9 साल में बनकर तैयार हुआ दिल्ली का यह भव्य अस्पताल, सरकार ने लगाए 100 करोड़, पर इलाज के लिए नहीं हैं डॉक्टर !

उद्घाटन के 9 वर्ष बीत जाने के बाद भी अब तक यह अस्पताल सुचारू रूप से चालू नहीं हुआ है l नजफगढ़ में 100 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए आरएचटीसी अस्पताल को चिकित्सकों की कमी और आवश्यक सुविधाओं के अभाव का सामना करना पड़ रहा है।
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उद्घाटन के 9 वर्ष बीत जाने के बाद भी अब तक यह अस्पताल सुचारू रूप से चालू नहीं हुआ है l नजफगढ़ में 100 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए आरएचटीसी अस्पताल को चिकित्सकों की कमी और आवश्यक सुविधाओं के अभाव का सामना करना पड़ रहा है। AI Generated
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केंद्र सरकार ने वर्ष 2018 में दिल्ली के नजफगढ़ (Najafgadh) के वंचित क्षेत्र में 100 बिस्तरों वाले मल्टी स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल के निर्माण को मंजूरी दी थी। इस अस्पताल का उद्देश्य 73 गांवों में फैली लगभग 13.65 लाख की स्थानीय आबादी की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करना था। एक अनुमान के मुताबिक़ सभी विभागों और आवश्यक मानव संसाधनों के साथ यह 100 बिस्तरों वाला अस्पताल मई 2020 तक पूरी तरह से चालू हो जाना था, लेकिन……….…अब समझते है क्या है पूरा मामला l 

केंद्र सरकार के इस कदम को ऐतिहासिक बताते हुए तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया (Dr.Mansukh Mandaviya)  ने कहा कि अस्पताल में चिकित्सा, प्रसूति एवं स्त्रीरोग, बाल रोग और सर्जरी सहित चार प्रमुख नैदानिक ​​सेवाएं उपलब्ध होंगी, जिनमें रक्त बैंक, निदान सेवाएं और सामान्य चिकित्सा, सर्जरी, दंत चिकित्सा, ईएनटी, नेत्र रोग, श्रवणमापी और बाल चिकित्सा देखभाल के लिए अलग-अलग आउट पेशेंट विभाग (ओपीडी) शामिल हैं। श्री नड्डा ने कहा, "अस्पताल में 30 से अधिक योग्य डॉक्टरों और 40 नर्सों के अलावा 50 संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा कर्मचारी होंगे।"

उद्घाटन के 9 वर्ष बीत जाने के बाद भी अब तक यह अस्पताल सुचारू रूप से चालू नहीं हुआ है l नजफगढ़ में 100 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए आरएचटीसी (Rural Health and Training Centre) अस्पताल को उद्घाटन के 9 साल बाद भी चिकित्सकों की कमी और आवश्यक सुविधाओं के अभाव का सामना करना पड़ रहा है। अक्टूबर 2023 में केंद्रीय मंत्री  मनसुख मंडाविया द्वारा स्थानीय सांसद प्रवेश वर्मा (Pravesh Varma) की उपस्थिति में अस्पताल का उद्घाटन किया गया था, लेकिन आज यह अस्पताल अपनी पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो पा रहा है।

अस्पताल के कर्मचारियों ने बताया कि सरकार ने पदों को भरने के लिए कई विज्ञापन जारी किए हैं, लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया में देरी और प्रशासनिक अड़चनें डॉक्टरों की उपलब्धता को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इसके कारण अस्पताल का संचालन सीमित क्षमता के साथ हो रहा है और मरीजों को लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ रही है। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि विज्ञापन निकालने के बावजूद कोई रेजिडेंशियल या प्रैक्टिशनर डॉक्टर आने के लिए तैयार नहीं है l उम्मीदवारों का कहना है की नजफगढ़ गाँव-देहात जैसा क्षेत्र है और मुख्य शहर दिल्ली से काफी दूर है l इसके बजाय वह किसी अन्य निजी अस्पताल में काम करना पसंद करेंगे न की नजफगढ़ में l 

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि डॉक्टरों और स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया तेज की जा रही है और जल्द ही रेडियोलॉजी समेत सभी विभागों को सक्रिय किया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि अस्पताल आगामी महीनों में पूरी क्षमता के साथ जनता को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराएगा l फिलहाल केवल OPD (आउट पेशेंट डिपार्टमेंट) ही चल रहा है l कुछ न कुछ हमेशा ही अस्पताल में कमी दिखती है जैसे कि कभी कोई तकनीकी समस्या या फिर कभी पर्याप्त डॉक्टरों की कमी l 

[VT]

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