

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6–3 के बहुमत से डोनाल्ड ट्रम्प के टैरिफ फैसले पर रोक लगाई। कोर्ट ने साफ कहा कि IEEPA कानून के तहत टैरिफ लगाकर राजस्व नहीं जुटाया जा सकता।
कोर्ट के आदेश के बाद ट्रम्प ने सभी देशों पर समान 10% ग्लोबल टैरिफ लगाने की घोषणा की।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए था। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी कौन-सी मजबूरी थी कि मोदी सरकार ने डोनाल्ड ट्रम्प से इतनी जल्दबाज़ी में व्यापार समझौता कर लिया।
डोनाल्ड ट्रम्प के टैरिफ फैसले पर अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। अमेरिका के साथ काफी लंबे समय से टैरिफ संघर्ष चला था। बाद में फरवरी 2026 में ट्रम्प ने भारत के साथ व्यापार समझौता किया। जिसके बाद लोगों को लगने लगा कि दोनों देशों के संबंध अब पहले जैसे हो जाएंगे लेकिन इसी बीच अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के टैरिफ वाले निर्णय को खारिज कर दिया है।
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट की तरफ से टैरिफ लगाए जाने के बाद से लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल ये है कि इसका असर भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए व्यापारिक समझौते पर किस प्रकार से पड़ेगा, भारत को कोई लाभ मिलेगा या नहीं। बता दें, राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में भारत के ऊपर 25 फीसदी टैरिफ लगाया।
इसके अलावा रूस (Russia) से तेल खरीदने की वजह से भारत के ऊपर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया। इस तरह कुल टैरिफ 50 फीसदी हो गया, हालांकि, भारत और अमेरिका के बीच जो हाल ही में अंतरिम व्यापार समझौता हुआ, उसमें इंडिया पर 25 फीसदी टैरिफ को घटाकर 18 फीसदी किया गया। इसके अलावा रूस से तेल खरीदने को लेकर जो 25 फीसदी टैरिफ लगाया गया था, उसे भी हटाने की बात की गई।
अब सुप्रीम कोर्ट की तरफ से जो फैसला आया, उसके बाद ट्रंप ने ग्लोबली 10 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया। इसका ये मतलब है कि अन्य देशों की तरह भारत पर भी 10 फीसदी टैरिफ लागू होगा। हालांकि, भारतीय निर्यातकों के लिए यह थोड़ी सी चिंता की बात हो सकती है, क्योंकि भारतीय निर्यात पर फिलहाल 3 फीसदी का एमएफएन लागू है। हालांकि, ट्रंप के नए टैरिफ के बाद इसमें 10 फीसदी का अलग शुल्क लागू हो सकता है।
अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया है कि शुल्क नीति यानी टैरिफ, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक रणनीति का अहम हिस्सा बना रहेगा। सर्वोच्च न्यायालय ने प्रशासन को एक विशेष कानूनी प्रावधान के तहत टैरिफ लगाने के अधिकार के उपयोग पर रोक लगा दी है। हालांकि वित्त मंत्री ने संकेत दिया कि इससे सरकार की व्यापक व्यापारिक नीति में कोई मूलभूत बदलाव नहीं आएगा।
डलास के इकोनॉमिक क्लब में बोलते हुए वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सीधे तौर पर अदालत के फैसले पर बात की। उन्होंने कहा कि छह न्यायाधीशों ने स्पष्ट रूप से फैसला सुनाया है कि आईईईपीए (IEEPA) के तहत मिलने वाले अधिकारों का इस्तेमाल एक डॉलर भी राजस्व जुटाने के लिए नहीं किया जा सकता है।
भारत में राजनीतिक प्रतिक्रिया
भारत सरकार की तरफ से आधिकारिक बयान आना अभी बाकी है। केन्द्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि इस मामले का अध्ययन किया जाएगा और फिर आधिकारिक जवाब दिया जाएगा।
वहीं भारत की तरफ से काँग्रेस पार्टी (Congress Party) के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है। उन्होंने कहा कि यह फैसला 6-3 बहुमत से आया है। इस फैसले ने ट्रम्प के पूरे निर्णय को पलट के रख दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में अभी भी चेक एण्ड बैलन्स सिस्टम काम कर रहा है।
हालांकि काँग्रेस ने इस बाबत, केंद्र की मोदी सरकार को घेरने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी।
काँग्रेस अध्यक्ष मलिकार्जुन खड़गे ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए था। आखिर मोदी की कौन-सी मजबूरी थी जिसके कारण उन्होंने इतनी जल्दी ट्रम्प से समझौता कर लिया था। उन्होंने इस मामले में एप्सटीन फ़ाइल का जिक्र करते हुए कहा कि कहीं वही फ़ाइल समझौते का कारण तो नहीं था ?
काँग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद समझौता कर चुके हैं। राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी फिर से आत्मसमर्पण करेंगे।