

शादी से पहले होने वाली “दूध पिलाई” रस्म को कुछ क्षेत्रों में माँ के अंतिम स्नेह, संस्कार और नई जिम्मेदारियों की याद दिलाने वाले प्रतीक के रूप में निभाया जाता है।
इस परंपरा को लेकर पौराणिक कथाएँ प्रचलित हैं, जिनमें इसे धर्म, शक्ति, कर्तव्य और त्याग से जोड़ा जाता है।
यह रस्म आज भी उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और हरियाणा के कुछ ग्रामीण इलाकों में प्रचलित बताई जाती है, हालांकि इसे लेकर बहस भी होती रहती है।
भारत में इन दिनों 'लगन' अर्थात शादी का माहौल खूब चल रहा है। भारत में शादी मतलब पूरा मनोरंजन। दोस्त यार से लेकर रिश्तेदार तक इसी इंतजार में रहते हैं कि कब किसी शादी में जाने का मौका मिले और पूरा परिवार एकत्रित होकर मजे करे। अगर आप भारत की शादियों को देखेंगे, तो यहाँ भिन्न-भिन्न प्रकार की परंपराएं और रीति-रिवाज हैं।
हर संस्कृति के अपने अलग-अलग रीति-रिवाज़ होते हैं। हालांकि, कुछ भारतीय परंपराएँ ऐसी भी हैं जिन पर अक्सर लोग बहस करते हैं। ऐसी ही एक परंपरा है जिसमें शादी के दिन माँ अपने बड़े हो चुके बेटे को स्तनपान कराने की रस्म निभाती है। जी हाँ, भारत के कुछ हिस्सों में इसका पालन किया जाता है। क्या है पूरा मामला, इसे समझते हैं।
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें देखा जा रहा है कि शादी की बारात निकलने से पहले एक माँ अपने बेटे को स्तनपान कराने की रस्म निभा रही है। वीडियो में माँ ने सिर ढका हुआ है और वह अपनी ब्लाउज उठाकर अपने बेटे को दूध पिलाने की रस्म करती नजर आती है। बेटा शादी के कपड़ों में सजा हुआ है। यह रस्म मेहमानों के सामने और कैमरों की मौजूदगी में की जाती है।
बता दें कि यह एक परंपरा है, जो राजस्थान की शादियों में होने वाली “दूध पिलाई” रस्म बताई जाती है। कहा जाता है कि इसे शादी से पहले माँ के आख़िरी स्नेह और पालन-पोषण के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। यह रस्म मेहमानों के सामने की जाती है ताकि परिवार का अपनापन और रिश्ता सबके साथ साझा किया जा सके। हालांकि, इस रस्म को लेकर कई प्रकार की कहानियां और दन्त कथाएं हैं, जो काफी चर्चित हैं।
बारात निकलने से पहले एक माँ अपने बेटे को दूध क्यों पिलाती है, इसकी कुछ दन्त कहानियां भी हैं, जो त्रेता युग और द्वापर युग से जुड़ी बताई जाती हैं। इसका जिक्र आज हम करते हैं।
1. पहली कथा दूध का कर्ज और धर्म से जुड़ा है। पौराणिक काल से ही यह माना जाता है कि माँ का दूध पिलाना सबसे बड़ा 'संस्कार' है। ऐसा माना जाता है कि बारात निकलने से पहले माँ अपने बेटे को याद दिलाती है कि शादी के बाद नई जिम्मेदारियाँ आएँगी, तो अपने धर्म का पालन करना है और वहां उन सस्कारों से मुंह नहीं मोड़ना है, जो उसे पालन पोषण के समय दिए गए थे। वहीं, कुछ कथाओं में इसे विजय और सौभाग्य का प्रतीक माना गया है।
2. दूसरी कथा माता सुमित्रा और लक्ष्मण की है। ये कथा रामायण युग से जुड़ी है। कहा जाता है कि जब भगवान राम 14 वर्ष के लिए वनवास जा रहे थे, तब माता सुमित्रा ने उन्हें अपना दूध पिलाकर विदा किया था। मान्यताओं के अनुसार माता सुमित्रा ने लक्ष्मण को यह याद दिलाया था कि इस दूध ने उन्हें शक्ति दी है, तो इसका इस्तेमाल उन्हें अपने भाई-भाई (राम-सीता) की सुरक्षा में करना है।
3. तीसरा कथा महाभारत काल में सुनने को मिलती है। कहा जाता है कि भीष्म पितामह (देवव्रत) के पिता राजा शांतनु जब सत्यवती से विवाह करना चाहते थे, तब सत्यवती के पिता ने शर्त रखी कि राज्य केवल सत्यवती की संतान को मिलेगा। इसके बाद देवव्रत ने भीष्म प्रतिज्ञा ली। इसलिए ऐसा कहा जाता है कि यह प्रतिज्ञा उस 'दूध' के प्रभाव से थी जो उन्होंने अपनी माता से प्राप्त किया था। भीष्म ने अपनी प्रतिज्ञा भी निभाई और सत्यवती की संतान को ही राज्य सौंपा।
दुनिया इस समय 21वीं सदी में चल रही है और भारत समेत पूरी दुनिया टेक्नोलॉजी के मामले में आगे बढ़ रही है, तो ऐसे में सवाल है कि आज भी ये प्रथा कहाँ-कहाँ चल रही है। तो भारत में आज भी ये प्रथा कुछ-कुछ राज्यों में चल रही है। इसमें उत्तर प्रदेश और बिहार है जहाँ लगभग सभी जातियों- ब्राह्मण, क्षत्रिय, भूमिहार, यादव आदि में यह प्रथा निभाई जाती है। इसके साथ ही राजस्थान, मध्य प्रदेश और हरियाणा के ग्रामीण इलाकों में भी यह परंपरा आज भी बहुत मजबूती से जुड़ी हुई है।