देवभूमि में ‘मुस्लिम यूनिवर्सिटी’ का वादा ! 20 एकड़ जमीन की कहानी से उत्तराखंड में उठा बड़ा सियासी तूफान!
जमीन आवंटन और हाईकोर्ट का आदेश : साल 2004 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी की सरकार के दौरान शेख-उल-हिंद एजुकेशन चैरिटेबल ट्रस्ट को देहरादून के धौलास क्षेत्र में 20 एकड़ कृषि भूमि इस्लामिक शिक्षण संस्थान खोलने के उद्देश्य से दी गई थी। यह जमीन इंडियन मिलिट्री अकादमी (IMA) के पास स्थित है।
आरोप: आरोप है कि ट्रस्ट ने रईस अहमद को मुख्तारनामा (पावर ऑफ अटॉर्नी) देकर जमीन के छोटे-छोटे टुकड़े अलग-अलग लोगों को बेच दिए और उनका दाखिल-खारिज भी कर दिया गया।
राजनीतिक घमासान और आरोप-प्रत्यारोप :मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की जनसांख्यिकी (डेमोग्राफी) बदलने की किसी भी साजिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा और मामले की रिपोर्ट मांगी गई है।
देवभूमि कही जाने वाली उत्तराखंड में पिछले कुछ समय से सियासी पारा चरम पर है। उत्तराखंड में साल 2027 में विधानसभा का चुनाव है। साल 2022 में हुए अंकिता भंडारी मामले में कांग्रेस, भाजपा को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है । वहीं अब उत्तराखंड में एक पुराना विवाद फिर से जाग उठा है। खबर है कि साल 2004 में नारायण दत्त तिवारी की सरकार में, मुस्लिम विश्वविद्यालय खोलने के लिए, उत्तराखंड के धौलास में मुस्लिम ट्रस्ट को जमीन दी गई थी। अब यह जमीन उत्तराखंड की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।
क्या है पूरा मामला
दरसअल, साल 2004 में कांग्रेस की तरफ से नारायण दत्त तिवारी मुख्यमंत्री थे। उनके शासन काल में मुस्लिम ट्रस्ट जिसका नाम शेख-उल-हिंद एजुकेशन चेरिटेबल ट्रस्ट (Sheikh Ul Hind Educational And Welfare Trust) है, को इस्लामिक शिक्षण संस्थान खोलने के नाम पर जमीन दी गई थी। इस कार्य के लिए ट्रस्ट को 20 एकड़ भूमि ग्राम हरियावाला धौलास पछुवा दून परगना विकासनगर देहरादून में धारित भूमि किसानों से लेकर दी गई थी। बता दें कि यह जमीन उत्तराखंड में इंडियन मिलिट्री अकादमी (IMA) के पास में ही है। इंडियन मिलिट्री अकादमी में भारतीय सैन्य अधिकारीयों को प्रशिक्षण दिया जाता है। जब यहाँ की जमीन पर मुस्लिम ट्रस्ट ने शिक्षण संस्थान खोलने के लिए कदम बढ़ाया तो बाद में इंडियन मिलिट्री अकादमी की तरफ से इस मामले की शिकायत कांग्रेस के नारायण दत्त तिवारी सरकार के पास पहुंची। यह मामला कुछ दिनों तक शांत रहा। साल 2007 में शेख-उल-हिंद एजुकेशन चेरिटेबल ट्रस्ट (Sheikh Ul Hind Educational And Welfare Trust) की तरफ से उत्तराखंड उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी।
उत्तराखंड उच्च न्यायलय ने, शेख-उल-हिंद एजुकेशन चेरिटेबल ट्रस्ट बनाम उत्तरांचल राज्य वाद में 8 जून 2010 को यह आदेश दिया, कि उक्त जमीन पर किसी भी प्रकार का गैर-कृषि कार्य नहीं किया जा सकता है। न्यायालय ने यह आदेश दिया था कि ट्रस्ट उक्त जमीन को सिर्फ कृषि कार्य हेतु उपयोग कर सकती है या फिर अगर बेचना भी हो तो केवल कृषि कार्य हेतु ही बेचा जा सकता है।
क्या जमीन का प्रयोग मुस्लिमों को बसाने के लिए हो रहा ?
बता दें कि शेख-उल-हिंद एजुकेशन चेरिटेबल ट्रस्ट की तरफ से रईस अहमद के नाम मुख्तारनामा किया गया। आरोप यह लगाया जा रहा कि उच्च न्यायलय के निर्देश के बावजूद, जमीन मुस्लिम लोगों को बेचीं जा रही है और यहाँ मुस्लिम समुदाय को बसाने की कोशिश हो रही है। उत्तराखंड के देहरादून जिले के साहसपुर (Sahaspur) ब्लॉक में हरियाला वाला (Haria Wala Kalan) गाँव की प्रधान रजनी देवी ने इस मामले से सम्बंधित शिकायत पुलिस के पास दर्ज़ कराई थी।
जानकारी के अनुसार, वीर सिंह पुंडीर, मंगत राम,कला चंद, हितेंद्र नारायण, महेंद्र सिंह, रणबीर सिंह, लक्ष्मी थापा, कुंती देवी, विक्रम सिंह, बीना ठाकुर, चरण सिंह, सत्येंद्र कुमार, बलवीर सिंह, मदन सिंह, भगवान सिंह, आलोक कुमार, मनजीत सिंह, संदीप कुमार, धर्म सिंह, गुलाब सिंह, रतन देई, जोगेंद्र सिंह आदि किसानों से 20 एकड़ कृषि भूमि ली गई थी। आरोप है कि मंजर आलम, शहजाद अली, आसिफ, ताहिर खान, अमजद अली, मोहम्मद तारिक, साहिल अहमद, मोहम्मद इरशाद, शहजाद अली, सलीम अहमद, नवाब नसीम, मोहम्मद शोएब आदि के नाम भूमि बिक्री के बाद दाखिल खारिज भी हो चुका है।
वहीं डीएम सविन बंसल के अनुसार शेख-उल-हिंद एजुकेशन चेरिटेबल ट्रस्ट (Sheikh Ul Hind Educational And Welfare Trust) ने अब तक 15 व्यक्तयों को जमीन के बहुत सारे टुकड़े बेचें हैं। उन्होंने आगे कहा कि जमीन के छोटे-छोटे टुकड़े को विशेष समुदाय को बेचा गया है।
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राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
यह मामला उत्तराखंड के राजनीति में बहस का मुद्दा बन चुका है। पिछले बार साल 2022 में उत्तरखंड चुनाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अकील अहमद ने यह बयान दिया था, कि सरकार बनने पर मुस्लिम विश्वविद्यालय बनाया जाएगा। उस समय चुनाव में इसका काफी असर भी देखने को मिला । चुनाव में पूरी तरीके से राजनीतिक ध्रुवीकरण हो चुका था। इसका खामियाज़ा कांग्रेस को चुनाव में करारी हार के रूप में भुगतना पड़ा। वहीं कांग्रेस ने अकील अहमद को पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर रखा है।
उत्तराखंड(Uttrakhand) के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि किसी भी हालत में उत्तराखंड की डेमोग्राफी को बदलने वाली साज़िश को कामयाब नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा, यह बहुत ही गंभीर विषय है, मामले से सम्बंधित रिपोर्ट जिला प्रशासन से माँगा गया है।
वहीं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत (Harish Rawat) ने कहा है कि यह मामला साल 2004 का है। इतने पुराने मामले को सिर्फ चुनावी फायदा लेने के लिए उछाला जा रहा है। उत्तराखंड में भाजपा की सरकार साल 2017 से लगातार रही है। अगर ऐसा कोई मामला है तो फिर सरकार के द्वारा अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई है। उत्तराखंड में चुनाव होने वाला है, इसलिए भाजपा (BJP) इस पुराने मुद्दे को फिर से उछालने का प्रयास कर रही है।

