम बुद्धिमत्ता सम्मेलन (India AI Impact Summit 2026) वाला मामला प्रकाश में आया है, लोगों ने इसके कैंपस के कार्यक्रमों में अश्लील डांस का हवाला देकर यूनिवर्सिटी को फिर से घेर लिया है। हाल ही में 2025 के फ़ेयरवेल पार्टी का एक डांस गलगोटिया यूनिवर्सिटी से वायरल हुआ था। लोगों का कहना था कि यह एक अश्लीलता भरा डांस था।
बता दें कि दिल्ली के आसपास नोएडा (NOIDA) क्षेत्र में बहुत सारी प्राइवेट यूनिवर्सिटी हैं। इन सभी में सांस्कृतिक कार्यक्रम के नाम पर जब कोई आयोजन होता है तो बहुत सारे अश्लील डांस के वीडियो वायरल होते रहते हैं, जिनपर जनता की तरफ से नकारात्मक प्रतिक्रिया भी देखने को मिलती है।