दिल्ली के सुल्तानपुरी में 128 करोड़ का सरकारी अस्पताल, खंडहर में तब्दील होकर बना भ्रष्टाचार और लापरवाही की मिसाल

सुल्तानपुरी का 525 बेड वाला सरकारी अस्पताल 6 महीने में तैयार होने का वादा, 5 साल बाद भी खंडहर; सस्ता इलाज सपना, जनता अब भी सड़कों पर इलाज को मजबूर
अस्पताल का बुरा हाल
सुल्तानपुरी का 525 बेड वाला सरकारी अस्पताल 6 महीने में तैयार होने का वादा, 5 साल बाद भी खंडहर जैसा हाल, सस्ता इलाज सपना, जनता अब भी सड़कों पर इलाज को मजबूरX
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राजधानी दिल्ली में प्राइवेट अस्पतालों की भरमार है। महंगे इलाज से निजात दिलाने के लिए सरकार द्वारा नए अस्पताल बनाने की बात हर चुनाव में कही जाती है। दिल्ली के सुल्तानपुरी में एक अस्पताल केजरीवाल सरकार के समय बनना शुरू हुआ और यह आज तक पूरा नहीं हो पाया है। इस अस्पताल के संचालन की बात तो छोड़ दीजिए यह पूरी तरह से खंडहर में तब्दील होता जा रहा है।

क्या अस्पताल का मामला ?

दरअसल, दिल्ली के सुल्तानपुरी में एक अस्पताल बनाया गया। दिल्ली सरकार की तरफ से यह वादा किया गया था कि जनता को सस्ता और मुफ़्त इलाज मुहैया कराया जाएगा। लगभग 525 बेड का यह अस्पताल साल 2021 में बनना शुरू हुआ। लगभग 5 साल पूरे होने जा रहे हैं लेकिन इस अस्पताल में इलाज शुरू नहीं हुआ। बता दें कि इस अस्पताल को बनाने में 6 महीने का वादा जनता से किया गया था। 6 महीने भी पूरे हुए और 6 साल भी पूरे होने जा रहे हैं। अभी तक अस्पताल में डाक्टरों और सुविधाओं का निर्वात है। 

खंडहर में तब्दील होते अस्पताल के लिए जिम्मेदार कौन ?

लगभग 128 करोड़ की लागत से बनाया गया यह अस्पताल भूतिया बंगला की तरह लगता है। वहाँ अस्पताल के पास जाने पर ऐसा लगता है किसी पुराने खंडहर के पास खड़े हैं। बीजेपी से पहले आम आदमी पार्टी की सरकार में यह अस्पताल बनना शुरू हुआ। दिल्ली में बीजेपी की सरकार बने एक साल पूरे हो चुके हैं। अस्पताल पर रेखा गुप्ता का ध्यान अभी तक नहीं गया है। खंडहर में तब्दील होते इस अस्पताल के लिए कौन जिम्मेदार है? सरकारी खजाने से इस तरीके से पैसा निकालकर खंडहर बनाने के लिए दिल्ली की जनता नहीं चुनती है। 

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पूर्व विधायक ने क्या कहा ?

दिल्ली में आम आदमी पार्टी से विधायक रहे संदीप चौधरी से न्यूज़ग्राम की टीम ने संपर्क किया। सुल्तानपूरी सीट से पूर्व विधायक रह चुके संदीप कुमार ने कहा कि प्रावेट अस्पताल इस काम को आगे बढ़ने नहीं देना चाहते हैं। यही कारण है कि इस सरकारी अस्पताल का काम रुका हुआ है। पहले आम आदमी पार्टी थी जिन्होंने इस काम को पूरा नहीं होने दिया और घोटाले किये जबकि वर्तमान की बीजेपी सरकार भी कोई एक्शन नहीं ले रही है।

सरकारों का यह रवैया जनता के लिए कितना नुकसानदायक है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आम जनता आज भी दिल्ली में इलाज कराने के लिए सड़कों पर कई दिन इंतजार करती है। बहुत सारी रातें सड़क पर काटना पड़ता है। पूर्व विधायक से लेकर वर्तमान विधायक तक सबके ऊपर यह सवाल बनता है कि दिल्ली की दुर्दशा कब सुधरेगी। 

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