

पश्चिम बंगाल के बेहाला पश्चिम विधानसभा (Behala Assembly Constituency) क्षेत्र में भाजपा कार्यालय में हंगामा और बैनर तोड़फोड़ मामले में तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार रत्ना चटर्जी (Ratna Chatterjee) के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इसके बाद रत्ना चटर्जी ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि वह उस हंगामे के समय वहां मौजूद नहीं थीं और एफआईआर का कानूनी तौर पर मुकाबला करेंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि बैनर तोड़े जाने के बाद उनके समर्थकों को हिरासत में ले लिया गया था।
इस पूरे मामले पर आईएएनएस को प्रतिक्रिया देते हुए रत्ना चटर्जी ने बताया कि वह 131वें वार्ड की पार्षद हैं और बेहाला पश्चिम समिति से टीएमसी की उम्मीदवार हैं। उनके अनुसार, जिस घटना को लेकर विवाद हुआ, उसमें उनका कोई हाथ नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले उनके पार्टी का बैनर फाड़कर फेंक दिया गया था। जब उन्हें इसकी जानकारी मिली तो वह मौके पर पहुंचीं और देखा कि बैनर क्षतिग्रस्त किया गया है। इस घटना के बाद टीएमसी कार्यकर्ताओं में नाराजगी फैल गई और बड़ी संख्या में समर्थक वहां जमा हो गए। इसी दौरान कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी के कार्यालय में लगे बैनर को भी नुकसान पहुंचाया गया।
रत्ना चटर्जी ने आगे कहा कि उन्हें बाद में पता चला कि इस घटना के सिलसिले में टीएमसी के कुछ कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। वह अपने समर्थकों की रिहाई के लिए थाने भी गई थीं। उन्होंने दावा किया कि पुलिस द्वारा प्रस्तुत किए गए सीसीटीवी फुटेज में 10 किलोमीटर के दायरे में उनकी मौजूदगी नहीं दिखती। इसके बावजूद उनका नाम एफआईआर में शामिल किया गया है, जो पूरी तरह से गलत है।
इस बीच महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी टीएमसी नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई है। मालदा से टीएमसी की वरिष्ठ नेता मौसम नूर ने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करते हुए इसे आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने इस विधेयक को पेश करने का श्रेय सोनिया गांधी को दिया और कहा कि यह केवल चुनावी मुद्दा बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे वास्तविक रूप से लागू किया जाना चाहिए।
मौसम नूर ने आईएएनएस से कहा कि एक महिला होने के नाते वह इस बिल का समर्थन करती हैं। उन्होंने याद दिलाया कि यह विधेयक राज्यसभा से भी पारित हो चुका है, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है। उनके अनुसार, चुनावी माहौल के कारण ही प्रधानमंत्री इस मुद्दे को उठा रहे हैं, लेकिन जब तक इसे जमीन पर लागू नहीं किया जाएगा, तब तक यह सिर्फ एक प्रस्ताव ही बना रहेगा। उन्होंने मांग की कि इस बिल को जल्द से जल्द लागू किया जाए ताकि महिलाओं को राजनीति में अधिक अवसर मिल सकें और उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
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(यह रिपोर्ट IANS न्यूज़ एजेंसी से स्वचालित रूप से ली गई है। न्यूज़ग्राम इस कंटेंट की कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता।)