

दिल्ली में प्राइवेट स्कूलों (Delhi Private Schools) की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है। शिक्षा विभाग को लगातार मिल रही शिकायतों के बीच ताजा मामला मयूर विहार फेज-3 (Mayur Vihar Phase-3) के सलवान पब्लिक स्कूल (Salwan Public School) का है, जहाँ फीस बढ़ोत्तरी को लेकर छात्रों के माँ-बाप में गुस्सा देखने को मिल रहा है। पेरेंट्स द्वारा विभाग को भेजी गई शिकायत के अनुसार, स्कूल प्रशासन ने महज एक साल के भीतर ही फीस में करीब 57 फीसदी की बेतहाशा बढ़ोतरी कर दी है।
अप्रैल से शुरू होने वाले नए सत्र (new session) के लिए स्कूल प्रशासन (school administration) ने पेरेंट्स को भेजे सर्कुलर में फीस में कुल 82 फीसदी की भारी-भरकम बढ़ोतरी का खुला एलान किया है। गौर करने वाली बात यह है कि इसमें से 57 फीसदी की बेतहाशा वृद्धि तो पहले ही थोपी जा चुकी है, जबकि शेष 25 फीसदी का अतिरिक्त बोझ आने वाले समय में पेरेंट्स पर डालने की पूरी तैयारी कर ली गई है।
स्कूल प्रशासन की इस खुली मनमानी के खिलाफ बड़ी संख्या में लामबंद हुए पेरेंट्स ने डिप्टी डायरेक्टर (एजुकेशन, जोन 2) (Deputy Director) को लिखित आवेदन सौंपकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। पेरेंट्स ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और शिक्षा मंत्री आशीष सूद को भी ईमेल भेजकर इस मनमानी पर रोक लगाने की गुहार लगाई है। वहीं दूसरी ओर, मैनेजमेंट के खौफ का आलम यह है कि भविष्य के नुकसान से डरे-सहमे अभिभावक अपनी पहचान उजागर करने या किसी भी तरह की तस्वीरें साझा करने की हिम्मत तक नहीं जुटा पा रहे हैं।
दिल्ली में डीडीए की जमीन पर संचालित स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने पर रोक है, जिसके लिए उन्हें शिक्षा विभाग से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है। इस नियम पर दिल्ली हाई कोर्ट भी पहले अपनी मुहर लगा चुका है। हालांकि, पिछले साल स्कूलों की एक संस्था ने इस मामले को लेकर दोबारा कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और फीस वृद्धि की इजाजत माँगी, जिस पर फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं आया है। इसके बावजूद, अदालती कार्यवाही की अनदेखी करते हुए सलवान स्कूल ने फीस बढ़ोतरी का फरमान (सर्कुलर) जारी कर दिया है।
अभिभावकों का आरोप है कि जब उन्होंने विद्यालय प्रशासन से फीस वृद्धि की आधिकारिक अनुमति दिखाने की मांग की, तो मैनेजमेंट ने उन्हें स्पीड पोस्ट के माध्यम से एक नोटिस भेज दिया। इस नोटिस में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई है कि यदि स्कूल के निर्देशों का पालन नहीं किया गया, तो उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
स्कूल ने पहले भी अपनी मनमानी की कोशिश की थी, जब 22 मार्च को परिणाम घोषित होने के समय फीस न भरने वाले विद्यार्थियों को मार्कशीट देने से मना कर दिया गया था। हालांकि, अभिभावकों के कड़े विरोध और भारी संख्या में एकजुट होने के चलते स्कूल को अपना फैसला बदलना पड़ा। हंगामे और नारेबाजी की स्थिति को भांपते हुए प्रशासन ने अंततः हार मानी और सभी छात्रों की मार्कशीट जारी कर दीं।
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