राघव चड्ढा–केजरीवाल विवाद महज़ नाटक ! AAP पर ड्रग माफिया और फंडिंग में गड़बड़ी के आरोप, अन्ना आंदोलन से जुड़े डॉ. मुनीश कुमार रायज़ादा ने किया बड़ा खुलासा

डॉ. मुनीश रायज़ादा का आरोप: केजरीवाल–राघव विवाद महज़ नौटंकी, अन्ना आंदोलन से लेकर पार्टी फंडिंग और खालिस्तान समर्थक संगठनों से गुप्त मुलाकातों पर किए सनसनीखेज़ खुलासे
राघव चड्ढा और मुनीश रायज़ादा
अन्ना आंदोलन से जुड़े डॉ. मुनीश कुमार रायज़ादा ने दावा किया कि राघव चड्ढा–अरविंद केजरीवाल विवाद महज़ नाटक है और दोनों ‘चोर-चोर मौसेरे भाई’ हैं। X
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राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के नेताओं में जबरदस्त कहासुनी जारी है। आम आदमी पार्टी द्वारा लगाए गए आरोपों पर राघव चड्ढा ने अपनी प्रतिक्रिया दे दी है। आरोप प्रत्यारोप के बीच अरविन्द केजरीवाल और राघव चड्ढा के राजनीतिक संबंधों पर चर्चा छिड़ी हुई है। कभी अरविन्द केजरीवाल के करीबी रहने वाले राघव चड्ढा आज केजरीवाल के खिलाफ खड़े हो गए। इस घटना के पीछे बहुत बड़ा कारण है। 

कैसे खास बने राघव चड्ढा ?

आम आदमी पार्टी और अन्ना आंदोलन से जुड़े बहुत सारे किस्से प्रचलित हैं, अरविन्द केजरीवाल और राघव चड्ढा को लेकर अलग-अलग बयान आया है। अन्ना आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले डॉ मुनीश कुमार रायज़ादा ने न्यूज़ग्राम पर बड़ा खुलासा किया है। डॉ रायज़ादा ने न्यूज़ग्राम से बातचीत में कहा, राघव चड्ढा अन्ना आंदोलन के प्रमुख हिस्सेदार नहीं थे। आम आदमी पार्टी बनने के बाद राघव चड्ढा का संपर्क अरविन्द केजरीवाल से हुआ। केजरीवाल राघव चड्ढा को पुत्रवत मानने लगे थे इसके पीछे उनका अपना निजी स्वार्थ छिपा था। यही वजह था कि राघव चड्ढा बहुत जल्दी आम आदमी पार्टी के कोषाध्यक्ष बन गए।

न्यूज़ग्राम से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, 2015 में  दिल्ली में केजरीवाल की सरकार बनने पर राघव चड्ढा को पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया गया। साल 2016 में पार्टी से चंदे का हिसाब राघव चड्ढा एवं अन्य द्वारा हटा दिया गया। इसके अलावा आशुतोष, अरविंद केजरीवाल, पंकज गुप्ता, राघव चड्ढा एवं अन्य नेता कनाडा पहुंचे थे। पैसा इकट्ठा करना मुख्य इरादा था इसलिए कुछ अराजक संगठनों से (खालिस्तान समर्थक संगठन) से गुपचुप मुलाकात हुई। 

2022 में आम आदमी पार्टी की सरकार पंजाब में बनी। राघव चड्ढा को भगवंत मान का सलाहकार नियुक्त किया गया। मुनीश रायज़ादा के अनुसार, पंजाब में ड्रग माफियाओं को खत्म करने के लिए आम आदमी पार्टी की तरफ से नाटक किया गया। साल 2021 में पूर्व आईपीएस कुँवर विजय प्रताप सिंह ने अरविन्द केजरीवाल का हाथ पकड़ा था। विजय 2022 में आम आदमी पार्टी से पंजाब के अमृतसर से विधायक बने। 

इसके बाद विजय प्रताप ने अपनी ही पार्टी की सरकार पर यह आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी की सरकार बनने पर ड्रग माफिया लगातार बढ़ते जा रहे हैं। मुनीश कुमार रायज़ादा कहते हैं कि ये राघव चड्ढा हो या आम आदमी पार्टी का अरविन्द केजरीवाल, ये सब केवल हावबाजी करने वाले नेता हैं। जो हाल-फिलहाल का झगड़ा शुरू हुआ है ये महज एक नाटक है क्योंकि दोनों चोर-चोर मौसेरे भाई हैं। राघव चड्ढा का जनता से कोई मतलब नहीं है। जब सरकार में थे तो दिल्ली में मोहल्ला क्लिनिक के नाम पर लोगों को मूर्ख बनाया। दिल्ली की जनता मोहल्ला क्लिनिक में इलाज कराए और राघव चड्ढा के आँख का आपरेशन लंदन में  हुआ। ये नौटंकी भारत की जनता बहुत अच्छे से समझ चुकी है। 

यह भी पढ़ें : केजरीवाल पर तानाशाही का आरोप ! सवाल पूछा तो पार्टी से होंगे बाहर, मयंक गांधी का खुलासा

बिना सिद्धांत वाली राजनीति एक पाप है !

मुनीश कुमार रायज़ादा ने न्यूज़ग्राम से बातचीत में कहा कि बिना सिद्धांत के राजनीति करना उसी तरीके से पाप है जैसे बिना ज्ञान के हथियार उठाना पाप है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी हमेशा यह बात कहते थे कि राजनीति में सिद्धांत का होना अनिवार्य है।

रायज़ादा आगे बताते हैं कि अन्ना आंदोलन के माध्यम से पूरे देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ माहौल खड़ा किया गया। पारदर्शिता और अच्छी व्यवस्था की उम्मीद से दिल्ली की जनता ने आम आदमी पार्टी को विकल्प के रूप में देखा था लेकिन भ्रष्टाचार के दलदल में आम आदमी पार्टी फंसती चली गई। अब इस पार्टी को राजनीतिक अभिशाप है कि यह कभी उभर नहीं सकती क्योंकि सिद्धांतों से हमेशा के लिए भटक चुकी है। 

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डिप्टी लीडर पद गंवाने के बाद राघव चड्ढा का पलटवार: AAP पर जनता की आवाज दबाने का आरोप, पार्टी में टूट की आशंका गहराई

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