IAS की कुर्सी से जेल की सलाखों तक...सुबोध अग्रवाल के 960 करोड़ वाले घोटाले की पूरी इनसाइड स्टोरी

भारत में घोटाले करना आम बात हो गई है। हैरानी की बात है कि आज के समय में नेताओं से ज्यादा सरकारी अफसर घोटाले करने पर उतारू हो गए हैं। 6 अप्रैल 2026 को बिहार से SDPO गौतम कुमार के पास से 80 करोड़ की सम्पति मिली है।
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राजस्थान में जल जीवन मिशन घोटाले के मामले में फरार चल रहे पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को एंटी करप्शन ब्यूरो ने गिरफ्तार कर लिया है।X
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भारत में घोटाले करना आम बात हो गई है। हैरानी की बात है कि आज के समय में नेताओं से ज्यादा सरकारी अफसर घोटाले करने पर उतारू हो गए हैं। 6 अप्रैल 2026 को बिहार से SDPO गौतम कुमार के पास से 80 करोड़ की सम्पति मिली है। काला धन को सफ़ेद करने के लिए इस अफसर ने पैसों को अपनी बीवी, गर्लफ्रेंड और नौकरानी के बीच बांट रखा था। अब इसी बीच राजस्थान से भी एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। ये मामला जल जीवन मिशन से जुड़ा है। इस पूर्व IAS अफसर को एंटी करप्शन ब्यूरो ने दिल्ली से गिरफ्तार किया है। क्या है पूरा मामला, आइये समझते हैं।

सुबोध अग्रवाल हुए गिरफ्तार

राजस्थान में जल जीवन मिशन घोटाले के मामले में फरार चल रहे पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल (Subodh Agarwal) को एंटी करप्शन ब्यूरो ने गिरफ्तार कर लिया है। ACB की टीम सुबोध अग्रवाल को दिल्ली से जयपुर लेकर आई, जहां एसीबी मुख्यालय में डीआईजी ओम प्रकाश मीणा ने उनसे पूछताछ की। इससे पहले जल जीवन मिशन घोटाले में उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा चुका था। इसी मामले में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के नौ अधिकारियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी पर ACB महानिदेशक का बयान

ACB के महानिदेशक गोविन्द गुप्ता ने बताया कि 2024 में शुरू हुई जांच में अब तक 11 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि तीन अन्य अभी भी फरार हैं। उनके अनुसार, इस घोटाले में टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। गणपति ट्यूबवेल और श्याम ट्यूबवेल जैसी कंपनियों ने कथित तौर पर फर्जी प्रमाण पत्र देकर ठेके हासिल किए। अधिकारियों को इन गड़बड़ियों की जानकारी होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसके चलते करीब 900 करोड़ रुपए के टेंडर कुछ चुनिंदा कंपनियों को दिए गए। इसके अलावा 50 करोड़ रुपए से अधिक के प्रोजेक्ट्स के लिए अनिवार्य साइट निरीक्षण भी नहीं किया गया, जो पद के दुरुपयोग को दर्शाता है।

15 जगहों पर हुई थी छापेमारी

गौरतलब है कि 17 फरवरी को ACB ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए राजस्थान के जयपुर, बाड़मेर, जालोर, सीकर समेत बिहार, झारखंड और दिल्ली में 15 स्थानों पर छापेमारी की थी। जांच में फर्जी बिलिंग, वित्तीय गड़बड़ियां और टेंडर प्रक्रिया में गंभीर नियमों के उल्लंघन सामने आए थे।

उसी दिन अग्रवाल के ठिकाने पर भी छापा मारा गया, जिसमें पीएचईडी के नौ अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ 18 फरवरी को लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया था, जिसके बाद वे कई हफ्तों तक फरार रहे और अब जाकर गिरफ्तार हुए हैं। जाँच में पता चला कि सुबोध अग्रवाल उस समय पीएचईडी में अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर कार्यरत थे, जब यह कथित घोटाला हुआ।

960 करोड़ का है घोटाला

ACB यानी एंटी करप्शन ब्यूरो के अनुसार, अग्रवाल और अन्य आरोपियों ने करीब 960 करोड़ रुपए के फर्जी कंप्लीशन सर्टिफिकेट जमा कर ठेके हासिल किए, जिससे करोड़ों रुपये के गबन का मामला सामने आया है। फरवरी 2026 में एसीबी ने इस मामले में वरिष्ठ इंजीनियरों और रिटायर्ड अधिकारियों सहित नौ लोगों को गिरफ्तार किया था। बता दें कि केंद्र सरकार ने 2019 में जल जीवन मिशन योजना शुरू की थी, जिसका उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक पाइपलाइन के जरिए स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है।

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