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आज कल बिहार (Bihar) में बहार बहुत है लेकिन नीतीश कुमार की नहीं बल्कि घूसखोर अधिकारियों की। बिहार किसी मामले में नंबर 1 हो या ना हो लेकिन सरकारी बाबुओं के घूस लेने के मामले में हमेशा अव्वल नंबर पर रहता है। आलम तो ये है कि आज के समय में बिहार भ्रष्टाचारियों का गढ़ कहा जाने लगा है। इसी बीच एक खबर सामने आई है, जिसने एक बार फिर बिहार के भ्रष्ट अधिकारियों की पोल खोल दी है। क्या है पूरा मामला आइये समझते हैं।
मामला 31 मार्च 2026 का है, जब बिहार (Bihar) की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में कार्यवाई की। ये कार्यवाई किशनगंज के अनुमंडल पुलिस अधिकारी (SDPO) गौतम कुमार (Gautam Kumar) के खिलाफ हुई। इसके बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से उनके कर्तव्यों से मुक्त कर दिया गया।
उन्हें पुलिस मुख्यालय में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया और 'पोस्टिंग का इंतजार' वाले दर्जे पर रखा गया है। पुलिस मुख्यालय ने किशनगंज सदर-2 के SDPO को इस पद का अतिरिक्त प्रभार भी सौंप दिया। यह कार्रवाई 31 मार्च को आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की ओर से अधिकारी से जुड़े छह ठिकानों पर की गई छापेमारी के बाद की गई है।
इस अभियान के दौरान, अधिकारियों को कथित तौर पर गौतम कुमार (Gautam Kumar), उनकी पत्नी, सास, नौकरानी और मुस्लिम गर्लफ्रेंड के नाम पर पंजीकृत करोड़ों रुपये की संपत्ति मिली। शुरुआती जांच के अनुसार, अधिकारी पर आरोप है कि उन्होंने अपनी सेवा अवधि के दौरान लगभग 80 करोड़ रुपये की संपत्ति जमा की है।
गौतम की पत्नी का नाम रूबी है, जो पेशे से शिक्षिका हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक वो 35 लाख की थार से स्कूल जाती थीं। साथ ही गौतम की गर्लफ्रेंड, जिसका नाम शगुफ्ता शमीम बताया जा रहा है, उसके पास से ₹60 लाख के जेवर और 7 कीमती प्लॉट के दस्तावेज मिले हैं।
वहीं, सबसे हैरान करने वाली जानकारी यह है कि गौतम कुमार की नौकरानी पारो को लेकर यह कहा जा रहा है कि वो थार और बुलेट जैसी गाड़ियों का शौक रखती थी। उसके पास बंगाल में 1 करोड़ का आलिशान बंगला भी है। पूर्व SDPO इनके जरिये ही अपनी काली कमाई को सफ़ेद करने में जुटा था।
गौरतलब है कि EOU पुलिस स्टेशन में 29 मार्च को बीएनएस 2023 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था। शुरूआती जाँच में पता चला कि गौतम कुमार (Gautam Kumar) ने करोड़ों रुपये की संपत्ति जमा की है। इसी आधार पर, EOU की टीमों ने मंगलवार को पटना, पूर्णिया और किशनगंज में उनसे जुड़े छह ठिकानों पर छापेमारी शुरू की।
गौतम कुमार (Gautam Kumar) की बात करें तो वो 1994 में सब-इंस्पेक्टर के तौर पर पुलिस बल में शामिल हुए थे और बाद में उन्हें पुलिस उपाधीक्षक (DSP) के पद पर पदोन्नत किया गया। उन्होंने अररिया, किशनगंज और पूर्णिया क्षेत्रों में लंबे समय तक सेवा दी है।
आर्थिक अपराध इकाई की इस बड़े पैमाने की कार्रवाई से पूरे पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। वहीं, अधिकारियों ने संकेत दिया है कि इस मामले में आगे की जांच जारी है और नतीजों के आधार पर और भी कार्रवाई की जा सकती है।
आपको बता दें कि EOU ने पुलिस स्टेशन में 29 मार्च को भी छापेमारी की थी। उस मामले में, वैभव कुमार पर लगभग 2.41 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति रखने का आरोप है। जांच में पता चला कि यह राशि उनकी ज्ञात आय से लगभग 78.03 प्रतिशत अधिक है, जिसके चलते सहरसा और मुजफ्फरपुर में छह ठिकानों पर छापेमारी की गई।
वहीं, इससे पहले जनवरी 2026 में नवादा जिले के अकबरपुर थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार को निगरानी विभाग की टीम ने ₹25,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।
इसके साथ ही अक्टूबर 2022 में शराब माफिया केस से बचने के लिए निलंबित IPS आदित्य कुमार ने अपने दोस्त से पटना हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनकर DGP को फर्जी कॉल करवाया। EOU ने जालसाजी और ₹1.37 करोड़ की अवैध संपत्ति का केस दर्ज किया, तब जाकर दिसंबर 2023 में उन्होंने सरेंडर किया।