पुरानी बोतल बन सकती है आपके लिए खतरा, इसमें रखा पानी पेट में घोलता है जहर

शरीर को हाइड्रेटेड रखना बहुत जरूरी है। इसके लिए हर कोई घर से अपने साथ पानी की बोतल लेकर चलता है, लेकिन इन सबमें अक्सर हम एक छोटी सी गलती कर बैठते हैं
एक युवती पार्क जैसे खुले वातावरण में बैठकर पानी की बोतल से पानी पी रही है, पास में मेज पर किताबें रखी हैं।
पुरानी और गंदी पानी की बोतल में बैक्टीरिया पनप सकते हैं, इसलिए बोतल को नियमित साफ करें, पानी ताजा रखें और समय-समय पर बोतल बदलना स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।IANS
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शरीर को हाइड्रेटेड रखना बहुत जरूरी है। इसके लिए हर कोई घर से अपने साथ पानी की बोतल लेकर चलता है, लेकिन इन सबमें अक्सर हम एक छोटी सी गलती कर बैठते हैं, और वो है कि हम पानी की बोतल को समय-समय पर बदलते नहीं हैं। उस एक बोतल का इस्तेमाल महीनों तक करते रहते हैं, बिना यह सोचे कि पुरानी बोतल और उसमें रखा पानी हमारे स्वास्थ्य के लिए कितना खतरनाक हो सकता है।

विज्ञान और आयुर्वेद दोनों ही नजरिए से पानी केवल तभी सुरक्षित और शुद्ध रहता है जब वह सही चीज में हो। प्लास्टिक या किसी भी प्रकार की बोतल में समय के साथ बैक्टीरिया, वायरस और कवक पनपने लगते हैं। यह समस्या खासतौर पर तब होती है जब बोतल बार-बार इस्तेमाल की जाती है और उसे अच्छे से साफ नहीं किया जाता। आयुर्वेद में कहा गया है कि शुद्ध और ताजा भरा पानी ही शरीर के लिए जीवनदायिनी शक्ति है। जब पानी अशुद्ध या दूषित होता है, तो यह पाचन और मेटाबॉलिज्म पर बुरा असर डाल सकता।

अगर हम रोजमर्रा की बोतल की बात करें तो इसमें दो-तीन दिन से ज्यादा पानी रखना या उसी बोतल को लंबे समय तक इस्तेमाल करना नुकसानदेह हो सकता है। पुरानी बोतल में बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं, और यह पेट दर्द, उल्टी या पेट फूलना जैसी परेशानियों का कारण बन सकते हैं। विज्ञान की मानें तो पानी भले ही स्वच्छ और फिल्टर किया हुआ हो, लेकिन जिस बर्तन में वह रखा गया है, उसकी सफाई और समय पर न बदला जाना पानी की शुद्धता को प्रभावित करते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार, लगातार इस्तेमाल की गई बोतल में मौजूद सूक्ष्म जीव और अशुद्धि शरीर में वात और पित्त के असंतुलन को बढ़ा सकते हैं। यह शरीर की प्राकृतिक प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर सकता है और छोटे-मोटे संक्रमणों का खतरा बढ़ा देता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि प्लास्टिक की बोतलों को हर 6 से 12 महीनों में बदल देना चाहिए। इसके अलावा, हर दिन या हर दो-तीन दिन में पानी को ताजा डालना और बोतल की अच्छी तरह से सफाई करना भी बेहद जरूरी है। अगर बोतल में बदबू आने लगे या धब्बे या निशान पड़ जाएं, तो उसे तुरंत बदल दें। सिर्फ पानी नहीं, बल्कि बोतल की शुद्धता भी स्वास्थ्य के लिए अहम है।

आजकल बाजार में स्टेनलेस स्टील और कांच की बोतलों का चलन बढ़ रहा है। ये बोतलें बैक्टीरिया पनपने का खतरा कम करती हैं। साथ ही, इन बोतलों में पानी लंबे समय तक ताजा और ठंडा रहता।

(MK)

एक युवती पार्क जैसे खुले वातावरण में बैठकर पानी की बोतल से पानी पी रही है, पास में मेज पर किताबें रखी हैं।
मेरा मानसिक स्वास्थ्य, हाय तौबा ज़िंदाबाद !

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