

बांदा की विशेष POCSO अदालत ने 20 फरवरी 2026 को 6 साल पुराने बाल यौन शोषण मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषी रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को फांसी की सजा दी।
आरोपी दंपति ने 2010 से 2020 के बीच 33 नाबालिग बच्चों का यौन शोषण किया। बच्चों को घर बुलाकर उनके अश्लील वीडियो बनाए गए और उन्हें पॉर्न वेबसाइट पर बेचा गया।
अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को पीड़ित परिवारों को 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया, साथ ही आरोपियों की अवैध संपत्ति पीड़ितों में बांटने को कहा।
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की विशेष अदालत ने 6 साल पुराने मामले में एक फैसला सुनाया है। अदालत ने यह फैसला 6 साल से चल रहे सीबीआई जांच के सबूतों के आधार पर सुनाया है। सीबीआई (CBI) पिछले 6 साल से लगातार इस मामले की छानबीन कर रही थी। 20 फरवरी 2026 को बांदा की विशेष POCSO अदालत ने अपने इस फैसले में दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है।
दरअसल, बांदा की विशेष POCSO अदालत में पिछले 6 साल से एक बाल यौन शोषण का मामला लंबित था। इस मामले की जांच सीबीआई (CBI) खुद कर रही थी।
मामला उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के चित्रकूट का है। रामभवन नाम के एक शख्स ने नाबालिग बच्चों का यौन शोषण किया। रामभवन सिंचाई विभाग में कार्यरत था। छोटे बच्चों को अपने घर पर, बहाने से बुलाकर उनका अश्लील वीडियो बनाकर, पॉर्न वेबसाइट को बेचता था। रामभवन के साथ उसकी पत्नी दुर्गावती भी शामिल थी। साल 2010 से लेकर 2020 के बीच दोनों दंपति साधारण रूप से रहते थे।
आसपास के बच्चों को अपने घर पर गेम खेलने या फिर किसी आयोजन का बहाना देकर बुलाते थे। अपने घर के अंदर ये दोनों पति-पत्नी बच्चों के साथ यौन शोषण करते थे। यौन शोषण करने के बाद उनका अश्लील वीडियो बना लेते थे। इसके बाद वीडियो को डार्क साइट जो कि एक पॉर्न वेबसाईट है, को बेच देते थे। यह सिलसिला करीब 10 साल से चलता रहा।
रिपोर्ट के मुताबिक, उनके इस साजिश का शिकार एक या दो नहीं बल्कि 33 बच्चे थे। उनमें से कुछ की उम्र मात्र 3 से 4 वर्ष थी। जांच में पाया गया कि बच्चों के जननांग पर चोट भी आई थी।
31 अक्टूबर 2020 को सीबीआई (CBI) के पास यह मामला दर्ज हुआ था। उनके ऊपर आरोप लगाए गए कि बाल यौन से संबंधित वीडियो का व्यापार किया जाता है। बाद में 16 नवंबर 2020 को दोनों पति-पत्नी को गिरफ्तार कर लिया गया। सीबीआई ने इस मामले की जांच शुरू कर दिया। 10 फरवरी 2021 को सीबीआई (CBI) ने आरोप पत्र दाखिल किया। इसके बाद अदालत ने उनके ऊपर आरोप को सही मानते हुए केस की सुनवाई को आगे बढ़ाया।
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लगभग 6 साल से चल रहे इस मामले की सुनवाई के क्रम में बांदा की POCSO अदालत (Court) ने 20 फरवरी 2026 को अपना अंतिम फैसला सुनाया। अपने अंतिम फैसले में अदालत ने कहा कि दोनों अपराधियों को मौत की सजा दी जाती है। अदालत ने कहा कि यह रेयरेस्ट ऑफ द रेयर केस है। इस मामले में किसी भी तरीके से भविष्य में सुधार की उम्मीद नहीं की जा सकती है। इस जघन्य अपराध के लिए अदालत ने दोनों को मौत की सजा सुना दी।
कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से पीड़ित पक्षों को 10-10 लाख रुपए देने का भी आदेश दिया है। कोर्ट ने आगे कहा कि आरोपियों के द्वारा कमाई गई अवैध संपत्ति, जो उनके घर से बरामद हुई है, सब कुछ पीड़ित परिवारों के बीच बराबर-बराबर बाँट दिया जाए।
बता दें कि बाल यौन शोषण से संबंधित मामले भारत में लगातार बढ़ते जा रहे हैं। नवीनतम नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) 2023 रिपोर्ट अनुसार, 67694 केस बच्चों के यौन शोषण से संबंधित थे, जिनको POCSO Act के तहत दर्ज किया गया था। लगातार बढ़ रहे ये मामले एक चिंता का विषय बने हुए हैं। मानवीय मूल्यों को दरकिनार करके इस तरीके के आपराधिक कृत्य में शामिल लोगों की मानसिकता को सामान्य रूप से समझ पाना मुश्किल है कि आखिर बच्चों का यौन शोषण करके समाज को क्या संदेश देना चाहते हैं।