

UGC एक्ट से शिकायत की धमकी का दावा।
Equity Rule पर दुरुपयोग का डर।
सुप्रीम कोर्ट तक मामला, इस्तीफे शुरू।
"ठुकरा के मेरा प्यार, तू इंतकाम देखेगी" साल 2017 में शादी में जरूर आना एक फिल्म आई थी। ये उसी सिनेमा का गाना है। एक तरफा प्यार अक्सर घातक हो जाता है और इसका खामियजा, लड़का हो या लड़की दोनों को भुगतना पड़ता है। लड़का इंतकाम की आग में जलते हुए लड़की से बदला लेने की सोचता है, तो लड़की आत्महत्या जैसा कदम तक उठा लेती है।
हालांकि, क्या अपने कभी सुना है कि किसी लड़के ने एक लड़की को प्रोपोज किया और उसने UGC (University Grants Commission) के नए नियम के तहत शिकायत करने की धमकी दे दी हो। ये कुछ ऐसा ही है कि तुम मेरी नहीं हो सकती, तो मैं तुम्हें किसी और की होने नहीं दूंगा। खैर पूरा मामला क्या है? इसे समझते हैं।
सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, जिसने UGC के नए नियम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। ऑन रिकॉर्ड (On Record) नामक X हैंडल ने एक वीडियो पोस्ट किया है। इसमें बताया गया है कि दिल्ली के श्री राम कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स (Shri Ram College of Commerce) में एक लड़की ज्योति (काल्पनिक नाम) पढ़ती है।
वो इस समय अपने कोर्स के तीसरे वर्ष में है। इसी बीच होता यह है कि एक लड़का ज्योति (काल्पनिक नाम) को प्रोपोज (Propose) करता है लेकिन वो लड़के का प्रस्ताव ठुकरा देती है। लड़का दलित जाति का रहता है और लड़की जनरल कैटेगरी की है।
वीडियो में व्यक्ति बताता है कि लड़की को UGC के नए एक्ट के तहत शिकायत दर्ज करने की धमकी मिलती है। मामला ज्यादा ना बढे, इसके लिए पिता ने लड़के के परिवार के घर जाकर हाथ जोड़े और 50 हजार देकर पिंड छुड़वाता है। ऐसा कहा जा रहा है कि लड़की दिल्ली के पूर्व BJP के पार्षद की बेटी है। हालांकि, हम फ़िलहाल इस मामले की पुष्टि नहीं करते हैं।
13 जनवरी 2026 को UGC ने एक नया नियम लागू किया। इसका नाम है - 'Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations 2026'. UGC के नए नियम के मुताबिक इससे SC/ST और OBC वर्ग के छात्रों के साथ होने वाले जातिगत भेदभाव को रोका जाएगा।
इसके लिए सभी यूनिवर्सिटी, कॉलेज और उच्च शिक्षण संस्थानों को परिसर में 24x7 हेल्पलाइन, Equal Opportunity Centre, Equity Squads और Equity Committee का गठन करना होगा। इस नियम के जरिये UGC सबपर निगरानी रखेगा। अगर कोई भी संस्थान इस नियम का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है। कॉलेज की मान्यता रद्द या फंड तक रोका जा सकता है।
UGC ने ये नया नियम बना तो दिया लेकिन इससे सवर्ण समाज जो जनरल कैटेगरी में आते हैं, ये वर्ग काफी नाराज है। कई छात्र संगठन इसके विरोध में सड़कों पर उतर आए हैं। उनका कहना है कि इस नए नियम का उनके खिलाफ ग़लत उपयोग किया जा सकता है। इससे सवर्ण छात्रों के लिए भविष्य में एक खतरा बन सकता है।
सवर्ण छात्रों के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इसमें झूठी शिकायतों का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में उनके ऊपर कभी भी झूठी शिकायते दर्ज करवाकर उन्हें फंसाया जा सकता है। इस नियम में भेदभाव की परिभाषा स्पष्ट नहीं है। यह नया नियम एकतरफा है और इसका दुरूपयोग ज्यादा हो सकता है।
बता दें कि UGC के इस ने नियम को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी दी गई है। याचिकाकर्ता ने इस नियम को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है। जनहित याचिका (PIL) में यह कहा गया है कि ये नियम UGC के Equity Rule का सेक्शन 3(C) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता और व्यक्तिगत आजादी जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
UGC के इस नए नियम के विरोध में बरेली के मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री (Alankar Agnihotri) ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद ये आगे बीजेपी तक भी पहुँच गई। बताया जा रहा है कि लखनऊ में एक साथ 11 भाजपा पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया है और कहा कि पार्टी भटक रही है। सबसे पहले जिला बीजेपी के कुम्हरावां मंडल के मंडल महामंत्री अंकित तिवारी ने सभी पदों से इस्तीफा दिया। इसके बाद 10 अन्य पदाधिकारियों ने भी सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया।
इस्तीफा देने वालों की लिस्ट कुछ इस प्रकार है:-
अनूप सिंह (युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष), राज विक्रम सिंह (युवा मोर्चा मंडल महामंत्री), मोहित मिश्रा (शक्ति केंद्र संयोजक), नंद प्रकाश सिंह (शक्ति केंद्र संयोजक), नीरज पांडेय (शक्ति केंद्र संयोजक), अभिषेक अवस्थी (पूर्व मंडल मंत्री), मोहित मिश्रा (शक्ति केंद्र संयोजक), नंद प्रकाश सिंह (शक्ति केंद्र संयोजक), आलोक सिंह (मंडल उपाध्यक्ष), महावीर सिंह (मंडल मंत्री), विवेक सिंह (बूथ अध्यक्ष), और कमल सिंह (पूर्व सेक्टर संयोजक)
इन इस्तीफों से यह तो साफ़ है कि बीजेपी के ही लोग अपनी पार्टी के खिलाफ होते जा रहे हैं।